जानिये गढ़वाली कवित्री /कवि श्री ओमप्रकाश ध्यानी (ओम ध्यानी) से उनके कवित्व पर उनकी जुवानी
(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लखाभेंट )
भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि – 28/02/1978
माता पिता नाम -माता जी श्रीमती धनेश्वरी देवी पिताजी स्व.श्री हीरामणी ध्यानी
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – उत्तराखंड पौड़ी गढ़वाल
शिक्षा –
आधारिक –
मिडल /हाई स्कूल
उच्च शिक्षा -√
आजीविका -सेल्फवर्क
सम्प्रति –
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
उत्तर – मेंरे बड़े भाई श्री जयप्रकाश ध्यानी जी
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
उत्तर कोई नही
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
उत्तर – दादू मैं परवतू को वासी महाकवि स्व.श्री कन्हैया लाल डंडरियाल जी की कविता
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
उत्तर – लगभग 50 कविताएं
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
उत्तर -संग्रह तो नहीं हुए अभी परन्तु लगभग 50 तक कविताएं में रचित कर चुका हूं जो सोशल मीडिया के द्वारा ही लोगों तक पहुंची है और लोगों का प्यार आशीर्वाद अच्छा मिला है
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
उत्तर – मैं लगभग 1994से लेखन और गायन काव्य कर रहा हूं और जब मैंने गढरत्न श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी को रेडियो पर ग्रामजगत कार्यक्रम में सुना तो उन्हीं से प्रेरणा मिली कि मैं भी उनकी तरह अपने पहाड़ पर लिखूं।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
उत्तर – सच बताऊं तो मुझे अपने पहाड़ से अच्छा कुछ लगता ही नहीं और अगर लगता तो आज मैं गढ़वाली कवि के रूप में नहीं होता
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
उत्तर – दादू मैं परवतू को वासी महाकवि स्व.श्री कन्हैया लाल डंडरियाल जी की ये कविता मुझे बहुत अच्छी लगती हैं क्योंकि इस कविता में बचपन जवानी और बुढ़ापे सभी वर्गों पर कहा गया है साथ में पहाड़ के काम काज रीति रिवाजों रितुऔ पेड़ पौधो मेला कौथिग प्रेम आदि सभी विषयों पर प्रकाश डाला गया है
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
उत्तर – ज्यादातर मेरी कविताओं में पलायन ही विषय रहा है जोकि आज हमारे उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौती और समस्या है
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
उत्तर –
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
उत्तर – जी हां नव गीत व ग़ज़ल तो जब तक ये जीवन रहेगा लिखते और गाते ही रहेंगे
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
उत्तर – देखिए आजकल बहुत से नये नये गायक गायिका और कवि आ रहे हैं परन्तु उनमें से अधिकांश लोग काम कर रहे हैं परन्तु उनका भाषा पर कोई अनुभव नहीं ऐसा लगता है कि जैसे किताब पढके रट्टा मार के मंच में बोल दो।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
उत्तर -हां नये प्रयोग जरूरी भी है पर भाषा पर कोई प्रयोग नहीं क्योंकि मेरा यही प्रयास रहता है कि अपनी भाषा के पुराने शब्दों को मैं जीवित रख सकूं।
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
उत्तर – देखिए गीत कविता जब मैं लिखने बैठता हूं तो खाने सोने का कोई होस नहीं रहता है लिखने के बाद आट से दस बार पुनः दुबारा रचना पढ़ता हूं फिर कई शब्द नये जोड़ लेता हूं कई शब्द काट छांट के उस रचना को फाइनल करता हूं। और उसके बाद रिकोर्डिंग कर के यूट्यूब पर अपलोड करके लोगों तक पहुंचाया करता हूं।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
उत्तर – मैं ज्यादातर श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी,स्व.श्री कन्हैया लाल डंडरियाल जी श्री पयाश पोखड़ा जी बस कुछ ही लोगों की रचनाएं पढ़ता और पसंद करता हूं।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर – अपनी पहाड़ी भाषा को जीवित रखना और आज की नई पीढ़ी को अपनी भाषा के प्रति जागरूक करना।
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
उत्तर – जी बिल्कुल
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
उत्तर – जी हां भौत बार आपको क्षेत्रीय शब्दों की वजह से ये होता है कि इस शब्द को इतनी तरह से बोलते हैं लिखूं तो क्या लिखूं क्या सही रहेगा।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
उत्तर – ज्यादातर मैं सोशल मीडिया यूट्यूब के द्वारा ही अपनी रचनाओं को लोगों तक पहुंचाया करता हूं।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
उत्तर – नहीं
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
उत्तर – कभी नहीं अगर हमारी कविता में सच्चाई है और लोगों को अच्छी लगती है तो उस से बड़ा पुरुस्कार मेरे लिए कुछ भी नहीं है।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर – सोशल मीडिया
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
उत्तर – ज्यादातर सोशल मीडिया का ही प्रयोग।
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
उत्तर – जी हां
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
उत्तर – जी हां
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
उत्तर – जी हां ओमकार ओम सिरीज़ (omkar Om Series) मेरे चैनल का नाम है। और अब यूट्यूब पर मेरे गीत और कविताएं काफी मात्रा में हैं तो अगर कोई मेरे नाम से भी सर्च करता है तो मेरी रचनाएं यूट्यूब पर आ जाती है।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
उत्तर – जी हां मैं दो फिल्मों में अपनी रचनाओं को दे चुका हूं जिनका गायन श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी, श्री जनार्दन नौटियाल जी, श्रीमती अनुराधा निराला जी, और श्रीमती मीना राणा जी ने किया है वो फ़िल्में हैं दुख का कांडा सुख का फूल और बौल्या भैजी।
बाकी लगभग डेढ़ सौ के करीब गढ़वाली लोकगीतों की रचना कर चुका हूं जिसमें से कुछ अन्य गायकौं ने गाये है और बाकी मेंने खुद ही गाये है।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
उत्तर – जनजागृति, पहाड़ की पीड़ा, पलायन, पहाड़ी भाषा संरक्षण, आदि।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
उत्तर – जिसमें सभी विषयों पर प्रकाश डाला गया हो जैसे बोली भाषा रीति रिवाज बार त्योहार किसी पर पर्सनल व्यंग ना हो समाज को जागरूक करना आदि बहुत सारे विषय हैं।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
उत्तर – जी हां
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
उत्तर – उच्च स्तरीय लेखन और कम जागरूकता
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
उत्तर – मैं अपना सत प्रतिशत देने की कोशिश करता हूं रचना अच्छी होती है तो हर वर्ग के श्रोता पसंद करता है।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
उत्तर – ये तो समय के हिसाब से ही निर्णय होता है।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
उत्तर – सबसे पहली समस्या सरकार की तरफ से कोई सहयोग न मिलना। दूसरा एकजुटता की कमी । आर्थिक स्थिति,।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
उत्तर – सबसे पहले तो समाज को भाषा के प्रति जागरूक करना।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर – युवा कवयित्री एवं कवियों को यही कहना चाहूंगा जो विषय आपको पसंद है उसपर कुछ न कुछ नया लिखने का प्रयास करें । और बार बार प्रयास करें एक दिन आपको मंजिल जरूर मिलेगी।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
उत्तर – नहीं
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
उत्तर – मेरी युवाओं को यही राय है कि मां के पेट से कोई भी सीख के नहीं आता कुछ भी बिना कर्म के प्राप्त नहीं होता इसलिए जैसे भी हो आप शुरुवात तो कीजिये
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
उत्तर – प्रथम ही स्थान पर पाता हूं और प्रथम स्थान की ही कल्पना करता हूं। क्योंकि मैं दूसरौं की दृष्टि में क्या हूं ये महत्वपूर्ण नहीं महत्वपूर्ण ये है मैं स्वयं की दृष्टि में क्या हूं।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
लोक कवि के रूप मे।