जानिये गढ़वाली कवियत्री श्रीमती अंजना कण्डवाल जी से उनके कवित्व पर को उनकी जुवानी
(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लिखाभेंट )
भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि – 23/09/1974
माता:-श्रीमती गोदावरी देवी
पिता नाम – श्री ललित मोहन कण्डवाल
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है –
ग्राम:- कुलेथ, पट्टी वल्ला उदयपुर वि0 क्षे0 -यमकेश्वर पौड़ी गढ़वाल
शिक्षा –
आधारिक – आधारिक विद्यालय जामल
मिडल :- जनता इण्टर कॉलेज यमकेश्वर
हाई स्कूल/इण्टर :- GGIC कोटद्वार
उच्च शिक्षा – P.G. कॉलेज कोटद्वार
आजीविका – शिक्षण कार्य
सम्प्रति – शिक्षिका
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
अंजना कण्डवाल – – वैसे तो कविता से मैं स्वाभाविक रूप से प्रेरित हूं। मुझे बचपन से ही कविताओं का कहानियाँ पढ़ने का शौक रहा है युवा अवस्था में गजलों और रुबाइयाँ पढ़ने लगी।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
उत्तर:- पहली कविता तो कक्षा 2 की ‘सूरज निकला चिड़ियाँ बोली’ पढ़ी।
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
अंजना कण्डवाल – – गढ़वळि कविता से साक्षात्कार वैसे तो याद नहीं है। लेकिन बचपन में घुघोति बसोती क्या खांदी दूधु भाती बोलते थे। बाद में पता चला कि यह एक कविता है। बाकी 2016 में लोकभाषा एकांश और रन्त रैबार व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ी तब जा कर गढ़वाली कविताओं से साक्षात्कार हुआ।
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
उत्तर:- सभी मिलाकर गढ़वाली कविताएं लगभग 40-50 प्रकाशित हो गई हैं की जो की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं तथा फेसबुक के माध्यम से प्रकाशित हुई है
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
अंजना कण्डवाल – – अभी सिर्फ सझा संग्रह मेरे प्रकाशित हुए हैं। जिसमें घरवाली में ‘धाद कवितांक’, ‘आख़र’, बुरांश, बिन्सरी। एक मौलिक संग्रह प्रकाशन के लिए लगभग तैयार है।
हिन्दी में :- वर्तिका’, ये देश है वीर किसानों का’ अनुगूँज साहित्यिक स्मारिका, भाग 2 , भाग 3, कविता अविराम, होंसलों के हमसफ़र। हिन्दी मे भी एक ग़ज़ल संग्रह तैयार है बस प्रकाशन की तैयारी है।
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
अंजना कण्डवाल – – गढ़वाली कविता में 2018 से लिख रही हूं जब मैं धाद मातृभाषा एकांश से जुड़ी।
लेकिन सबसे ज्यादा प्रेरित किया मुझे रन्त रैबार ग्रुप में जिसमें 2016 में जुड़ी थी इस ग्रुप में गढ़वाली साहित्य पर अक्सर चर्चाएं होती थी मेरे गढ़वाली लिखने पर अक्सर टिप्पणियां भी करते थे कि मैं गढ़वाली नहीं बल्कि हिंदी ही लिखती हूं उस ग्रुप से मैंने जाना की गढ़वाली कैसे लिखते हैं क्योंकि गढ़वाली बोलना अलग बात है और गढ़वाली लिखना अलग बात है।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों।
अंजना कण्डवाल – – मेरी अपनी गैर गढ़वाली कविता ‘उठा कलम’ शीर्षक से ‘उठा कलम आज फिर सवाल लिख जारा’ यह कविता मुझे सबसे ज्यादा पसंद है
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
अंजना कण्डवाल – – अपनी लिखी गढ़वाली कविता ‘ नै छ्वळी की नारी’ इस कविता में आधुनिक नारी के बारे में बात करती हूं। और एक कविता ‘डाली की खैरी’ शीर्षक से लिखी है। मुझे यह कविता भ्य बहुत पसंद आती है। मैं इस कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग बहुत अच्छे से कर पाई हूँ।
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
अंजना कण्डवाल – – मेरी गढ़वाली कविताएँ प्रकृति और स्त्री चेतना पर आधारित होती हैं। साथ ही समसामयिक विषय पर अधिक लिखती हूँ।
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
अंजना कण्डवाल – – कविता मुक्त काव्य, गेय छन्द में रोष/ओज शैली अधिक है।
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
अंजना कण्डवाल – – जी बिल्कुल मुझे लगता है कि मैं ग़ज़ल और नवगीत बहुत अच्छा लगती हूं।
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
अंजना कण्डवाल – – आजकल की जो नई कविताएं हैं उनमें एक विचार है एक सोच है जो समाज को एक नई दिशा में ले जाने का कार्य करते हैं
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
अंजना कण्डवाल – – बिल्कुल मैं कविता की जितनी भी शैलियां होती है सभी में लिखने का प्रयास करती हूँ। छन्द, गजल, नवगीत, सवैया यहां तक की बहुत सारे हाईकु भी लिखे हैं और गढ़वाली में भी हाईकु लिखे हैं।
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
अंजना कण्डवाल – – रचनात्मक प्रक्रिया के लिए क्या कहूं- मुझे चलते-चलते भी कुछ चीज दिख जाए या मेरे मन मे कुछ विचार आ जाय उसी वक्त उसे लिख देती हूँ।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
अंजना कण्डवाल – – कविताएं मुझे बचपन से ही बहुत पसंद है और द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी, मैथिलीशरण गुप्त, हरिऔध की कविताएं पसन्द हैं परन्तु श्यामनारायण पाण्डे की मेवाड़ विजय और सुभद्रा कुमारी चौहान की झाँसी की रानी सबसे अधिक पसन्द हैं। पुराने जो लेखकों में शरत चन्द्र मुझे बहुत पसन्द हैं।
गढ़वाली लेखकों में लोकेश नवानी, पायश पोखड़ा, मृणाल पंत, बिना बैंजवाल, मदन डुकलाण, वीरेन्द्र पंवार, जगदम्बा चमोला।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
अंजना कण्डवाल – – मेरी कविताओं का मुख्य उद्देश्य है कि समाज में जो कुछ भी घटित हो रहा है उसके पीछे के कारणों को जानना और उसको दूर करने की दिशा में सोचने के लिए समाज को प्रेरित करना।
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
अंजना कण्डवाल – – मुझे पता है कि विचार की कविताओं को पढ़ने की ज्यादा जरूरत है और आधुनिक समय में देखा जाए तो लोग किताबें कम पढ़ रहे हैं। फिर भी आज के समय में सोशल मीडिया के प्रयोग से हम कविताओं को समाज तक पहुँचा सकते हैं आज की कविताएं काफी प्रभावशाली, पहले से अधिक संवर्धित और अच्छी हैं।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
अंजना कण्डवाल – – बिल्कुल आती है कई बार छन्द में बैठाने के लिए सटीक शब्द नहीं मिलते हैं। यमकेश्वर ब्लॉक की गढ़वाली सपाट है हिन्दी जैसी तो मेरे पास गढ़वाली शब्दावली कम है।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
अंजना कण्डवाल – – मैं स्वभाव से बहुत संकोची हूं और किसी को भी अपनी कविताओं को छापने के लिए अनुरोध नहीं करती। ना किसी को किसी मंच पर आमंत्रित करने के लिए कहती हूँ। लेकिन जब भी कहीं पर अवसर मिलता है तो बेझिझक अपनी कविता कहती हूँ।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
अंजना कण्डवाल – – नहीं चुनाव के लिए तो मैंने कोई कविता नहीं लिखी लेकिन सर्व शिक्षा के लिए जरूर डाइट से छपने वाली पत्रिका के लिए लिखी थी।
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
अंजना कण्डवाल – – अभी तक किसी वित्तीय पुरस्कार के लिए मैंने कोई कविता नहीं रची है हां अनुगूँज साहित्य पीठ ने गत वर्ष इस वर्ष एक योगिता का आयोजन किया था जिसमें गतवर्ष मुझे मुक्त काव्य के लिए प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ और इस वर्ष मुझे एकांकी लेखन के लिए प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
अंजना कण्डवाल – – सच कहूं तो अभी मैंने इसके लिए कुछ खास प्रयास नहीं किया हां फेसबुक के माध्यम से पहले मैं अपनी रचनाएं लोगों तक पहुंचती हूँ। लेकिन अब कम पोस्ट करती हूँ।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
अंजना कण्डवाल – – व्हाट्सएप और फेसबुक पर तक ही सीमित हूं।
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
अंजना कण्डवाल – – नहीं
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
अंजना कण्डवाल – – अपने किसी भी चैनल में मैंने गढ़वाली कविता नहीं डाली है। हां एक लड़की है चमोली से उर्मिला बिष्ट आप मेरी उसे बेटी कह सकती हैं वह कभी-कभी अपने इंस्टाग्राम पर मेरे साथ बैठकर लाइव मेरी कविताओं का वचन करवा देती है या मेरे लिखे हुए छोटे-छोटे कोड को अपने इंस्टाग्राम के माध्यम से पोस्ट कर देती है।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
अंजना कण्डवाल – – यूट्यूब चैनल तो है लेकिन उसमें साहित्यिक कुछ भी नहीं है वह मैंने अपने विद्यालय के कार्यक्रम के लिए बनाया था लेकिन जब तक मैंने बनाया तब तक मेरा स्थानांतरण हो गया मैं दूसरी जगह आ गई और यहां पर मुझे वह माहौल नहीं मिल पा रहा है कि मैं यहां पर कुछ कर सकूं।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
अंजना कण्डवाल – – मेरे लिखे दो गीत यूट्यूब पर हैं एक सीमा मेंदोला जी ने गया है और एक विमला भण्डरी जी ने। फिल्मों के लिए तो अभी तक तो नहीं लिखा परन्तु अवसर मिलेगा बिल्कुल लिख सकती हूं।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
अंजना कण्डवाल – – सभी तत्व मिश्रित है मिश्रित भाव से कविताएं लिखती हूं लेकिन अगर गजलों को देखा जाय तो सारे की सारी वियोग श्रृंगार पर आधारित है।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
अंजना कण्डवाल – – एक अच्छी कविता वही होती है जिसे पढ़कर पाठक को समानुभूत हो जब वह पढ़े तो उसको लगे कि ये तो उसकी बात है।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
अंजना कण्डवाल – – जी वैसे तो शिक्षक होने के कारण मुझे समय बहुत कम मिल पाता है अधिकांश समय में मुझे ना बोलना पड़ता है लेकिन जब भी समय मिलता है और आमंत्रण मिलता है तो पूरी कोशिश होती कि मैं कवि सम्मेलन में जाऊं।
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
अंजना कण्डवाल – – विद्यालयों में अवसर कम होते हैं बहुत से शिक्षकों में रुचि नहीं होती तो वे भी प्रयास नहीं करते। कुछ अपने विद्यालयों में अंग्रेजी ड्रामा करवाते हैं जिससे उनकी ख्याति बढ़े क्योंकि आज भी समाज के अधिकांश लोग अंग्रेजी भाषा को श्रेष्ठ समझते। लेकिन मैंने देखा है कि स्कूल के बच्चे अपने नाटक जब अपनी मातृभाषा करते हैं तो बहुत प्रभावशाली ढंग से संवाद कहते हैं। ज्यादा सहज महसूस करते हैं फिर भी अब सरकार भी प्रयास कर रही है कि प्रारंभिक कक्षाओं में लोकभाषा में भी पढ़ाया जाय।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
अंजना कण्डवाल – – मैंने बहुत सारे गीत लिखे थे तो उनका गायन मेंने अपने विद्यालय में करवाया है सपनों की उड़ान कार्यक्रम में अपने लिखे गीत का मंचन करवाया और उसमें हमारे विद्यालय ने ब्लॉक स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
अंजना कण्डवाल – – मैं समाज के भीतर गहरी बैठी कुंठाओं को दूर करने के लिए कविताएं लिखना चाहती हूं।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
अंजना कण्डवाल – – प्रशासन के लिए सबसे बड़ी समस्या धन की व्यवस्था नहीं हो पाती है इसमें सरकार की तरफ से कुछ पहल होनी चाहिए।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
अंजना कण्डवाल – – जितने भी लेखक हैं वे एक दूसरे की किताबों को अपने साथ ले जाकर अपने-अपने क्षेत्र में बांट सकते हैं ग्राम प्रधान की सहायता से ग्राम स्तर पर भी एक लाइब्रेरी खोली जा सकती है या गांव में जो पंचायत भवन बने हैं उसमें ही एक कमरा पुस्तकों के लिए होना चाहिए जहां पर गांव के बच्चे जाकर पढ़ाई कर सकते हैं।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
अंजना कण्डवाल – – नए युवाओं को मैं क्या संदेश दूं बस मैं यह सोचती हूं कविताओं में नए विचार हो और कविताएं सिर्फ लिखनी नहीं होती है कविताओं को जीना भी पड़ता है
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
अंजना कण्डवाल – – कविता के अतिरिक्त गीत गजल कहानी एकांकी, संस्मरण आदि।
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
अंजना कण्डवाल – – एक शिक्षक होने के नाते मैं एक अनुप्रयोग किया था अपने स्कूल में की बच्चों को एक टैगलाइन देता हूं और उसे पर कविता लिखने को कहती हूं तो कुछ बच्चों ने बहुत अच्छी कविताएं भी लिख कर दी है इस प्रकार से हम छोटे-छोटे प्रयास करके बच्चों को कविता लिखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। आज के बच्चे कल के युवा।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
अंजना कण्डवाल – – अभी तो मैं गढ़वाली कविता के शैशवावस्था में हूं और मेरी कविताएं समसामयिक अधिक होती है तो चाहती हूं कि समाज को एक नया दर्शन दे सकूँ।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
उत्तर:- हा हा हा मेरे घर वाले अक्सर मुझे विद्रोही कहते हैं वीर रस या वियोग श्रृंगार के कवि के रूप में याद किया जाएगा।