जानिये गढ़वाली बीना बेंजवाल जी के बारे में उनकी जुबानी
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(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लिखाभेंट)
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भीष्म कुकरेती – बीना जी शायद आप पहले देव्शाली नाम से कविताएँ रचतीं थीं
बीना देव्शाली बेंजवाल – जी जी
भीष्म – जी अपना परिचय विस्तार में देकर हमें अनुग्रहित कीजिएगा
कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि – 17 नवंबर, 1967
माता पिता नाम – माताजी- श्रीमती राधा देवशाली
पिताजी – श्री रेवतीनन्द देवशाली
जन्म स्थल- ग्राम – देवशाल, गुप्तकाशी
जनपद – रुद्रप्रयाग, उत्तराखण्ड
शिक्षा –
आधारिक – आधारिक विद्यालय बणसू , जाखधार
मिडिल – गुप्तकाशी/ कोटी, बिचला चाँदपुर, चमोली
हाई स्कूल/इण्टरमीडिएट – राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज गोपेश्वर, चमोली
उच्च शिक्षा – पी.जी.काॅलेज, गोपेश्वर, चमोली
आजीविका – दिसंबर 1993 से जुलाई 2018 तक केन्द्रीय विद्यालय संगठन में हिन्दी शिक्षिका के रूप में सेवाएँ दीं।
सम्प्रति – स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन।
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
उत्तर – बाल्यकाल अपने गाँव देवशाल में बीता। पिताजी का स्थानांतरण गोपेश्वर होने पर नवीं कक्षा से पढ़ाई वहीं संपन्न हुई। पुस्तकें पढ़ने का शौक बचपन से ही था। गोपेश्वर आने पर साहित्य के प्रति यह रुझान और बढ़ गया। 1986-87 से कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। एम.ए. तक आते-आते आकाशवाणी से भी कविताएँ प्रसारित होने लगीं।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी।
उत्तर – अपनी कविता ‘जिंदगी’
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
उत्तर – अबोधबंधु बहुगुणा जी की कविताएं।
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
उत्तर – 200 के लगभग।
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
उत्तर – दो कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं। मुट्ठी भर बर्फ (हिंदी कविता संग्रह)- 1995, कमेड़ा आखर (गढ़वाली कविता संग्रह )-1996, मिसेज रावत (देश-दुनिया की 54 कवयित्रियों की कविताओं का गढ़वाली भाषा में अनुवाद)-2021.
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
उत्तर – 1986-87 से हिंदी के साथ ही गढ़वाली भाषा में भी लिखना शुरू कर दिया था। गढ़वाली का साहित्य पढ़ने लगी तो बहुत प्रभावित हुई। गढ़वाली मातृभाषा तो थी ही। पहाड़ के बिसौणी के ढुंगे, उरख्याळे की बात गढ़वाली में लिखने लगी तो वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा भी प्रोत्साहन मिलने लगा।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों?
उत्तर – ‘आग’ -काफी पहले लिखी अपनी इस कविता में गाँव में पहुँची शहरी संस्कृति की ओर संकेत है।
भी . कु. – गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों?
उत्तर- पहाड़ की स्त्री पर केंद्रित’ जनानि’ और ‘बच्यूं रौण चैंद इतगा अंधेरो’- गढ़वाली की इस नई कविता में भौतिकवादी संस्कृति का छल और अपनी ज्ञान परंपरा से दूर होने की ओर संकेत है।
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
उत्तर – पहाड़ और पहाड़ की महिला का कठिन जीवन संघर्ष तथा सामाजिक विसंगतियाँ।
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
उत्तर – नई कविता।
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
उत्तर – थोड़ा-बहुत।
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
उत्तर – नई कविता पहाड़ की समस्याओं के साथ समसामयिक विषयों तथा वैश्विक विषयों पर भी लिखी जा रही है। शिल्प में भी नये प्रयोग हो रहे हैं।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
उत्तर – जी
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
उत्तर – भाव या विचार मन में आने के बाद उन पर गहन मंथन और फिर शब्दों में अभिव्यक्त करती हूँ। इसमें लंबा समय भी लग जाता है।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कवियों , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
उत्तर – गढ़वाली के पुराने-नये साहित्यकारों में अधिकांश को खूब पढ़ा और कविता के मंचों पर सुना भी है। दुर्गा प्रसाद घिल्डियाल जी, भगवती प्रसाद जोशी ‘हिमवंतवासी’ अबोधबंधु बहुगुणा, मोहनलाल नेगी, सुदामा प्रसाद प्रेमी, भजनसिंह ‘सिंह’ जी, जीवानन्द श्रीयाल जी, कन्हैयालाल डंडरियाल जी, महेश तिवाड़ी जी तथा वर्तमान में भी सृजनरत ललित केशवान जी, नेत्रसिंह असवाल जी, भीष्म कुकरेती जी, लोकेश नवानी जी तथा नई पीढ़ी के सभी कवि-लेखकों को पढ़ती हूँ। विषय वस्तु हो या भाषा व शिल्प सभी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर – पहाड़ की कठिनाइयों के चित्रण के साथ भाषा और संस्कृति का संरक्षण।
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
उत्तर – जी, पाठकीय और मंचीय दोनों तरह की कविताएँ समाज को प्रभावित करने में सफल हुई हैं। विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर केन्द्रित ये कविताएँ पढ़ी और मंचों से खूब सुनी जा रही हैं।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
उत्तर – हाँ, कुछ कविताएँ लिखने के बाद भी बेहतरीन की माँग करती हैं। मैं मंचीय कविताएँ कम लिख पाती हूँ।
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
उत्तर – पहले पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशनार्थ भेजती थी। फिर शब्दकोशों पर कार्य करते हुए कविता लेखन कम हो गया। अब गढ़वाली कविताओं का एक संग्रह तैयार कर रही हूँ।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
उत्तर – नहीं।
भी . कु. – क्या किसी पुरस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
उत्तर – नहीं।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर – पुस्तक प्रकाशन, मंचों पर कविता पाठ तथा सोशल मीडिया पर पोस्ट करना।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
उत्तर – बहुत सीमित मात्रा में।
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
उत्तर – नहीं।
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
उत्तर – नहीं।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
उत्तर – नहीं।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
उत्तर – नहीं।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
उत्तर – लोक तत्व।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
उत्तर – पाठक या श्रोता जिससे जुड़ जाए और उसे लगे कि मैं भी तो यही महसूस कर रहा था।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
उत्तर – जी।
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पाता ?
उत्तर – पाठ्यक्रम शासन तय करता है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षण की बात कही गई है। विश्वास है कि मातृभाषा भी पढ़ाई जाएगी।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
उत्तर – अलग से कोई प्रयास नहीं करती।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
उत्तर – सामाजिक मुद्दों पर।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
उत्तर – अच्छा लिखा जाएगा तो पाठक खरीदेगा भी और पढ़ेगा भी।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
उत्तर – कुछ प्रकाशक पहाड़ों में प्रदर्शनी भी लगाते हैं। वैसे आजकल ऑनलाइन का जमाना है। पढ़ने वाले मंगा लेतै हैं।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
उत्तर – पुराने और समकालीन कवियों को खूब पढ़ें। विश्व साहित्य भी पढ़ें।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
उत्तर – जी। कहानी, समीक्षा, लेख तथा फीचर लेखन।
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
उत्तर – गढ़वाली भाषा के संरक्षण हेतु युवाओं का इससे जुड़ना जरूरी है। कवि सम्मेलन, पुस्तक मेले, कार्यशाला एवं परिचर्चाओं में उन्हें शामिल कर इनके माध्यम से उनकी काव्य प्रतिभा को संवारा जा सकता है। कुछ युवा बहुत अच्छा लिख भी रहे हैं।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
उत्तर – अभी कुछ भी नहीं लिखा है। जो भी लिखूँ, स्तरीय हो, यही प्रयास रहता है।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
उत्तर – महिलाएँ जब बहुत कम लिख रही थीं, उस समय लिखना शुरू किया। जो और जितना भी लिखा, उससे अभी स्वयं संतुष्ट नहीं हूँ।