प्रस्तुती – भीष्म कुकरेती
कंडाली , शिस्नु बिच्छू घास (Sting Nettle), जिसे वैज्ञानिक रूप से Urtica dioica कहा जाता है, दुनिया के कई हिस्सों में न केवल एक जंगली जड़ी-बूटी बल्कि एक पौष्टिक व्यंजन के रूप में भी बहुत लोकप्रिय है। पकने के बाद इसके डंक (sting) पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं।
यहाँ प्रमुख देशों और वहां के प्रसिद्ध बिच्छू घास के व्यंजनों का विवरण दिया गया है:
- भारत (विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश)
भारत के हिमालयी क्षेत्रों में इसे ‘कंडाली‘ या ‘बिच्छू घास’ कहा जाता है।
- व्यंजन का नाम: कंडाली का साग (Kapali/Thechwani)
- रेसिपी:
- कोमल बिच्छू घास की पत्तियों को चिमटे की मदद से तोड़ा जाता है।
- इन्हें उबलते पानी में तब तक पकाया जाता है जब तक कि वे बिल्कुल नरम न हो जाएं।
- पकी हुई पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाया जाता है।
- लोहे की कड़ाही में जख्या (एक स्थानीय तड़का) और लहसुन के साथ इसे भूनकर गाढ़ा साग तैयार किया जाता है।
- नेपाल
नेपाल में इसे ‘शिशु’ (Sishnu) कहा जाता है और यह वहां के पारंपरिक आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- व्यंजन का नाम: शिशु को खोलेला (Sishnu Soup)
- रेसिपी:
- सूखी या ताजी पत्तियों को पानी में उबालकर गाढ़ा सूप बनाया जाता है।
- इसमें मक्का का आटा (Cornmeal) मिलाया जाता है ताकि यह गाढ़ा और मलाईदार बने।
- इसे अक्सर ‘ढिंडो’ (उबला हुआ अनाज) या भात के साथ परोसा जाता है।
- स्वीडन और नॉर्डिक देश
स्कैंडिनेवियाई देशों में वसंत के समय बिच्छू घास का सूप स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
- व्यंजन का नाम: Nässelsoppa (Nettle Soup)
- रेसिपी:
- पत्तियों को ब्लांच (हल्का उबालना) करके पीस लिया जाता है।
- इसे चिकन या सब्जियों के शोरबे (Stock) के साथ पकाया जाता है।
- इसमें क्रीम डाली जाती है और अक्सर उबले हुए अंडे के टुकड़ों के साथ परोसा जाता है।
- इटली
इटली में इसे पास्ता के भरावन और स्वाद के लिए उपयोग किया जाता है।
- व्यंजन का नाम: Risotto agli Ortiche / Ravioli filling
- रेसिपी:
- रिसोट्टो: चावल पकाते समय अंत में बिच्छू घास की प्यूरी और मक्खन मिलाया जाता है।
- रैवियोली: उबली हुई पत्तियों को रिकोटा पनीर के साथ मिलाकर पास्ता के अंदर भरा जाता है।
- ब्रिटेन और आयरलैंड
यहाँ इसे चाय और पारंपरिक ‘कॉर्निश‘ पनीर बनाने में उपयोग करते हैं।
- व्यंजन का नाम: Nettle Tea / Yarg Cheese
- उपयोग:
- चाय: सुखी पत्तियों को गरम पानी में भिगोकर हर्बल चाय बनाई जाती है।
- पनीर: ‘यार्ग‘ (Yarg) नामक प्रसिद्ध पनीर को बिच्छू घास की पत्तियों में लपेटकर तैयार किया जाता है, जिससे पनीर पर एक खास पैटर्न और स्वाद आता है।
तुलनात्मक तालिका
| देश | स्थानीय नाम | मुख्य व्यंजन | मुख्य सामग्री |
| भारत | कंडाली | कंडाली का साग | जख्या, लहसुन, चावल का मांड |
| नेपाल | शिशु | शिशु को सुप | मक्का का आटा, मिर्च |
| स्वीडन | Nässla | Nässelsoppa | क्रीम, उबला अंडा, शोरबा |
| इटली | Ortica | रैवियोली / रिसोट्टो | पास्ता, रिकोटा पनीर, मक्खन |
स्वीडन व्यंजन
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स्वीडन में बिच्छू घास (Nettle) से बना सूप वहां की वसंत ऋतु का एक अनिवार्य हिस्सा है। यहाँ इस पारंपरिक स्वीडिश व्यंजन की विस्तृत रेसिपी और खासियत दी गई है:
स्वीडिश नेट्टेल सूप (Nässelsoppa)
यह सूप स्वीडन में बहुत ही सम्मान के साथ खाया जाता है। इसे अक्सर वसंत की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है जब बिच्छू घास की नई और कोमल पत्तियां उगती हैं।
सामग्री:
- बिच्छू घास: लगभग 2 लीटर ताजी पत्तियां (उबलने के बाद यह मात्रा कम हो जाती है)
- पानी/शोरबा: 1 लीटर (सब्जी या चिकन स्टॉक)
- मक्खन: 2 बड़े चम्मच
- मैदा: 3 बड़े चम्मच (सूप को गाढ़ा करने के लिए)
- सफेद वाइन या नींबू का रस: थोड़ा सा स्वाद के लिए
- हर्ब्स: ताजी चाइव्स (Chives) या सोआ (Dill)
- क्रीम: सजाने और मलाईदार स्वाद के लिए
- परोसने के लिए: उबले हुए अंडे (आधे कटे हुए)
बनाने की विधि:
- सफाई: सबसे पहले दस्ताने पहनकर पत्तियों को अच्छे से धो लें और डंठल अलग कर दें।
- ब्लांचिंग: पत्तियों को थोड़े से नमक वाले पानी में 5-10 मिनट तक उबालें जब तक वे नरम न हो जाएं। इससे उनका डंक पूरी तरह खत्म हो जाता है।
- पीसना: उबली हुई पत्तियों को छान लें (पानी को फेंकें नहीं, उसे स्टॉक की तरह उपयोग करें) और पत्तियों को बारीक पीस लें।
- तड़का: एक बर्तन में मक्खन गरम करें, उसमें मैदा डालकर हल्का भूनें। अब धीरे-धीरे पत्तियों वाला पानी (स्टॉक) डालें और चलाते रहें ताकि गांठ न बने।
- पकाना: अब इसमें बिच्छू घास का पेस्ट डालें और 5-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। अंत में नमक, काली मिर्च और थोड़ी क्रीम मिलाएं।
- परोसना: इस गरम सूप को एक कटोरे में निकालें और ऊपर से आधा कटा हुआ उबला अंडा रखकर परोसें।
विशेषता:
स्वीडन में इसे अक्सर ‘हार्ड ब्रेड‘ (Knäckebröd) के साथ खाया जाता है। यह सूप आयरन और विटामिन-सी से भरपूर होता है, जो सर्दियों के बाद शरीर को नई ऊर्जा देने के लिए बेहतरीन माना जाता है