वोटों की फ़सल तैयार करने केदारनाथ पहुँच रही हैं ‘महान हस्तियाँ’ !

मोहित डिमरी
रूद्रप्रयागः आपदा के बाद कांग्रेस सरकार और अब राज्य एवं केंद्र की भाजपा सरकार केदारनाथ पुनर्निर्माण का कार्य कर रही है। पूरा देश चाहता है कि आपदा के ज़ख़्मों को भरकर नए सिरे से केदारपुरी बसाई जाए और आस्था के केंद्र केदारनाथ को सुविधाओं से सरसब्ज किया जाए।

 

लेकिन, सरकार को केदारघाटी से अपनी नज़र नहीं फेरनी चाहिए। आपदा के समय केदारघाटी में कई स्थानों पर झूला पुल बह गए थे। लेकिन आपदा के पाँच सालों बाद भी झूला पुल बनकर तैयार नहीं हुए हैं।

 

चंद्रापुरी और विजयनगर में झूला पुल के निर्माण को लेकर स्थानीय लोग स्कूली बच्चों के साथ कई बार सड़कों पर उतर आए हैं। आज सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में होती है। ग्रामीण मीलों दूरी नापने को मजबूर हैं। पूर्व में हुई घटनाओं में ट्रॉली से गिरकर लोगों की मौत भी हुई है और कई लोगों की अंगुलियाँ भी कटी हैं।

 

लेकिन झूला पुल के लिए पैसा नहीं मिल पाया। भूस्खलन से प्रभावित सेमी गाँव का आज तक विस्थापन नहीं हो पाया है। ग्रामीण ख़ौफ़ के साये में जीने को मजबूर हैं। सेमी की तरह ही रुद्रप्रयाग के कई गाँव भूस्खलन की जद में हैं।

 

केदारनाथ में देश की बड़ी-बड़ी हस्तियाँ कई बार कैम्प कर चुकी हैं और आगे भी करती रहेंगी। लेकिन इन गाँवों के लोगों की भी सुध लेनी जरुरी है। इन महान ‘हस्तियों’ को केदारघाटी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी जाकर वस्तुस्थिति देखनी चाहिए। लेकिन ऐसा होगा नहीं।

 

सरकार को अगले वर्ष लोकसभा चुनाव में वोटों की फ़सल केदारनाथ के नाम पर ही काटनी है। सरकार केदारनाथ के नाम पर पूरे देश में एक बड़ा वोटबैंक तैयार करना चाहती है।

 

इसलिए ये सब ‘ड्रामा’ किया जा रहा है। केदारघाटी के लोगों के दुःख-दर्द से सरकार को कोई वास्ता नहीं है और यहाँ के चंद वोटों से सरकार को कोई फ़र्क़ पड़ता भी नहीं है।

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