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उत्तराखंड क्रान्ति दल  ने भाजपा-कांगेस को आड़े हाथ लिया

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देहरादून । उत्तराखंड क्रान्ति दल के केन्द्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि पहाड़ में शराब एक साजिश है जिसे बहुत सुनियोजित तरीके से स्थापित किया जा रहा है। ताकि लोगों के दिमाग कुंद किये जायें और पहाड़ को मनमाने ढंग से लूट का उपनिवेश बनाया जा सके। इस पूरे कुचक्र में व्यवस्था सफल रही है और शराब के माध्यम से राजनीतिक दलों ने सत्ता में पहुंचने का रास्ता तैयार कर दिया है।

 

यही वजह है कि भाजपा जो भारी बहुमत से सत्ता में आई है उसके लिये जनता के हितों से ज्यादा शराब को बचाने की प्राथमिकता हो गई है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शराब तंत्र से इतनी डरी हुई है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट तक चली गई। इतना ही नहीं कोई यह सोच भी कैसे सकता है कि जनता के सवालों को हल करने के नाम पर कोई पार्टी इतना नीचे गिर सकती है कि शराब जैसी जनविरोधी वस्तु को बचाने के लिये वह राष्ट्रीय राजमार्गो को डिस्ट्रिक रोड में बदलने का दुष्चक्र कर दे। इससे साफ हो जाता है कि भाजपा बहुत सुनियोजित तरीके से शराब को पहाड़ में स्थापित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्रीय राजमार्ग अभी तक हैं वह कम से कम सुविधा की ²ष्टि से अच्छे बन रहे थे उन्हें भाजपा ने बख्श देना था।

 

त्रिपाठी ने भाजपा-कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि इन दोनों पार्टियों ने पहाड़ में राजनीतिक रास्ते से शराब परोसी है। इतिहास गवाह है कि जिस साजिशन अंग्रेज यहां शराब लाये इन पार्टियों ने आजादी के बाद लगातार इसे आगे बढ़ाया। बीच में जब कभी यहां शराबबंदी की बात हुई भी या लागू भी हुई तो इन्होंने नीतियां बदलकर इसे फिर से लागू कराने में सफलता प्राप्त की। जब अविभाजित उत्तर प्रदेश में 1977 में तीन पर्वतीय जिलों सहित पांच जिलों में शराबबंदी लागू हुई थी तो इन्हीं लोगों ने उसे खुलवाने के लिये तिकडमें की। अस्सी के दशक में पहाड़ में शराब माफिया को पनपाने का जो काम कांग्रेस ने किया उसे भाजपा अब आगे बढ़ा रही है। त्रिपाठी ने कहा कि राजनीतिक दलों का शराब के प्रति कितना अनुराग है इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि पिछली सरकार के मुखिया हरीश रावत ने अस्सी के दशक में सुरा के सबसे बड़े व्यवसायी के नाम पर कुमाऊं विश्वविद्यालय अल्मोड़ा परिसर के होटल मैनेजमेंट संस्थान कर दिया। यह न केवल पहाड़ की अस्मिता के साथ खिलवाड़ था, बल्कि सुनियोजित तरीके से अपसंस्कृति को आगे बढ़ाने का कुत्य भी था।

 
त्रिपाठी ने भाजपा-कांग्रेस के पास सोचने-समझने वालों की भारी कमी रही है। यही वजह है कि उन्हें स्थानीय धरोहरों से राजस्व प्राप्ति करने की नीति बनाना समझ में नहीं आता। त्रिपाठी ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि यह कैसी देशभक्तों की सरकार है जो हाईकोर्ट के दो निर्णयों शराब और खनन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाती है। जबकि होना यह चाहिये था कि इस सरकार को हाईकोर्ट के फैसले को नजीर मानते हुये गलत कामों के खिलाफ जनता के बीच जनविश्वास पैदा करना चाहिये था। उल्टा यह जनपक्षीय ओदशों को अपने कानूविदों के माध्यम से गलत दिशा में ले जा रही है।

 

त्रिपाठी ने कहा कि जनता के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है। भाजपा ने जिस तरह से मोदी लहर में पहाड़ के लोगों को चुनाव में सब्जबाग दिखाये हैं वे टूट गये हैं। अब यह बात साफ हो गई है कि ‘कांग्रेस सहित भाजपा’ के खिलाफ बड़ी लड़ाई लडऩे का समय आ गया है। त्रिपाठी ने कहा कि पिछले चुनाव से भाजपा ने जनता की एक दुविधा को दूर कर दिया कि लड़ाई भाजपा के खिलाफ लडऩी है या कांग्रेस के खिलाफ। अब तय हो गया है कि ये दोनों साथ पहाड़ को लूटने की साजिश रच रहे हैं। पिछले चुनाव में जिन 13 लोगों को भाजपा महाभ्रष्ट बता रही थी अब वे उनकी ‘राष्ट्रभक्त’ पार्टी में हैं। उन्होंने जनता का आह्वाहन किया कि लंबी और बदलाव की लड़ाई को बढ़ाने के लिये सब एकजुट हों।

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