जानिये गढ़वाली कवियत्री निर्मला नेगी से उनके कवित्व पर को उनकी जुवानी
(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लिखाभेंट )
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भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि -12 जुलाई 1972
माता पिता नाम – स्व श्रीमती कमला देवी एवं स्व श्री अवतार सिंह नेगी
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है –
ग्राम फेतकंडा (मल्ली रिगोली), पट्टी लोस्तू, ब्लॉक कीर्ति नगर, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड
शिक्षा –
आधारिक – घर से एवं अपने गांव
मिडल /हाई स्कूल हाई स्कूल एवं इंटर: राजकीय इंटर कॉलेज आछरीखुंट, लोस्तू
उच्च शिक्षा – हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान एवं हिंदी में परास्नातक, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.एड
आजीविका – ढाई वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय में कृषि मंत्रालय एवं शास्त्री इंडो कैनेडियन इंस्टीट्यूट (CIDA–SICI) दो रिसर्च प्रोजेक्ट में कार्य किया, 1 वर्ष नेशनल प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (NPIU), भारत सरकार उद्यम (Govt. of India undertaking) कार्य किया, तत्पश्चात यूरोपियन यूनियन से सहायता प्राप्त प्रोजेक्ट में पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स और इंडस्ट्री में प्रशिक्षण अधिकारी (Training Officer) रही।
20 वर्षों तक अध्यापन व्यवसाय, वर्तमान में लेखन
सम्प्रति –
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
निर्मला नेगी – विद्यालयी जीवन से ही मुझे लिखने का शौक था। निबंध लेखन, कविता वाचन, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिता में हिस्सा लेती थी जो कि मेरे गुरुजनों की प्रेरणा होती थी। कोरोना लॉकडाउन के समय उस वक्त के मसूरी प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं गढ़वाली फिल्म निर्माता निर्देशक श्री प्रदीप भंडारी जी ने लिखने के लिए प्रेरित किया और स्मारिका में मेरा “कोरोना लॉकडाउन का पर्यावरण पर प्रभाव” लेख छपा। तत्पश्चात महिला दिवस के उपलक्ष में स्वदेशी जागरण मंच की पत्रिका में “पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका” सपना के बाद प्रकाशित होने के बाद समाचार पत्रों जिसमें नवभारत टाइम्स दिल्ली रिधि दर्पण रंतरैबार (देहरादून), कई हिंदी पत्रिकाओं में जिन में आदिज्ञान मुंबई, आध्यांतरा बेंगलुरु, दुदबोली, आदलि कुशली, हिमालय विरासत आदि अनेक में हिंदी एवं गढ़वाली में रचनाओं/ कविताओं का प्रकाशन व आकाशवाणी देहरादून से वार्ताओं का प्रसारण होता है।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
निर्मला नेगी – बचपन में सूरज निकला चिड़िया बोली और उठो लाल आंखें खोलो सोहनलाल द्विवेदी जी की कविताएं पढ़तेथे।
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
निर्मला नेगी – 2 मई 2023 को राठमहोत्सव गंवाणी, पौड़ी गढ़वाल में मेरु रैबार पहली कविता रचना एवं वाचन
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
निर्मला नेगी – 25-26 हिंदी और कुछ ज्यादा गढ़वाली में
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
निर्मला नेगी – अभी तक प्रकाशित नहीं हुई। प्रकाशनाधीन हैं।
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
निर्मला नेगी- मैंने गढ़वाली कविता लिखना मई 2023 के बाद किया और इसमें मुझे कई वरिष्ठ साहित्यकारों ने गढ़वाली में लिखने के लिए प्रेरित किया जिनमें कई वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय रमेशचंद्र घिल्डियाल जी, जयपाल सिंह रावत जी, जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ जी, दिनेश ध्यानी जी, सुशील बुडाकोटी जी, जबर सिंह कैंतूरा जी, दीनदयाल बंदूनी जी, भगवती जुयाल गढदेसी जी आदि कई साहित्यकार लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। –
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
निर्मला नेगी – महादेवी वर्मा जी की “मैं नीर भरी दुख की बदली” और मैथिलीशरण गुप्त जी की “नर हो न निराश करो मन को”। इन दोनों कविताओं में जीवन की कुछ सीख दिखती है।
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
निर्मला नेगी – बहुत सी कविताएं हैं जो दिल को छू लेती हैं।
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है ?
निर्मला नेगी – अपनी बोली भाषा व संस्कृति का संवर्धन- संरक्षण, प्रकृति पर्यावरण, आधुनिक परिवेश की झलक एवं अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
निर्मला नेगी – मेरी कविता मेरे मन के उद्गार होते हैं कह नहीं सकती। –
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
निर्मला नेगी – अभी तक नहीं
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
निर्मला नेगी – साहित्य देश काल, वातावरण के हिसाब से बदलता है। नई कविता नवाचार में रचनाएं होनी चाहिए। समय एवं पारिस्थिति के अनुसार परिवर्तन जरूरी है।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
निर्मला नेगी – यदा कदा
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
निर्मला नेगी – प्रकृति पर्यावरण, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समसामयिक विषयों पर आधारित
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कवियों , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
निर्मला नेगी- भक्ति काल से लेकर आधुनिक काल तक के कई कवियों से प्रभावित, प्राचीन धार्मिक ग्रंथो से लेकर आध्यात्मिक व आज के युग में मर्यादित भाषा पर आधारित लेखों से बहुत प्रभावित होती हूं।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
निर्मला नेगी – अपनी संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
निर्मला नेगी – मेरा मानना है कि जी हां हुई है।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
निर्मला नेगी – जी नहीं, क्योंकि मेरी कविताओं के शब्द मेरे मन के भाव होते हैं।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
निर्मला नेगी – पत्र पत्रिकाओं में भेज देती हूं।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
निर्मला नेगी – अभी तक नहीं
भी . कु. – क्या किसी पुरस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
निर्मला नेगी – जी नहीं
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
निर्मला नेगी – सोशल मीडिया का सहारा लेती हूं।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु
सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
निर्मला नेगी- सामान्य –
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
निर्मला नेगी – जी नहीं
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
निर्मला नेगी – नहीं
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
निर्मला नेगी – जी नहीं
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
निर्मला नेगी – अभी तक नहीं
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं?
निर्मला नेगी – प्रकृति पर्यावरण और संस्कृति को बचाने का भाव
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
निर्मला नेगी- रोचक विषय जो पाठकों का मन मोह ले और रुचिकर लगे।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
निर्मला नेगी जी हां –
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पाता ?
निर्मला नेगी- कविता पाठन तो होता है लेकिन नाटक मंचन मैं समय और परिश्रम की अधिकता होती है और पाठ्यक्रम पूरा करने की प्राथमिकता रहती है।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युवाओं तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
निर्मला नेगी – सोशल मीडिया नेटवर्क
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
निर्मला नेगी – प्रेरणाप्रद संदेश देने वाली
भी . कु. – प्रकाशन की क्या-क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
निर्मला नेगी – कई अच्छे रचनाकार अपनी पुस्तक प्रकाशित नहीं कर पाते हैं सरकार को चाहिए कि उनका आर्थिक सहयोग दिया जाए।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए?
निर्मला नेगी – पुस्तकालय में पुस्तकें रखवाकर ताकि विद्यार्थि उसको पढ़ सकें। –
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
निर्मला नेगी – –
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
निर्मला नेगी – सिर्फ गद्य और पद्य –
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
निर्मला नेगी – युवा देश के कर्णाधार होते हैं, उन्हें जरूर आगे आना चाहिए।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है ?
निर्मला नेगी – अभी तो प्रारंभ है, आगे वक्त ही बताएगा।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?