जन्म तिथि – 05-06-1981
माता का नाम: स्व० सोबती देवी
पिता नाम – स्व० नत्थी सिंह
जन्म स्थल- पाव अकरी (कीर्तिनगर) टि० ग० (उत्तराखण्ड)
भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – टिहरी गढ़वाल
शिक्षा – 12th + B.com प्रथम वर्ष केवल
आजीविका – कृषि कार्य (पूर्व में निजी क्षेत्र में Accounts Associates)
सम्प्रति – कृषि कार्य
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
राजेन्द्र पंवार – युवाकाल
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
राजेन्द्र पंवार : याद नहीं
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
राजेन्द्र पंवार – खाली रौखड़ रह जाएंगे
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )
राजेन्द्र पंवार – 5 से अधिक (सोशल मीडिया पर 20 से अधिक)
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
राजेन्द्र पंवार – प्रकाशन में सक्षम नहीं
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
राजेन्द्र पंवार – 2012 से लोक भाषा से प्रेम और लोक मुद्दों ने
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
राजेन्द्र पंवार – काफी हैं
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
राजेन्द्र पंवार – यख़ा सब उन्द जयां छन.. एक दर्द
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
राजेन्द्र पंवार – पहाड़ के रंग और जीवन
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
राजेन्द्र पंवार – मुक्त छंद / लोक छंद
लोक कविता / सामाजिक कविता
भावात्मक, संवेदनशील, यथार्थवादी
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
राजेन्द्र पंवार – हां
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
राजेन्द्र पंवार – बहुत जरूरी है
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
राजेन्द्र पंवार – जी
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
राजेन्द्र पंवार – अनुभव, कल्पना, अभिव्यक्ति
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
राजेन्द्र पंवार – काफी हैं
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
राजेन्द्र पंवार – लोक भाषा का प्रसार अथवा जनता की आवाज सरकार तक कविता के जरिए
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
राजेन्द्र पंवार – अभी तक तो इतना लग नहीं रहा
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
राजेन्द्र पंवार – सरकार पर लिखने में
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
राजेन्द्र पंवार – बस सोशल मीडिया ही मेरा प्रकाशक है
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
राजेन्द्र पंवार – जी मैने “अपना वोट अपने गांव” लिखी है
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
राजेन्द्र पंवार – ऐसी लालसा नहीं पर अगर कविता पुरस्कार स्तर पर आए तो अलग बात है
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
राजेन्द्र पंवार – सोशल मीडिया
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
राजेन्द्र पंवार – जितना सम्भव हो सके, रील, शॉर्ट्स बना कर मुख्य पृष्ठ लिंक के माध्यम से
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
राजेन्द्र पंवार – हां
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
राजेन्द्र पंवार – हां
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
राजेन्द्र पंवार – हां
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
राजेन्द्र पंवार – अभी तक तो नहीं
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
राजेन्द्र पंवार – प्रेम और प्रकृति
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
राजेन्द्र पंवार – पठन के साथ दर्शन और कई बिंदुओं/पहलुओं को छूते हुए भी एक हो
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
राजेन्द्र पंवार – अभी तक नहीं किया
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
राजेन्द्र पंवार – यह कारण नहीं दुर्भाग्य है
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
राजेन्द्र पंवार – सोशल नेटवर्किंग
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
राजेन्द्र पंवार – जो भी विषय समाज के लिए जरूरी होगा
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
राजेन्द्र पंवार – आर्थिकी समस्या सरकार के संस्कृति विभाग से प्रोत्साहन
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
राजेन्द्र पंवार – ब्लॉक स्तर से ग्राम पंचायतों के जरिए ग्रामीणों तक
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
राजेन्द्र पंवार – लोक का प्रसार और सामाजिक सन्देश अवश्य हो
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
राजेन्द्र पंवार – कविता / गीत, कहानी, निबंध, स्क्रिप्ट राइटिंग, लोक साहित्य
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
राजेन्द्र पंवार – प्राइमरी स्तर से ही प्रतियोगिताएं, बड़े मंचों पर अवसर।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
राजेन्द्र पंवार – स्थान नहीं एक जुनून है, और समाज के प्रति दायित्व