(भीष्म कुकरेती से कृष्ण कुमार माम्गाइं से वार्ता )
भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
कृष्ण कुमार ममगाईं
जन्म तिथि – 22.04.1953
माता पिता नाम – माता – स्व० श्रीमती मथुरादेवी ममगाईं, पिता – स्व० श्री खुशालमणी ममगाईं
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – ग्राम मोल्ठी, पट्टी पैदुलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड । फिलहाल दिल्लिम – जनकपुरी (C4-F ब्लौक), नई दिल्ली – 110058.
शिक्षा – आधारिक – मिडल /हाई स्कूल उच्च शिक्षा –
शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र) – कोटा, राजस्थान ;
ग्रेजुएट – दिल्ली विश्व विध्यालय;
इंटरमिडिएट – मेसमोर इंटर कौलेज, पौड़ी, उत्तराखंड;
हाइ स्कूल – हाइ स्कूल, कंडारा, पैडुलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड;
मिडिल स्कूल – हाइयर सेकंडरी स्कूल, लोधी रोड, नई दिल्ली;
प्राइमरी – आधारिक विधालय, पैडुलम पैडुलस्यूं, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड ।
आजीविका – सम्प्रति – सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी । अप्रैल, 2013 में सेवानिवृत्ति के बाद, 2015 तक MoHFW में USAID के माध्यम से सलाहकार के रूप में काम किया .
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया ममगाईं-स्व० माँजी एवं स्वयं ही – ।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी ममगाईं – सूरज निकाला चिड़िया बोली
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार – ममगाईं- याद नहीं
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )- ममगाईं- — सत्यनारायण ब्रत कथा (गढ़वाली छंदुम – booklet – free distribution )
— दैंत संघार (गढ़वाली छंदुम – booklet – free distribution)
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
ममगाईं- — सत्यनारायण ब्रत कथा (गढ़वाली छंदुम – booklet – free distribution )
— दैंत संघार (गढ़वाली छंदुम – booklet – free distribution )
— भैरव चालीसा एवं भैरव भजन कीर्तन (हिन्दी) (– booklet –free distribution)
— भैरवनाथ आरती कलेन्डर ( – Calendar – free distribution )
ये सभी इंटरनेट माध्यम से भी प्रकाशित हो चुकी हैं ।
इनके अलावा इंटरनेट माध्यम से प्रकाशित संग्रह ( posted so far ) इस प्रकार है :
n गीता श्लोक (गढ़वालिम) लगभग 600 श्लोक ।
n गढ़वाली क्विज टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 2,830 (followed with replies)
n गढ़वाली (पखणौ क बुखणा)- दोहा – टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 588
[किसी न किसी गढ़वाली आणा /पखाणे की झलक होती है हर गढ़वाली दोहे में ]
n गढ़वाली चौपाई टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 97
n गढ़वाली अर्धाली टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 49
n गढ़वाली कुण्डली टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 102
n गढ़वाली मुक्त छंद टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 17
n गढ़वाली द्रुतविलंबित छंद टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 43
n गढ़वाली सवैया टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 12
n गढ़वाली हाइकू टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – 145 etc.
n भैरव नाथ जी पर भजन कीर्तन रूपी लेख (गढ़वालि /हिंदीम) – लगभग 22-25
n सत्यनारायण ब्रत कथा (गढ़वाली छंदुम)
n दैंत संघार (गढ़वाली छंदुम) – booklet
n भैरव चालीसा एवं भैरव भजन कीर्तन (हिन्दी)
n भैरवनाथ आरती एवं कलेन्डर
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
ममगाईं- लगभग 1970 के दशक से । निजि रुचि, सामाजिक परिवेश एवं पारंपरिक दृश्य
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
ममगाईं- रामचरित मानस
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
ममगाईं- कभी एकल आकलन नहीं किया ।
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
ममगाईं- टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति – (गढ़वाली भाषा संरक्षण हेतु) ।
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
ममगाईं- सामाजिक परिपेक्ष – साधारण
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
ममगाईं- शायद नही ।
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
ममगाईं- कह नहीं सकता ।
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
ममगाईं- कभी कभी
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
ममगाईं- भाव सम्पन्न ।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
ममगाईं- आध्यात्म चिंतन एवं व्योहारिक घटना क्रम ।
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
ममगाईं- स्वांत: सुखाय, विचार विस्तार एवं प्रवाह ।
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
ममगाईं- कुछ कुछ
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
ममगाईं- जी। खासकर यदि कार्य अधूरा रह गया; तब दुबारा पथ पर आने में कठिनाई होती है
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
ममगाईं- फिलहाल तो (1) ”गढ़वाली गीता” एवं (2) “गढ़वाली पखणौं क बुखणा” प्रिन्ट करवानी है ।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु) -)
ममगाईं- न
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
ममगाईं- नही
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
ममगाईं- कुछ छपवा कर मुफ्त में बाँट दी और कुछ इंटरनेट माध्यम से प्रकाशित हो रही हैं । गढ़वाली क्विज टु लर्न गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति की एक क्विज पिछले 8-9 साल से इंटरनेट माध्यम से रोज पोस्ट की जाती है जी । जितने भी जबाब आते हैं उनके उत्तर भी दिए जाते हैं कि जबाब ठीक है कि नहीं ।
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
ममगाईं- कुछ खाश नहीं
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
ममगाईं- जी
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
ममगाईं- जी
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
ममगाईं- जी – गढ़वाली पाठशाला नाम से है ।
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
ममगाईं- नहीं
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
ममगाईं- गढ़वाली संस्कृति एवं भाषा सीखना एवं गढ़वाली परिपेक्ष में आध्यात्म ।
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
ममगाईं- जिसे लोग सहर्ष पसंद करें ।
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
ममगाईं- नहीं
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
ममगाईं- सामाजिक परिपेक्ष ।
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
ममगाईं- कम से कम एक गढ़वाली क्विज तो रोज पोस्ट हो ही जाती है फेस बुक पर; इसके अलावा सौर्ट्स के रूम में एक गढ़वाली गीता श्लोक , एक गढ़वाली दोहा & एक गढ़वाली क्विज भी पोस्ट हो जाती है – अगर क्वी पौड़लु त ।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
ममगाईं-
n कविता फॉर्म में “ गढ़वाल का इतिहास “ ( कार्य चल रहा है )
n कविता फॉर्म में “ श्रीमदभागवत कथा “ ( कार्य अभी शुरू किया है – भगवत कथा जो संक्षेप मे रोज किसी सप्ताह में होती है )
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
ममगाईं- प्रकाशक के बारे में जानकारी की कमी ।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए ममगाईं- सामाजिक चेतना
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
ममगाईं- खूब लिखण चैंद – अपनी भाषा संबर्धन के लिए ।
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
ममगाईं- जो कुछ है कह ही दिया ।
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
ममगाईं- भाषा की इज्जत ही हमारी इज्जत है ।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
ममगाईं- जी पेंशनर आदमी – भाषा की जितनी भी सेवा हो सकी वही उपलब्धि एवं समय का सदुपयोग है जी ।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ? === अपने संग्रहों की फोटो प्रेसित कीजियेगा साथ में
कह नहीं सकता जी ।