ढांगू विकास खंड के इतिहास पुरुष एवं स्वतंत्रता संग्राम के अमर वीर सेनानियों के जीवन वृत्त हमारे आदर्श कल्पना को साकार बनाने में सहायक सिद्ध होंगे, ऐसी हमारी परवल धारणा है, विकास के इस प्रगतिशील युग में यदि हम जन्म मरण की तिथियां के अवसर पर इन महारथियों को स्मरण कर ले तो यही हमारी उनके प्रति पवित्र श्रद्धांजलि एवं वंदना होगी मैं जब सत्यपथ, का संवाददाता ढांगू विकासखंड से था, तब मेरी मुलाकात ग्राम ढौंर, निवासी स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय बाग सिंह बिष्ट से हुई, उस समय उनकी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान थी सत्यपथ के वे नियमित सदस्य बन गये उन्होंने स्वर्गीय संत सदानंद कुकरेती के बारे में बताया कि जिस तरह उन्होंने भिक्षुक बनकर सिलोगी विद्यालय का निर्माण किया ऐसा महान व्यक्ति होना कठिन है इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार रमाकांत पहाड़ी, जिन्होंने सन् 1924 में प्राथमिक विद्यालय बड़ेथ में शिक्षा प्राप्त की उनकी पुस्तक मेरा नौनिहाल बड़ेथ स्वर्गीय संत सदानंद कुकरेती के बारे में अच्छी जानकारी रखते थे ग्राम जसपुर के प्रगतिशील विचारक स्वर्गीय हरिप्रसाद कुकरेती प्रवक्ता इंटर कॉलेज सिलोगी ने संत सदानंद कुकरेती पर पुस्तक कालेश्वर प्रेस कोटद्वार से प्रकाशित की थी कागेश्वर प्रेस में ही स्वर्गीय सदानंद कुकरेती जी की फोटो भी प्राप्त हुई थी, की फोटो भी प्राप्त हुई थी उनके हाथ में बांज की लाठी व कंधे में एक थैला होता था, कुछ समय तक तो रमाप्रसाद पहाड़ी उन्हें पोस्टमैन मामा जी कहते थे। जब वे बड़ेथ से होकर सिलोगी जाते थे, तब पहाड़ी जी उन्हें पोस्टमैन मामा जी ही कहा करते थे , उनकी पुस्तक मेरा नौनिहाल मिले तो अवश्य अवलोकन करें गढ़वाल के सांसद स्वर्गीय प्रताप सिंह नेगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव नारायण दत्त सुंदरियाल ने दिल्ली में उत्तराखंड राज्य आंदोलन कमेटी का गठन किया तब मैं उनके साथ निरंतर रहा काश यदि ये दिवंगत विभूति जीवित होते तो स्वर्गीय सदानंद कुकरेती के त्याग को स्वयं अपनी लेखनी के माध्यम से स्वयं प्रस्तुत करते मैं स्वर्गीय संत सदानंद कुकरेती के बारे में पूर्व में कई महान विभूतियों से जानकारी प्राप्त की कोटद्वार से प्रकाशित जयंत पत्रिका में विश्व ने भू पर भेजा वह व्योम चंद्र था, सिलोगी का संत सदानंद था, मेरा लेख प्रकाशित है, हमारी धारणा है की ढागू विकासखंड के लगभग 342 गांव इस महान विभूति को कदापि नजर अंदाज नहीं कर सकते स्वर्गीय मुकुंदराम दैवज्ञ राष्ट्रपति से सम्मानित विभूति के सुपुत्र दंडाधिकारी चक्रधर बड़थ्वाल उसी समय के छात्र रहे हैं।
सत्यप्रसाद बड़थ्वाल पूर्व पत्रकार