(जानिये गढ़वाली /कवि श्री शान्ति प्रकाश जिज्ञासु से उनके कवित्व पर को उनकी जुवानी )
(भीष्म कुकरेती से गढ़वाली कवि की वार्ता -लिखाभेंट )
भीष्म कुकरेती कृपया अपने बारे में सक्षिप्त जानकारी दीजिये
जन्म तिथि – शान्ति प्रकाश ‘जिज्ञासु’
माता पिता नाम – स्व०श्रीमती जीती देवी स्वव० श्री आशाराम
जन्म स्थल व किस भौगोलिक क्षेत्र से संबंध है – पौड़ी गढ़वाल
शिक्षा – स्ना त्कोबतर (एम० ए०)
आधारिक – सीटी बोर्ड चुक्ूाात् वाला,
मिडल /हाई स्कूल – राजकीय इंटर कॉलेज पौड़ी एवं कलजीखाल पौड़ी गढ़वाल
उच्च शिक्षा – डी०बी०एस० (पी०जी०) कॉलेज देहरादून
आजीविका –सरकारी सेवा
सम्प्रति – हाथीबड़कला गांव, देहरादून
भीष्म कुकरेती -बाल्य काल या युवाकाल के बारे में जिसने आपको साहित्य में आने को प्रेरित किया
जिज्ञासु – मेरे घर से हिमालय पर्वत की पूरी रेंज साफ दिखाई देती है और ठीक सामने चौखम्बा है जिसे देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि हाथ आगे बढ़ाओं और वर्फ निकाल लो बस उसी की प्रेरणा से कुछ शब्दक निकले जो बाद में कविता बनी मेरी कविताओं को दिशा देने वाले राकेश भदूला ततकालीन सम्पारदक, हिमाचल टाइम्सम थे उसके बाद बाईस वर्ष बाद गुरू मिला और प्रकृति की गोद में लिखी कविताओं को नई दृष्टि और ऊंचाई मिली ।
भी . कु. – पहली हिंदी कविता जो पढ़ी
जिज्ञासु – बीते वर्ष की तरह पुन: गंणतंत्र दिवस आया ।
भी . कु. – सबसे पहली गढ़वाली कविता से साक्षात्कार –
जिज्ञासु – एक डाळ बरखा कि ऐगी, मैनु सैंण भादो कु लगगी
भी . कु. – अब तक कितनी गढ़वाली कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं (इंटरनेट माध्यम सहित )-
जिज्ञासु – चार कविता संग्रह लगभग ढाई सौ कविताएं लगभग पांच सौ छिटगा (नई विधा गढवाली में छणिकाएं)
भी . कु. – कितने कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं और नाम –
जिज्ञासु -1-आस, 2-एक दबाल, 3-द्वी मुट्ट, 4-सग्वा डि़, 5-धाद उत्तराखण्ड की चिंताओं पर एकाग्र, 6-गढवाली मांगळ संग्रह, 7- और गुड्डो जीत गई, 8-गढ़वाल की लोक कथाएं, 9-तामी, 10-लोक भाषाओं के सृजनरत रचनाकार, 11- पुरूषार्थ का पर्याय,
भी . कु. – आप गढ़वाली कविता कब से लिख रहे हैं और क्या चीज ने आपको प्रेरित किया कि गढ़वाली कविता में रचना करें –
जिज्ञासु – 1987 से
भी . कु. -आपकी गैर गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
जिज्ञासु – ‘’ट्रू व्यू टी’’
भी . कु. – कौन सी गढ़वाली पसंदीदा कविता कौन सी है और क्यों
जिज्ञासु – मी गढ़कन्यास गंगा की दग्याोंप यूं पहाडूं की रांणी
भी . कु. – आपकी गढ़वाली कविताओं का मुख्य विषय क्या रहा है
जिज्ञासु – संवेदनात्मूक
भी . कु. – आपकी कविता वर्ग /क्लास व शैली क्या है ?
जिज्ञासु – आम समाज का संघर्ष
भी . कु. – गजल व नव गीत भी लिखे हैं ?
जिज्ञासु – नहीं
भी . कु. – नई कविता व नए कविता आंदोलन के बारे में आपकी राय क्या है ?
जिज्ञासु – परिवर्तन समाज का सत्यि है। कविता के तेवर प्रदर्शित होने चाहिए
भी . कु. – नए प्रयोग करते हैं ?
जिज्ञासु – गढवाली में नई विधा (छिटगा) लगभग पांच सौ
भी . कु. – आपकी रचनात्मक प्रक्रिया कैसी होती है?
जिज्ञासु – सकारत्म क सुखांत होती है।
भी . कु. – आप किन किन लेखकों, कविओं , ग्रंथों से प्रभावित हैं ?
जिज्ञासु – प्रेमलाल भट्ट – उमाळ, कन्हैैयालाल डंडरियाल-अंज्वा ळ, लोकेश नवानी की फंची, देवेन्द्रओ जोशी के काठयूं मा आण से पैली, बीना कण्डाहरी- कै खुणि,
भी . कु. – आपकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?
जिज्ञासु – शाश्वत रचना कर्म कर समाज में चेतना का विस्तालर हो
भी . कु. -क्या वर्तमान गढ़वाली कविताएं समाज को प्रभावित करने में सफल हुयी हैं ? (गीतों को छोड़ दें )
जिज्ञासु – जी हां ल्हेत ल्यास ल्हेे ल्या? जी महराज काफळ मेरा बड़ा रसीला,
कैन बोली ऋषि मुनी द्ययो अर देवतों की धरती च,
डाक्टोरन ना बोलयाली,
चला दाथी समाळा चला कुटी समाळा,
पहाड़ जनी अजण्डम हमू तैं बगदी गंगाळ च व्वैध,
खाणवळा हौर छन कमाण वळा हौर छन
मौत कु जागर लग्यूं च आज ब्या ळि, आदि आदि
भी . कु. – क्या कभी किन्ही कविताओं को लिखते समय भिन्न चुनौतियाँ आयी हैं ?
जिज्ञासु – जी हां
भी . कु. – आप कविता प्रकाशन हेतु क्या कार्य करते हो ?
जिज्ञासु – पहले अपनी रचनाओं के चार बार प्रुफ पढ़ना फिर चार एक्स पर्ट से पढ़वाना उसके बाद प्रिंट के लिए देना।
भी . कु. – क्या आपने शासन की प्रेरणा से गढ़वाली कविता रची हैं ? (जैसे चुनाव में भाग लो , आदि आदि या शासकीय पुस्तक हेतु –
जिज्ञासु – कभी नहीं
भी . कु. – क्या किसी पुरूस्कार हेतु कविता रचीं हैं ?
जिज्ञासु – पुरस्कांर को ध्याकन में रख कर नहीं रची
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए क्या करते हैं?
जिज्ञासु – आकाशवाणी, दूरदर्शन, विभिन्न टी वी चैनलों तथा विभिन्ने मंचों पर दिल्ली मध्य प्रदेश पंजाब, छत्तीसगढ , रामगढ़ कुमांऊ तथा विभिन्न विश्व विद्यालयों में छत्तिसगढ आदि में कविता पाठ
भी . कु . – पाठक विस्तार हेतु सोशल मीडिया का कितना प्रयोग करते हो ?
जिज्ञासु – सामान्यश
भी . कु – – क्या आपका ब्लॉग है ?
जिज्ञासु – नहीं
भी . कु. -यूट्यूब में गढ़वाली कविता प्रकाशित करते हो ?
जिज्ञासु – मैंने नहीं की अन्यल लोगों ने कुछ कविताएं डाली हैं।
भी . कु. – क्या आपका कोई यूट्यूब चैनल है ?
जिज्ञासु – अभी नहीं
भी . कु. – क्या आप फिल्मों या अन्य कला रूपों के लिए भी कविता लिखते हैं?
जिज्ञासु – अभी तक नहीं
भी . कु. – आपकी कविताओं में कौन से तत्व सबसे महत्वपूर्ण हैं
जिज्ञासु – संवेदना,
भी . कु. – आपके अनुसार, एक अच्छी कविता क्या होती है?
जिज्ञासु – जिसे कोई भी स्रोता अपनी कविता समझे
भी . कु. – कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं ?
जिज्ञासु – बहुत, संख्याि नहीं बता सकते
भी . कु. – क्या कारण है कि प्राइमरी स्कूलों में गढ़वाली कविता पाठन , व गढ़वाली नाटक मंचन नहीं हो पता ?
जिज्ञासु – वर्तमान में काफी प्रयास किया जा रहे हैं
भी . कु. – आप अपनी कविताओं को बालिकाओं – बालकों व युवती – युबाओ तक पंहुचाने हेतु क्या ताकत लगाते हो ?
जिज्ञासु – अनुवाद और स्कूआलों में जाकर कार्य करते हैं ।
भी . कु. – आप भविष्य में किस तरह की कविताएँ लिखना चाहते हैं?
जिज्ञासु – समाज के बेहतरी के लिए
भी . कु. – प्रकाशन की क्या क्या समस्याएं हैं व उनका क्या समाधान होना चाहिए ?
जिज्ञासु – प्रकाशन की कोई समस्याा नहीं है आपकी इच्छा शक्ति और व्यकय शक्ति होनी चाहिए।
भी . कु. – पुस्तक वितरण हेतु ग्रामीण गढ़वाल में वितरण की समस्या कैसे सुलझायी जानी चाहिए
जिज्ञासु – पाठक तैयार करने होंगे।
भी . कु. – आप युवा कवियों को क्या सलाह देना चाहेंगे?
जिज्ञासु – पहले अच्छार पढे़, भ्रमण करे, अनुभव करें फिर लिखें
भी . कु. – आप अन्य साहित्यिक विधाओं में रचना रचते हो ?
जिज्ञासु – जी हां- १- संक्ल न, २- व्यंक्तितव एवं कृतित्वा, ३-साझा संक्लदन ४- छिटगा
भी . कु. – युवा गढ़वाली कवि कविता क्षेत्र में आएं हेतु क्या परामर्श है ?
जिज्ञासु – अपनी रचनाओं को किसी रचानाकर से साझा करें तथा उनसे मार्ग दर्शन लें मैंने तो कई युवा कवि कवित्रियों को मंच भी प्रदान किए हैं तथा आकाशवाणी दूर दर्शन की राह भी बताई है ।
भीष्म कुकरेती -आप अपने को गढ़वाली कविता संसार में किस स्थान में पाते हो व किस स्थान की कल्पना है
जिज्ञासु – इसमें कल्पकना का कोई स्था न नहीं है मेहनत करनी होती हैं अच्छाै पढ़ना विद्वानों का साथ होना चाहिए।
स्था न तो कार्य की साधना बनाती है हां अभी तक लगभग ग्याकहर पुस्ततकें प्रकाशित हो चुकी है तेरह पुस्ताकों का अनुवाद किया है कुछ बाल पुस्तभकें हैं। कुछ के दो तीन संस्क रण प्रकाशित हो चुके है। और गढवाली साहित्यअ में पहली बार दो पुस्त कों पर रॉयल्टीु प्राप्तछ हुई है।
भीष्म – आपको किस प्रकार के कवि रूप में याद किया जाएगा ?
सरल संवेदनात्मएक कवि के रूप में। साहित्य् जो जीता हूं, वही लिखता हूं।