अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ से उनके कवित्व पर को उनकी जुवानी
-(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लिखाभेंट )
भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’
जन्म तिथि -20.06.1986
माता-सुलोचना देवी पिता नाम -लाखी
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है -भिलंगना, टिहरी गढ़वाल
शिक्षा – एम. एस. सी. (जन्तु विज्ञान) एम. ए. (हिन्दी साहित्य), बी.एड.
आधारिक –
मिडल /हाई स्कूल रा. इ. का. अखोड़ी
उच्च शिक्षा -राम चंद्र उनियाल राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्याल उत्तरकाशी
आजीविका -शिक्षण
सम्प्रति -स. अ. एल. टी. (विज्ञान ) रा. उ. मा. वि. घोल्डाणी प्रतापनगर, टिहरी गढ़वाल
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ -पत्रकार मंगल सिंह पंवार उत्तरकाशी
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’- मैथलीशरण गुप्त की कविता- नर हो न निरास करो मन को जग में रहकर कुछ काम करो.
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’-भुम्याळ (औळ सर्ग) अबोध बंधु
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ -52
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ -एक, ‘प्रकृति अर मनखि’ (गढ़वाली कविता संग्रह 2017 विंसर पब्लिशिंग कंपनी देहरादून)
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’ – 2009 से प्रकृति ने और आकाशवाणी केंद्र नाजीबाबाद से प्रसारित गढ़वाली कविता पाठ, छणिका (छिटगा के लिए शांति प्रकाश ‘जिज्ञासु ‘ जी के छिटगों ने प्रेरित किया.
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी’- दूब कविता दबी-कुचली दूब फिर उग आयेगी हम लेते रहेंगे यूँ उबासियां क्योंकि, इसमें जीवन को आगे बढ़ाने की प्रेरणा है.
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – देबकी महरा की कुमाऊँ नी कविता डंगरिया क्योंकि यह कविता अंधविश्वास पर कुठराघात करती है.
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – प्रकृति से प्रेरणा जो सफल मानव जीवन के लिए हो.
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- मुक्त छंद और गीतात्मक शैली और गद्य कविता.
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी -गीत लिखे.
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- बिल्कुल सही है मैं इसका ही पक्षधर हूँ. इसमें ही जीवन का यथार्थ छुपा है.
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ? अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी-हाँ
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – स्वतः स्फूर्ति और तार्किक.
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ? अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- भुम्याळ (औळ सर्ग) अबोध बंधु, जीवनन्द श्रीयाल डाली-माटी, देबकी महरा कुमाऊँ कवयित्री.
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – सामाजिक न्याय अंधविश्वास रूड़ीवाड़ी परम्पराओं का वैज्ञानिक खंडन समाज सुधार हेतु. प्रकृति द्वारा मानव जीवन का सुधार.
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – नहीं.
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- नहीं
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – स्वयं.
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- नहीं
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी-नहीं
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – पत्र-पत्रिकाओं पुस्तक प्रकाशन का सहारा, फेसबुक पेज.
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी-कम
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी -नहीं
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- हाँ
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – हाँ सौं-करार
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- नहीं
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – अर्थ की व्यापकता और तार्किकता
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- जिसमें मानव जीवन का यथार्थ हो और जो मानव को मानव बनाए.
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – हाँ
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- आम जनमानस का अभी अपनी भाषा के प्रति उतना स्नेह नहीं जागा, सरकार इस पर गंभीर नहीं.
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – पुस्तक और सोशल मीडिया का प्रयोग.
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- जो सामाजिक परिवर्तन करें और मानव जीवन को बेहतर बनाए.
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – पाठकों की न्यूनता गंभीर पाठकों की कमी और सप्रेम भेंट देने की मजबूरी वाली परम्परा. कवियों की पुस्तक क्रय ना करने की उदासीनता.
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- अपनी भाषा के प्रति लोगों के भीतर स्नेह पैदा करके.
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी – विशुद्ध साहित्य और अन्य भाषाओं के साहित्य का गहन अध्ययन, समाज के प्रति अलग और प्रगतिशील विचार परम्परा के साहित्यकारों के साहित्य का अध्ययन.
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- नहीं
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी- उन्हें कविताओं की पहुंच और ताकत बताकर.
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
अरविन्द ‘प्रकृति प्रेमी-एक विद्यार्थी के रूप में, अच्छे अध्येता की का विचार.
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
क्रन्तिकारी, आधुनिक, प्रगतिशील और तार्किक कवि के रूप में