जानिये गढ़वाली कवि नरेश चन्द्र उनियाल जी के बारे में उनकी जुबानी
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(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता /-लिखाभेंट )
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भीष्म कुकरेती – कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि – 06 दिसम्बर 1968
माता पिता नाम – स्व. कमलेश्वरी देवी, स्व. आदित्यराम
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – ग्राम जल्ठा (डबरालस्यूँ ), पौड़ी गढ़वाल, द्वारीखाल ब्लॉक, उत्तराखण्ड।
शिक्षा –
आधारिक – प्राथमिक पाठशाला कठूड़ (डबरालस्यूँ )
मिडल /हाई स्कूल – रा.उ.मा.वि. देवीखेत (डबरालस्यूँ )
उच्च शिक्षा – साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद
आजीविका – अध्यापन कार्य
सम्प्रति – उत्तराखण्ड सरकार के अधीन, जूनियर हाई स्कूल में अध्यापक।
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
उत्तर – बचपन में बहुत ताल लय के साथ स्कूल में कवियायें पढ़ते थे, कहीं मन में इच्छा होती थी कि काश हम भी कविता लिख पाते। फिर जब इंटर में पढ़ रहा था तो अंग्रेजी में बहुत दिक्कत होती थी.. तब पहली बार कलम से निकला कि –
“हे विश्वपूज्य इंग्लिश दीदी, तू होती क्यों याद नहीं,
करता हूँ प्रार्थना बार-बार,तू सुनती क्यों फरियाद नहीं।”
इस तरह कवितायेँ लिखना शुरू हुआ।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
उत्तर -कक्षा 2 में..
जिसने सूरज चाँद बनाया, ( द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी)
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
उत्तर – सर्वप्रथम स्व. जीत सिंह नेगी जी एवं शिव प्रसाद पोखरियाल जी के गीत सुने, फिर गोपाल बाबू गोस्वामी और नरेंद्र सिंह नेगी जी को सुना। कन्हैयालाल डंडरियाल जी की रचनाओं को पढ़ा।
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
उत्तर – लगभग 45-50 क्योंकि हिन्दी में अधिक लिखता हूँ।)
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
उत्तर – दो गढ़वाली साझा संग्रह – बिनसरि और छपछपी, मन के गीत हिन्दी काव्य एकल संग्रह, इसके अलावा लगभग 12 हिन्दी साझा काव्य संग्रह।
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
उत्तर – गढ़वाली कविता लगभग 2018 से लिखना शुरू किया। यूँ ही लगा कि जो हमारी गढ़ बोली है दूधबोली है उस बोली में भी कुछ रचना चाहिए।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
उत्तर – अयोध्या सिंह उपाध्याय जी की रचना…. पवनदूतिका बहुत पसन्द है।
” प्रिया पति वह मेरा प्राण प्यारा कहां है,
मुझ जलनिधि डूबी का सहारा कहाँ है।”
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
उत्तर – कन्हैयालाल डंडरियाल जी की हास्य रचना “सरसु संहार”
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
उत्तर – पलायन, प्रकृति और सामयिक घटनायें
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
उत्तर – मैं मुख्यत: श्रृंगारिक रचना करता हूँ। बाल साहित्य भी लिखा है, जो भारत की श्रेष्ठ बाल साहित्य पत्रिका में छपते हैं। लेखन शैली मुख्यतः गेय रचनाएँ लिखता हूँ।
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
उत्तर – जी बहुत सी गजलें लिखी हैं। नवगीत भी काफ़ी लिखें हैं।
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
उत्तर – नई कविता की एक खूबी है कि छन्द और मात्राभार के बन्धन में न बंधते हुए भी कवि अपनी भावनाओं को समाज के सम्मुख रख रहे हैं।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
उत्तर – जी कोशिश करता हूँ विविध नवीन विधाओं में लिखने की। कुछ नये तरीके से लिखने की..
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
उत्तर – जब जब समय मिलता है या कहूँ कि जब-जब कोई भाव या विचार मन में आता है, उसी समय उसे मोबाइल के ही नोटपैड में लिख डालता हूँ, बाद में ईमेल में सुरक्षित कर लेता हूँ।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
उत्तर – जी… गढ़ गौरव नेगी दा, गोपाल बाबू गोस्वामी, कन्हैयालाल डंडरियाल जी, मदन डुकलान जी, शिव प्रसाद पोखरियाल जी से बहुत प्रभावित हूँ। आजकल पयाश पोखड़ा जी भी बेहतरीन गजलें लिख रहे हैं।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर – सच कहूँ तो मेरी कवितायेँ स्वान्त: सुखाय हैं। फिर भी अधिकांश रचनाओं में कुछ न कुछ सामाजिक सन्देश अवश्य रहता है। जिससे समाज कुछ सीख सके।
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
उत्तर – जी… सच कहूँ तो समाज को गीतों ने ज्यादा प्रभावित किया है क्योंकि गीत लगभग सब सुन लेते हैं… कविताओं को पढ़ने वाले बहुत कम लोग हैं।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
उत्तर – जी.. कभी-कभी आपका मन कहता है कि इस भाव, विचार या विषय पर लिखना है, किन्तु शब्द नहीं मिल पाते…मैंने महसूस किया है कि कभी तो कोई रचना मिनटों में बना जाती है… और कभी कभी कई कई दिन में पूरी नहीं हो पाती… कई गीतों का मुखड़ा मैंने लिखा हुआ है, पर गीत पूर्णता को प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
उत्तर – आपका आशीर्वाद है आदरणीय जी कि देश ले कई श्रेष्ठ पत्र- पत्रिकाओं में मेरी रचनाएँ छपी हैं।
इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी लोगों का भरपूर प्यार मिलता है।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
उत्तर – शासन की प्रेरणा से कभी नहीं लिखा… हाँ बच्चों के लिए उत्कृष्ट साहित्य लिखा है, पाठ्यक्रम में अपनी रचनाओं को शामिल करने के लिए भी हाथ पैर मारे हैं… पर शासन प्रशासन ने कोई मदद नहीं की, सब कहने की जुमलेबाजी होती हैं… स्थानीय लेखकों को स्थान नहीं दिया जा रहा है।
स्वयं मैंने कई बेसिक विद्यालयों को अपनी बाल कविता फ्लेक्स बोर्ड पर छपवाकर दी हैं। ताकि बच्चे पढ़ सकें।
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
उत्तर – नहीं sir.. पुरुस्कार के लिए कवितायेँ कभी लिखी नहीं… पर लिखी हुई रचनाओं पर कई-कई श्रेष्ठ पुरुस्कार प्राप्त हुए हैं आपके आशीर्वाद से।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर – इसका उत्तर ऊपर दे चुका हूँ आदरणीय जी।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
उत्तर – काफ़ी हद तक सोशल प्लेटफार्म का उपयोग करता हूँ। यहीं से लोगों ने जाना, पहचाना।
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
उत्तर -जी नहीं sir
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
उत्तर – जी…यू ट्यूब पर प्रकाशित करता हूँ।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
उत्तर – जी… है आदरणीय।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
उत्तर – जी.. अभी तक नहीं लिखी हैं इस तरह से।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
उत्तर – श्रृंगार, वियोग, प्रकृति चित्रण।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
उत्तर – एक अच्छी कविता सदैव बहुत सहजता से पाठकों के लिए सुगमता से ग्राहय होने वाली होती है। हम अपनी विद्वता दिखाने के लिए कई क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग कर देते हैं तो उस कविता को कोई नहीं पढता।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
उत्तर – जी.. दिल्ली, लखनऊ, हरिद्वार में कविता पाठ कर चुका हूँ।
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पाता ?
उत्तर – हम लोग अंग्रेज बना रहे हैं.. बच्चों को जबरदस्ती अंग्रेजी बुलवा रहे हैं, उन्हें अंग्रेजी स्कूलों में प्रवेश दिला रहे हैं। वे हिन्दी ही नहीं बोलना सीख रहे हैं तो गढ़वाली में क्या करेंगे… बेहद दुःखद है।
आपको बताते हुए गर्व महसूस कर रहा हूँ कि हमारी सरकारी प्राइमरी, मिडिल स्कूलों में आज भी गढ़वाली गीतों पर छात्र /छात्राएँ नृत्य करते हैं। नाटक का मंचन करते हैं।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
उत्तर – मैंने जैसा कि बताया कि बाल साहित्य को अपने निजी प्रयासों से बेसिक विद्यालयों तक पहुंचाता हूँ। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफार्म का उपयोग भी करता हूँ। और प्रत्यक्ष कवि सम्मलनों में प्रतिभाग करता हूँ। रेडिओ पर भी कुछ प्रसारण हुआ है।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
उत्तर – सरल, सहज पाठकों तक सहजता से ग्राहय लेकिन संदेशप्रद कवितायेँ लिखना चाहूंगा।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
उत्तर – बाल साहित्य को प्रकाशित कराना बेहद मंहगा पड़ता है, क्योंकि वह रंगीन चित्रों से युक्त होती है। इसके लिए प्रकाशकों को चाहिए कि कुछ रियायत प्रदान करें। प्रकाशक झूठे वादे करके आपकी रॉयल्टी का दुरूपयोग करते हैं।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
उत्तर – ग्राम सभाओं तक अच्छा साहित्य पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए ग्राम प्रधान जी को नामित किया जा सकता है कि आप इन पुस्तकों को गाँव के पुस्तकालय तक पहुंचाएँ।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर – यही कहूंगा कि अच्छा रचें, वजनदार लिखें। लेखन में भोंडापन न हो।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
उत्तर – जी… साहित्य की विविध विधाओं में रचता हूँ। नई विधाओं को सीखने के लिए सदैव लालायित रहता हूँ।
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
उत्तर – युवाओं को इस क्षेत्र में आना चाहिए। यहाँ पहचान है, नाम है और सम्मान भी है…. हाँ जीविका के लिए साहित्य नहीं है।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है।
उत्तर -जी… मैं गढ़वाली साहित्य में खद्योत सम हूँ। चाहता हूँ कि लोग जाने कि कोई नरेश चन्द्र उनियाल है, जो अच्छा लिखता है। बस यही कामना है। नंबर पर विश्वास नहीं करता।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
उत्तर – एक मृदुभाषी, विनम्र और सरल शब्दों में लिखने वाला कवि जो सीधा सरल और ईमानदार है।