भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवियत्री रिद्धि भट की वार्ता -लिखाभेंट )
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भीष्म कुकरेती – कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
नाम – रिद्धि भट्ट
जन्म तिथि – 10/07/1978
माता पिता नाम -श्रीमती सींदा देवी / श्री हरि प्रसाद सेमवाल
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – ग्राम बिलकोट,पट्टी बूँगी
नैनीडांडा
शिक्षा – M.Sc.(गणित ), M. A. ( हिंदी, समाजशास्त्र), B. Ed.
आधारिक – प्राथमिक विद्यालय सिताबपुर, कोटद्वार
मिडल /हाई स्कूल – ggic कोटद्वार
उच्च शिक्षा – पीताम्बर दत्त बर्थवाल रा. स्ना. महा. कोटद्वार
आजीविका – प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका
सम्प्रति – रा. प्रा. वि. द्वारीखाल।
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
रिद्धि भट्ट – वैसे मुझे याद नहीं कि पहली कविता कब लिखी होगी, परन्तु बच्चों को पढ़ाने के दौरान ही लिखना शुरू किया शायद, संगीत की मैडम सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी करवा रही थी और एक भोजपुरी गीत का मुखड़ा और एक अंतरा तो उन्हें याद था परन्तु आगे नहीं आ रहा था, मैंने कागज़ – पेन पकड़ा और गीत लिख दिया वो बोली अरे तुम तो बहुत अच्छा लिखती हो, फिर यूँ ही कभी किसी कॉपी के पीछे कभी टुकड़े पर लिख देती पर ऐसा नहीं लगा कि कुछ खास लिखा है।
जब btc के दौरान मेरी मित्र प्रभा खंडूरी ने बहुत प्रेरित किया कि तुम अच्छा लिखती हो
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
रिद्धि भट्ट -बड़ा परिवार था हमारा तो लगातार भाई बहनों से पाठ्यक्रम की ही सुनी और पढ़ी
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
रिद्धि भट्ट – गीत तो ख़ूब सुने पर कविता ऐसी कोई याद नहीं है।
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
रिद्धि भट्ट – विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में छपी हैं,बहुत से पटलों पर कविताएं पढ़ी हैं, गायी हैं पर निश्चित संख्या नहीं पता। कोविड काल में तो ऑनलाइन बहुत प्लेटफार्म मिले।
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
रिद्धि भट्ट – कुछ नहीं
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
रिद्धि भट्ट – मेरे घर में गढ़वाली ही बोली जाती थी, हम भाई बहिन चाह कर भी हिंदी नहीं बोल सकते स्वाभाविक है कि आसक्ति रही है अपनी दुधाबोली से, शब्द भंडार भी ठीक रहा तो लिखने में अच्छा लगता है।
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
रिद्धि भट्ट – मैंने बहुत ज्यादा साहित्य अध्ययन तो नहीं किया है पर जो पाठ्यक्रम में रही हैं जय शंकर प्रसाद की कविताएं मुझे बहुत पसंद रही हैं।
भी . कु. – कौन सी दुसरे कवि की गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
रिद्धि भट्ट – मुझे गिरीश सुन्द्रियाल जी की कविताएं बहुत पसंद हैं।
भी . कु. – कौन सी अपनी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
रिद्धि भट्ट – मेरी सबसे वायरल कविता बुगठ्या रे तू मान न मान, सर्रा पूजे त्यार बान मुझे भी पसंद है,
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
रिद्धि भट्ट – किसी खास विषय पर नहीं लिखी हैं मैंने, पर सामाजिक विद्रुप पर मेरी कलम तैयार रहती है।
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
रिद्धि भट्ट – ज्यादा कबिताएं मैंने छंद बद्ध ही लिखी हैं.।
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
रिद्धि भट्ट -जी
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
रिद्धि भट्ट – मुझे लगता है कविता को सरस और सरल होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
रिद्धि भट्ट – कुछ तो हैं ही।
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
रिद्धि भट्ट – जी,
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
रिद्धि भट्ट – अभी तो कुछ सोचा नहीं
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
रिद्धि भट्ट – नहीं, पर अपने पौड़ी जिले स्कूली पाठ्यक्रम के लिए जो पुस्तकें लिखी गयी हैं उनमें लेखक मंडल में मैं हूँ।
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
रिद्धि भट्ट – हाँ
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
रिद्धि भट्ट – कभी कभार सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर डाल देती हूँ
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
रिद्धि भट्ट – कम ही करती हूँ
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
रिद्धि भट्ट -नहीं
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
रिद्धि भट्ट – अपने विभागीय निर्देश के तहत चैनल खोला तो उसी में एक कविता डाली बस।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
रिद्धि भट्ट – जी
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
रिद्धि भट्ट – अगर कहीं से डिमांड आए तो लिख सकती हूँ।
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
रिद्धि भट्ट – मुझे लगता है कविता को सरस और सरल होना।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
रिद्धि भट्ट – जी
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
रिद्धि भट्ट – अभी तक अपनी स्थानीय भाषा का पाठ्यक्रम में कोई स्थान था नहीं, समय समय पर नीतियाँ भी ऐसे बनी कि अपनी भाषा नेपथ्य में चली गयी जिससे अध्यापक भी दूर होते गए और धीरे धीरे भाषा बोलने,पढ़ने और लिखने का अभ्यास छूट ही गया।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
रिद्धि भट्ट – मेरी कविताओं की पहली श्रोता मेरी पुत्री है, बाकी कुछ विशेष नहीं कर पाती क्योंकि ज्यादा समय विद्यालय को देती हूँ।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
रिद्धि भट्ट – जो समाज को जागरूक करे।
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
रिद्धि भट्ट –
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
रिद्धि भट्ट – लिखते रहना चाहिए।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
रिद्धि भट्ट – जी
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
रिद्धि भट्ट – अपने परिवेश को अच्छी तरह जाने।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
रिद्धि भट्ट – स्थान का तो कोई अंदाज़ नहीं है।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
रिद्धि भट्ट -एक ऐसे कवि के रूप में जानी जाऊं जो किसी का जीवन बदल सके।