वर्तमान पता:- फ्लैट नं 587, मैट्रो व्यू अपार्टमेंट, सैक्टर -13,पाकेट-बी, द्वारका नई दिल्ली- 110078.
माता नाम :- स्व श्रीमती सावित्री देवी।
पिता नाम :- स्व श्री पंचम सिंह रावत
गाँव :- भरतपुर, पुराना प्रसिद्ध नाम ” भट्या ”
पट्टी :- गुजडू
जिला :- पौड़ी गढ़वाल
जन्म दिन महीना सन :
28 दिसम्बर 1950
शिक्षा :- स्नातक, दिल्ली विश्वविद्यालय
व्यवसाय :- वर्ष 1971 दूरदर्शन दिल्ली में कार्यरत।
दूरदर्शन के प्रसिद्ध कार्यक्रम ” चित्रहार” और ” यादें जो कुछ याद रहें ” का 1986 तक सह निर्माता निर्देशक।
वर्ष 2010में दूरदर्शन समूह से “मंच प्रबंधक” के पद से
सेवानिवृत्त ।
कैसे नाट्य मंचन:- अभिनय, निर्देशन, और
नेपथ्य के कार्य ।
कोई प्रशिक्षण लिया हो तो :- 1983 में फिल्म और टेलीविजन संस्थान,पूना से, फिल्म और टेलीविजन के कार्यक्रमों को बनाने और प्रसारण करने बेसिक ट्रेनिंग प्राप्त की।
किन किन नाटकों :- सन 1974 में ” उदंकार ” नामक संस्था की स्थापना की जिसके अंतर्गत लगभग 10 गढ़वाली नाटकों का आयोजन किया, जिसमें अभिनय के साथ साथ निर्देशन और मंच सज्जा के रूप में 1986 तक कार्य किया।
1. खबेश
2. कुजणी क्य बूंद
3. अब दिख्या तब
4. द्यूर भौज
5. जंक जोड़
6. अर्धग्रामेश्वर
7. अदालत
8. मंगतू बौल्या
9. हरि हिंदवाण
अदालत, मंगतू बौल्या, और हरि हिंदवाण नाटकों का मंचन, क्रमशः मुंबई, जालंधर, पौड़ी और मुंबई में भी किया गया।
दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के प्रांगण में वर्ष 1987और 1989 में सबसे पहला तीन दिवसीय ” कौथिग” कार्यक्रम का आयोजन एवं निर्देशन किया।
बर्ष 1988 में गढ़वाली लोकगीत और नृत्यों का सबसे पहला चित्र गीत video का निर्माण एवं निर्देशन किया।
वर्ष 2007 में द्वारका दिल्ली में तीन दिवसीय कौथिग का आयोजन एवं निर्देशन किया।
वर्ष 2011 में कालिंका चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की जिसके अंतर्गत दिल्ली आई टी वो के नजदीक हिंदी भवन में सबसे पहला 4 दिवसीय ” उत्तराखंड नाट्योत्सव “का आयोजन किया।
वर्ष 2018 में द्वारका के डांस साहिब सिंह वर्मा स्टेडियम में तीन दिवसीय कौथिग का आयोजन किया। इस के अतिरिक्त समय समय पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन एवं निर्देशन किया।
फिल्मों में :- लगभग 35 डाक्यूमैंट्री ( सभी गढ़वाल और कुमाऊं के तीर्थ और पर्यटक स्थलों पर आधारित ) फिल्मों का निर्माण एवं निर्देशन किया।
पंच बद्री
पंच केदार
माणा एक गांव
कुमाऊं के तीर्थ स्थल
शरदोत्सव पौड़ी
पहाड़ों की रानी मसूरी
लद्दाख फैस्टेवल
राग देश – 13 एपीसोड
सैर सपाटा – 13 एपीसोड ( हिमाचल के पर्यटक स्थलों पर आधारित )
कृषक मंच – 26 एपीसोड
उपरोक्त सभी कार्यक्रम दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर प्रसारित किए गए। कार्यकर्मों में भाग लिया
कोई विशेष अनुभ –
आज गढ़वाली नाट्य मंचन , कार्य कर्मों की चुनौतियाँ व समाधान :-
आज पिछले कई दशकों से कुछ अच्छे नाटक ना तो लिखे ही जा रहे है और ना ही मंचन करने का साहस ही कोई कर पा रहा है। अगर आप मुफ्त में कोई कार्यक्रम आयोजित करते हैं तो कुछ लोग देखने आ जायेंगें परन्तु जैसे ही आपने टिकट लगाया तो लोग आते नहीं। आज हमारी संस्कृति केवल नाच गाने के कार्यक्रमों तक ही सीमित रह गई है, नाटकों के प्रति लेखक और आयोजक जनता में रुचि बनाने में सफल नहीं हो पायें हैं। हमें अच्छे और हमारे संस्कारों से जुड़े नाटकों के लखकों को ढूंढना होगा और उन्हें प्रोत्साहन देना होगा।
विनोद कुमार रावत