वैसलीन कांड : 41 साल पहले बिशन सिंह बेदी की टीम इंडिया हुई थी शिकार ! 

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन एक बार फिर जेंटलमैन गेम माने जाने वाले क्रिकेट के चेहरे पर एक दाग लग गया. ऑस्ट्रेलिया खिलाडिय़ों द्वारा एक रणनीति के तहत गेंद से छेड़छाड़ की गई.

इस पूरे मामले को ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी गंभीरता से लिया और प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के दबाव में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को स्मिथ को कप्तानी से हटाना पड़ा. स्टीव स्मिथ ने बाद में यह स्वीकार किया कि गेंद से छेड़छाड़ का फैसला सामूहिक रूप से टीम का फैसला था. मैच के तीसरे दिन कैमरन बेनक्राफ्ट लंच के बाद गेंद से छेड़छाड़ करते हुए कैमरे में कैद हो गए थे. वह एक पीली सी चीज से गेंद से छेड़छाड़ कर रहे थे. मैदान पर लगी स्क्रीन पर इस घटना को दिखाए जाने के बाद दर्शकों ने भी इस निंदा की. इस पूरे विवाद ने एक बार अतीत के उन पन्नों को पलट दिया है, जिनमें खिलाड़ी गेंद से छेड़छाड़़ करते पाए गए.

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी 2001 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर गेंद से छेड़छाड़ के आरोपी बने थे, लेकिन इस मामले में ने ज्यादा तूल नहीं पकड़ा. 2006 में ओवल टेस्ट मैच में अंपायरों ने पाकिस्तान पर गेंद से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे. इसके फलस्वरूप पैनल्टी के रूप में इंग्लैंड को पांच रन मिल गए थे. लेकिन पाकिस्तान के कप्तानन इंजमाम उल हक ने इसके विरोध में मैदान छोड़ दिया और अंपायरों ने इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया. उस समय यह एक बड़ा विवाद रहा था.

गेंद से छेड़छाड़ का सबसे चर्चित और विवादास्पद मामला 1976-77 में हुआ. इस मामले को वैसलीन कांड के नाम से आज भी जाना जाता है. इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर थी. जॉन लीवर इंग्लैंड टीम में एक युवा और तेज गेंदबाज थे, लेकिन दुर्भाग्य से आज भी उन्हें अपनी गेंदों की गति और स्विंग के लिए नहीं बल्कि वैसलीन कांड के लिए याद किया जाता है.

भारत में पहली बार आए इस गेंदबाज ने 26 विकेट लिए थे. इंग्लैंड ने सीरीज जीती थी और उसमें लीवर का महत्वपूर्ण रोल था. लीवर ने भारत के खिलाफ खेले 10 टेस्ट मैचों में 45 विकेट लिए. 1976-77 के भारत दौरे पर दिल्ली में उन्हें टेस्ट कैप मिली. भारत की बल्लेबाजी के दौरान 11वें ओवर तक सब ठीक चल रहा था. टीम इंडिया बिना विकेट खोए 43 रन बना चुकी थी.

इसके बाद लीवर गेंद को स्विंग कराने लगे और भारत का स्कोर 4 विकेट पर 49 रन हो गया. यानी केवल 12 गेंदों में भारत ने चार विकेट खो दिए. अगले दिन टीम का स्कोर पहले 122 पर 7 विकेट हुआ. लीवर ने भारत की पहली पारी में 46 रन देकर 7 विकेट लिए.

आज भी क्रिकेट फैन्स को वो दौर याद है जब लीवर अपने माथे पर एक पट्टी बांध कर गेंदबाजी किया करते थे. मद्रास टेस्ट में भी लीवर गर्मी से बचने के लिए अपने माथे पर पट्टी बांध कर आए. यहां भी उन्होंने 59 रन पर पांच विकेट लिए. बाद में लीवर की पट्टी के नीचे वैसलीन पाई गई. वह वैसलीन लगाकर गेंद की चमक बनाए रखते थे और गेंद को ज्यादा स्विंग कराते थे.

उस समय टीम इंडिया के कप्तान बिशन सिंह बेदी ने सबसे पहली लीवर पर इस तरह के आरोप लगाए. बाद में इस मामले ने तूल पकड़ लिया और लीवर जब दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गए तो उन पर तीन साल का प्रतिबंध लग गया.

दरअसल, गेंद से छेड़छाड़ एक समय तक स्वाभाविक और प्राकृतिक फिनोमिना रहा, लेकिन आश्चर्य की बात है कि आज क्रिकेटर यह भली-भांति जानता है कि चारों तरफ कैमरे लगे हैं. उनकी हर हरकत कैमरे में कैद हो रही है बावजूद इसके गेंद से छेड़छाड़ का कोई तर्क समझ नहीं आता. क्या आधुनिक क्रिकेट में जीत ही सब कुछ हो चुकी है, क्या यह मान लिया जाए कि अब क्रिकेट जेंटलमैन गेम नहीं रहा? स्मिथ कांड तो यह इशारा कर रहा है.

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