( जानिए गढवाली कथाकार को उनकी जुबानी श्री कुलानन्द घनशाला में आपे उत्तर की प्रतीक्षा में )
गढवाली के प्रसिद्ध कहानीकार कुलानन्द घनशाला का कथा संसार
(भीष्म कुकरेती से लिखाभेंट )
लघु परिचय
नाम – कुलानन्द घनशाला
माता पिता – श्रीमती भूमा देवी एवं श्री बच्चीराम घनशाला
जन्म तिथि – 15.01.1963
शिक्षा Bcom, LLB
आजीविका – बैंकिंग सेवा से सेवानिवर्त
कहानी संख्या प्रकाशित 12 प्रकाशित (इंटरनेट माध्यम सहित )
कहानी संग्रह प्रकाशित – भागे भताग
लेखन की शुरुआत और प्रेरणा:
आपने लिखना कब और कैसे शुरू किया? क्या कोई खास घटना थी जिसने आपको प्रेरित किया?
लिखना तो बहुत पहले शुरू कर दिया था लगभग 40-45 वर्ष तो हो ही गए होंगे l
हाँ अपने आस -पास, गांव गुठयार, गढ़वाल उतराखंड की ही घटनाओं पर लोक को मध्यनज़र रखते हुए कहानी बुनने का प्रयास करता हूं l
आपकी कहानियों के मुख्य विषय (जैसे ग्रामीण जीवन, सामाजिक मुद्दे) कहाँ से आते हैं? – लोक से, अपने गांव गुठयार से l
आपके पसंदीदा लेखक कौन हैं और उन्होंने आपको कैसे प्रभावित किया?
श्री दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल l उनकी ब्वारी, म्वारी किताबें बहुत पहले पढी थीl
लेखन प्रक्रिया और शैली:
आप अपनी कहानियों के लिए रिसर्च कैसे करते हैं? रिसर्च की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी कहानी लोक से जुडी होती हैं l
आपकी लेखन प्रक्रिया क्या है – क्या आप योजना बनाते हैं या लिखते हुए सोचते हैं?
नहीं कोई योजना नहीं बनती मन में कोई विषय आया तो उस पर जरूर सोचना होता है और फिर लिखना शुरू हो जाता है l
आपकी लेखन शैली (जैसे यथार्थवादी, व्यंग्यात्मक) कैसे विकसित हुई? लोक से प्राप्त औषधि से l
कथाकार के रूप में चुनौतियाँ:
अभी तो मेरा पहला संग्रह आया है जिसमे ज्यादा कुछ चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ा l क्योंकि उत्तराखंड भाषा संस्थान से कुछ आर्थिक मदद मिल गई थी l परन्तु मुझे लगता है कहानियाँ छपवाने में आर्थिकी सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है l
एक लेखक के रूप में आपको किन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा? अभी तो कुछ खास नहीं l
क्या आपको कभी लगता है कि आपकी कहानियों की गलत व्याख्या की गई है? नहीं
आप अपनी कला में ‘सच्चाई’ और ‘कल्पना’ को कैसे संतुलित करते हैं? देश काल परस्थिति को मध्यनज़र रखते हुए l
करियर और जीवन:
क्या आपकी पत्नी/परिवार का आपके काम पर कोई प्रभाव रहा है? नहीं l
आप अपने जीवन और काम के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं? समय को देखते हुए l
आप सफलता और पहचान को कैसे देखते हैं युवा लेखकों के लिए सलाह: अभी तो मेरा कहानियों में ऐसा कोई खास काम नहीं है l
युवा कथाकारों को सलाह- कहानियां कोरी कल्पनायें ना हों l कुछ घटित हो या अन्य कुछ..
–
नए लेखकों को आप क्या सलाह देंगे जो अपनी पहचान बनाना चाहते हैं? ऊपर दे दि की कहानी केवल कल्पना मात्र ना होl
क्या आपको लगता है कि आज के दौर में कहानी कहने का तरीका बदल रहाl बिल्कुल l