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वन कानून : 17 सालों में पक्की नहीं हो सकी सड़क !

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देहरादून।उत्तराखंड में एक सड़क ऐसी भी है जिसको बनाने के लिए आम लोगों से लेकर राजनेताओं तक ने लंबी लड़ाइयां लड़ी, लेकिन अब तक कामयाब नहीं हो सके थे। 17 साल में 9-9 मुख्यमंत्रियों का राजकाज देखने वाली इस सड़क को लेकर शायद ही कोई मुख्यमंत्री ऐसा रहा हो, जिसने इसको लेकर गम्भीरता न दिखाई हो, लेकिन सफलता किसी के हाथ नहीं लगी।

कार्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व के बीच में टैरिटोरियल डिवीजन का काम करने वाला लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग फिर से सुर्खियों में है। ये मोटरमार्ग लैंसडाउन डिवीजन के घने जंगलों से होकर गुजरता है। दरअसल राज्य गठन के इन 17 सालों में इस वन मोटर मार्ग के डामरीकरण को लेकर राजनेताओं ने तमाम वादे किये।

सड़क पर इसको लेकर आंदोलन हुए तो विधानसभा सदन में भी यह मार्ग चर्चा का विषय रहा। प्रदेश का शायद ही कोई मुख्यमंत्री ऐसा रहा हो जिसने कोटद्वार को राजधानी दून से जोड़ने वाले इस मोटर मार्ग के डामरीकरण की बात न की हो। हालांकि, एलिफेंट कॉरिडोर के बीच से गुजरने वाली इस सड़क पर वन कानूनों के चलते एक इंच भी निर्माण कार्य आगे नही बढ़ पाया।

अब वन मंत्री हरक सिंह रावत ने इस सड़क को वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन एक्ट 1980 से पहले की बता कर हाट मिक्स निर्माण करने के आदेश जारी कर दिये हैं। सड़क का मात्र 13.5 किलोमीटर हिस्सा ही ऐसा है जहाँ पर सड़क का डामरीकरण नहीं हो सका है।

वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि पिछले 17 सालों से वन विभाग के अधिकारी लालढांग-चिल्लरखाल रोड का निर्माण बार-बार रिजर्व फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ कंजरवेशन एक्ट का हवाला देकर रुकवा दे रहे थे। धरातल पर जब जांच की गई तो इस सड़क के 1980 से पहले ही ब्लैक टाप के निशान मिले, जो इसके फिर से हॉट मिक्स बनने का रास्ता प्रशस्त करतें है।

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