जब इख मुंबईम हम तैं गिन्नी ध्यानी मिल्दि त दीपा दीदी (गिन्नी क म़ा ) त याद आन्दि च दगड़ मा रुद्री बड़ा जी बि याद ऐ जांदन।
जु हमर उमरि होला वु रुद्री बड़ा जी तेन जरूर याद कारल।
रुद्री बड़ा जी याने रूद्र मणि याने माधवा नन्द जी बहुगुणा (पुत्र श्री चैतराम बहुगुणा ) जीक तिसरो नौनु !
रुद्री बड़ा जीक एकी नौनु ह्वे छौ सुरेन्द्र भैजि जो जवानी मा गुजर गे छा।
रुद्री बडा जी क याद ! हाँ जु पटवरी जीक याद आलि तो अफिक रुद्री बड़ा याद ऐ जांदन। रुद्री बड़ा जी अर पटवरी जी बड़ा दगड्या छया। दुयुंक दगुड़ बचपन से ही छौ या देर मा दगड्या ह्वेन मि नि जाणदो। द्वी पत्नी विहीन छया।
रुद्री बड़ा माने बरीक सि मनिख। सिलेटी रंग को मिरजई अर रेबदार सुलार रुद्री बड़ाक पहनावा छौ। मीन कैक मुखन रुद्री बड़ा की काट नि सूण अर ना ही सैत मीन रुद्री बड़ा मांगन कैकि काट सुणि होलि। संत सि मनिख छा, लोग उंकी बड़ी इज्जत करदा छा । उंका कथगा इ जजमान बुल्दा छा कि यदि ब्यौ काजम या बरख आदि काजम , जजमानम पैसा बि नि ह्वावो तो रुद्री बड़ा जि मानि जांदा छा। अपण गेड़ी मांगन चवनी गणेशम अफिक धरी दीन्द छा।
पण मीन रुद्री बड़ा जी तैं पूजा करद कबि नि द्याख ना ही ग्वील जांद द्याख। सैत च रुद्री बड़ा क जगा जोगी भैजि बिरती करदा छा।
रुद्री बड़ा की याद इलै आंद कि वो पटवारी जीक इखम तकरीबन रोजि आन्द छा। छज्जा , चौक या डिंड्यळम बाग़ बखरी खेल घंटो तलक खिलदा छा। हम बच्चा बि ऊंका खेल देखिक रौंस्यान्दा (आनन्द लेना ) छा।
रुद्री बडा बच्चों दगड दगड्या जन छया अर तास या बाग़ बखरी खेल मजे से खिलदा छा। चंदा काका (सत्य प्रसाद कुकरेती ) रुद्री बड़ा दगड़ भौत मजे से बाग़ बखरी या तास या कौड़ी खेल्दो छौ। रुद्री बड़ा जी खेलमा थ्वडा भौत बदमासी बि करदा छा तो चंदा काका बड़ी अजीब सि हंसी मा बोलि दींदु छौ बल ” क्या बड़ा जी फिर बदमासी हैं?” रुद्री बड़ा जी बि हंसी हंसी मा बुल्दा छा ना ना .. चंदा काका बुल्दो छौ त जरा गायत्री सौं घौटदि। फिर बात आई ग्यायि ह्वे जांद छे।
रुद्री बडा तैं मीन कबि गमगीन नि देखि