प्रस्तुती – भीष्म कुकरेती
अफगानिस्तान में बिच्छू घास (जिसे वहां ‘सिसून‘ या ‘सिसू‘ कहा जाता है) का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में। यह घास न केवल अपने पोषण गुणों के लिए जानी जाती है, बल्कि इसे पारंपरिक चिकित्सा का हिस्सा भी माना जाता है।
अफगान संस्कृति में इसे अक्सर वसंत ऋतु में ताज़ा तोड़कर बनाया जाता है। पकाने के बाद इसकी चुभन पूरी तरह खत्म हो जाती है और इसका स्वाद पालक से मिलता-जुलते लेकिन थोड़ा मिट्टी जैसा (Earthy) होता है।
यहाँ अफगानिस्तान में प्रचलित इसकी प्रमुख रेसिपी साझा कर रहा हूँ:
- बिच्छू घास का शोरबा (Shorwa-e-Sisoon)
यह एक प्रकार का सूप या स्टू है जो सर्दियों के अंत और वसंत की शुरुआत में बहुत लोकप्रिय है।
सामग्री:
- ताजी बिच्छू घास की पत्तियां (ग्लव्स पहनकर तोड़ी हुई)
- लहसुन की 4-5 कलियाँ (बारीक कटी हुई)
- प्याज (1 मध्यम)
- सूखे अखरोट (कुचले हुए)
- चावल या आलू (गाढ़ापन लाने के लिए)
- नमक और काली मिर्च
विधि:
- सावधानी: सबसे पहले पत्तियों को चिमटे या दस्तानों की मदद से गर्म पानी में उबालें। उबालने से इसके काँटे (Stinging hairs) निष्क्रिय हो जाते हैं।
- एक बर्तन में तेल गरम करें और प्याज-लहसुन को हल्का सुनहरा होने तक भूनें।
- इसमें उबली हुई और कटी हुई बिच्छू घास डालें।
- अब इसमें पानी और थोड़े चावल या कटे हुए आलू डालें ताकि शोरबा गाढ़ा हो सके।
- अंत में कुचले हुए अखरोट डालें (यह अफगान शैली की खासियत है)। इसे धीमी आंच पर 20 मिनट तक पकाएं और गरमा-गरम ‘नान’ के साथ परोसें।
- सिसूनबोलानी (Sisoon Bolani)
‘बोलानी’ अफगानिस्तान की एक मशहूर भरवां रोटी (Flatbread) है। आमतौर पर इसे गंदना (लीक) से बनाया जाता है, लेकिन बिच्छू घास का स्टफिंग के रूप में इस्तेमाल काफी अनोखा है।
सामग्री:
- मैदा (आटा गूंथने के लिए)
- बिच्छू घास (उबली और निचोड़ी हुई)
- हरी मिर्च और हरा धनिया
- अनारदाना पाउडर (खटास के लिए)
विधि:
- बिच्छू घास को उबालकर उसका सारा पानी निचोड़ लें और उसे बारीक काट लें।
- कटी हुई घास में बारीक कटी हरी मिर्च, नमक और थोड़ा अनारदाना मिलाएं।
- आटे की छोटी लोई लेकर उसे पतला बेलें और आधे हिस्से पर यह मिश्रण फैलाएं।
- इसे आधा मोड़कर (D-shape) किनारों को बंद करें।
- तवे पर हल्का तेल लगाकर दोनों तरफ से कुरकुरा होने तक सेकें। इसे अक्सर पुदीने की चटनी या दही के साथ खाया जाता है।
महत्वपूर्ण सुझाव:
- सुरक्षा: कच्ची बिच्छू घास को कभी न छुएं और न ही खाएं। इसे पकाने या सुखाने के बाद ही इसका सेवन सुरक्षित होता है।
- स्वाद: अगर आपको इसका स्वाद बहुत ज्यादा ‘हरा’ लगे, तो इसमें थोड़ा नींबू का रस या दही मिलाने से स्वाद संतुलित हो जाता है।