(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता लिखाभेंट )
भीष्म कुकरेती – कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि -मेरा जन्म हैदराबाद के सिकन्दराबाद, हैदराबाद में सन 28 दिसंबर 1971 में हुआ था।
माता पिता नाम – मेरी माताजी का नाम श्रीमती सम्पति देवी और पिताजी का नाम श्री गुलाब सिंह नेगी है।
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – हम पौड़ी गढ़वाल के पोखड़ा ब्लाक के पट्टी गुराडस्यू के ग्राम बोरगांव के हैं।
शिक्षा – मेरी शिक्षा स्नातक एम.के.पी. पी.जी. कालेज देहरादून से हुई है।
आधारिक – बरेली
मिडल /हाई स्कूल देहरादून
उच्च शिक्षा – देहरादून
आजीविका – शिक्षण कार्य
सम्प्रति – शिक्षिका
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
प्रेमलता – जी बाल्यकाल में मुझे जब अपने सबक याद करने होते थे तो मैं मुख्य मुख्य बिन्दुओं को लयात्मक गीत में लिखकर याद कर लेती थी। फिर उनके परिप्रेक्ष्य में लिखना आसान हो जाता था।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
प्रेमलता पहली हिंदी कविता अपने बी.टी.सी. के प्रशिक्षण काल में पढ़ी थी।
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
प्रेमलता – जी आदरणीय बीना कण्डारी दीदीजी मुझे गढ़वाली कविसम्मेलन में ले गयी जहां आदरणीय लोकेश नवानी जी ने मेरी कविता को द्वितीय श्रेष्ठ कविता कहा था। तब से गढ़वाली कविता के प्रति रुझान बढ़ गया।
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
प्रेमलता – अभी तक मेरी दो गढ्वाली कविता संग्रह छप चुके हैं जिसमें दो सौ से अधिक गढ़वाली कविताएं हैं।
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
प्रेमलता -तीन कविता संग्रह छप चुके हैं जिसमें एक हिंदी कविता संग्रह ‘मुझे कुछ कहना है’
दो गढ़वाली कविता संग्रह – ‘ तु बोल त सै’ और ‘ मन की गेड़’ हैं।
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
प्रेमलता -मैं 2011 से गढ़वाली कविता लिख रही हूं। मुझे अपनी जड़ो से जुड़े रहने, अपनी बोली भाषा में गीत कविता रचने में आनन्द की अनुभूति होती है साथ ही यह अहसास होता है कि मैं अपनी थाती माटी से जुड़ी हुई हूं।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
प्रेमलता – मेरी गैर गढ़वाली कविता मेरी हिंदी की कविता है ‘बेटी के मन की गेड़’ है।
इसमें अहसास होता है कि हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाये पर आज भी महिलाएं या बेटियां अपने मन की बात बोलने में झिझकती हैं। वो बहुत कुछ बातें मन में ही एक गांठ बांध कर छुपा लेती हैं।
भी . कु. – गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
प्रेमलता – गढ़वाली कविता ‘ ‘तु लेखी पैढ़ि की बेटी नयो सौभाग्य रचि दे हो’ है जो विधाता छंद में रचित है। इसमें बेटियों को पढ़ने लिखने और स्वाभिमान से अपनी मर्यादाओं में रहने का आह्वान किया गया है।
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
प्रेमलता – मेरी कविताओं में समाज में हो रही गतिविधियों का चित्रण रहता है जिसमें महिला सशक्तीकरण विशेष पहलू के रूप में स्वयं उभर कर आ जाता है। मेरी कविताओं में प्रेम का भाव छलक छलक कर उभरता है। मेरी कविताओं में आधुनिक प्रगति के साथ ही अपनी संस्कृति सभ्यता के साथ मर्यादा में रहने का उल्लेख रहता है।
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
प्रेमलता – मुक्त व आधुनिक शैली, छंदात्मक शैली, गजल शैली
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
प्रेमलता – जी हां मेरी ग़ज़लों को आदरणीय सुधा ममगाई जी ने और आदरणीय आलोक मलासी जी ने संगीतबद्ध कर गायन भी किया है।
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
प्रेमलता – नयी कविता नये विचारों से ओतप्रोत है। जितना पुरानी कविताओं का सम्मान होना चाहिए उतना ही उन्मुक्त ह्दय ने नयी कविता की स्वीकृति भी।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
प्रेमलता – जी बहुत बार ।
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
प्रेमलता – बहुत बार समाज में हो रही गतिविधियों की क्रिया की प्रतिक्रिया रूप में मेरी कविताओं का जन्म होता है। अच्छा लगता है तो कविता। बुरा लगता है और विरोध करना है तो कविता।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
प्रेमलता – मैं आदरणीय गिरीशचंद्र तिवारी ‘गिर्दा’, आदरणीय लोकेश नवानी जी, आदरणीय नरेन्द्र सिंह नेगी जी, आदरणीय बीना बेंजवाल जी, आदरणीय कुमार विश्वास जी, आदरणीय पयाश पोखड़ा जी, आदरणीय शांति प्रकाश जिग्यासु जी,आदरणीय बीना कण्डारी जी आदि कवि, लेखकों से प्रभावित हूं। ये सब अपने अपने स्तर पर बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। आदरणीय लोकेश नवानी जी तो सही मायनों में पुरानी और युवा पीढ़ी को कविताओं की समझ से परिचित करा रहे हैं।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
प्रेमलता -समाज में जन चेतना
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
प्रेमलता – जी हां कुछ हद तक।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
प्रेमलता – जी छंदबद्धता में भावों के अनुरूप लिखने में कभी कभी चुनौती आती है।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
प्रेमलता – मैं कविता संग्रह कर पुस्तक रूप में छपा देती हूं। इससे पहले सोशल मीडिया में साझा करती रहती हूं और उसकी कमी और खूबी को जान लेती हूं।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
प्रेमलता – जी हां । मैने वोट देने के प्रोत्साहन के लिए कविताएं लिखी है।
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
प्रेमलता – नहीं ।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
प्रेमलता – सोशल मीडिया जैसे फेसबुक।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
प्रेमलता – बहुत । वहीं से मेरे पंखो को उड़ान मिली है ।
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
प्रेमलता – जी मैंने यू-ट्यूब में अकाउंट खोला है।
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
प्रेमलता – जी अब शुभारंभ कर रही हूं अभी तीन चार कविताएं पोस्ट की हैं।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
प्रेमलता – जी हां। मेरा प्रेमलता सजवाण नाम से यूट्यूब चैनल है।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
प्रेमलता – जी मैने अन्य कला रूपों के लिए कविता लिखी हैं। जैसे डीजे गीत और विदाई गीत।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
प्रेमलता – त्वरित क्रिया प्रक्रिया से मेरी कविता उपजती है। मैं सोच सोचकर नहीं लिख सकती।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
प्रेमलता – जो जनमानस के हृदय तक पहुंचे।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
प्रेमलता – जी हां।
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
प्रेमलता – उसका कारण है कि विद्यालय को इस रूप में अच्छी सामग्री का उपलब्ध न हो पाना। दूसरा गढ़वाल क्षेत्र को छोड़कर गढ़वाली मूल के बच्चों का अभाव। जिससे रटने वाली प्रवृति से भाव और लय का प्रभावित होना।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युवाओं तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
प्रेमलता – मैं कोशिश करती हूं कि कवि सम्मेलन में युवा आयें और हमारे साथ साथ नयी पीढ़ी भी कविता को समझे और साथ ही लिखे भी।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
प्रेमलता – जो जन मानस के हृदय को छू सके। जो उनको अहसास करायें कि कविता उनके लिए ही लिखी गयी है।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
प्रेमलता – प्रकाशन में समय और धनराशि की आवश्यकता होती है । और यदि आप किताब प्रकाशित करवा भी लेते हैं तो उसे जनमानस तक कैसे पहुंचाये ये भी चुनौती होती है।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
प्रेमलता – लाइब्रेरी ज्यादा और सुगम बनाई जायें जहां न्यूनतम शुल्क में किताबें पाठको को उपलब्ध हो सके।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
प्रेमलता – लिखिये और खूब लिखिये। समय के साथ- साथ परिपक्वता आ जाती है। यदि कोई कहे आप लिखना छोड़ दो तो आप और भी ज्यादा लिखो। क्यों कि किसी एक व्यक्ति की राय को जनमानस की राय नहीं समझना चाहिए। आप स्वयं पर विश्वास रखो।अच्छे लोग भी मिलेंगे जो आपका उत्साहवर्धन करेंगे, आपको रास्ता दिखायेंगे।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
प्रेमलता – जी मैं उपन्यास, बाल कहानियां, चित्रकथा और शब्द रहित कहानियों की किताबे लिख चुकी हूं।
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
प्रेमलता – युवा अपनी शिक्षा दीक्षा को बरकरार रखते हुए रचना करतें रहें। और जब अपनी शिक्षा से थोड़ा समय मिले तो कवि सम्मेलनों में, गोष्ठियों में भाग लें। किसी अच्छे गुरु से मार्गदर्शन लेते रहें।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
प्रेमलता – मुझे पाठको से आदर सम्मान और प्यार मिलता है।ये मेरे लिए गौरवान्वित पल होते हैं।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
प्रेमलता – भोली- भाली मनमौजी जन कवि।