गढ़वाल में वसंत पंचमी सरस्वती पूजा हेतु नहीं अपितु हरियाळी पूजन और सामूहिक गीत प्रारंभ हेतु प्रचलित थी
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आलेख – भीष्म कुकरेती
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फेसबुक व अन्य इंटरनेट माध्यमों में हम (मै भी ) वसंत पंचमी को सरस्वती पूजन का पर्याय मानकर के एक दूसरे को वधाईयें देते रहते हैं। किन्तु गढ़वाल में वसंत पंचमी में सरस्वती पूजा एक गौण पक्ष रहता था। हाँ यदा कड़ा कोई बच्चे को पाटी दिखा देता था बस सरस्वती पूजा यहीं तक सीमित थी (मुझे भी इसी दिन पाटी दिखाई गयी थी ). हमारे सामान्य लोक या लोक साहित्य में कहीं भी सरस्वती बंदना के कोई प्रतीक सामने नहीं आये हैं कि हम कह सकें कि वसंत पंचमी का सरस्वती पूजन से सबंध है।
वास्तव में वसंत पंचमी का वसंती रंग से भी उतना संबंध नहीं है जितना हम इंटरनेट माध्यम में शोर करते हैं। किसी ने एकाध रुमाल हल्दी के रंग में रंग दिया तो रंग दिया अन्यथा मेरे बचपन में बसंती रंग व पीले रंग में कोई अंतर् भी नहीं समझा जाता था।