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उत्तराखंड राज्य के 26 प्रतिशत बच्चे नहीं जानते देश की राजधानी है कहा!

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पौड़ी: बाल अधिकार संरक्षण से संबंधित अनुश्रवण की बैठक में आयोग के अध्यक्ष ने बच्चों के अधिकारों को लेकर विस्तार से जानकारियां दी। उन्होंने उत्तराखंड की शिक्षा स्थिति पर चिंता जताई। कहा कि राज्य के मैदानी तथा पहाड़ी जिलों में शिक्षा के स्तर पर काफी बड़ा असंतुलन है। कहा कि एनसीईआरटी आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य के 26 प्रतिशत बच्चे देश की राजधानी तक नहीं जानते। 
विकास भवन सभागार में बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खण्डूड़ी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। उन्होंने विश्व स्तरीय संस्थाओं की ओर से देश तथा उत्तराखंड के बच्चों पर जारी विभिन्न सर्वेक्षण आंकडों पर रोशनी डाली। जो कि बेहद चिंताजनक हैं। कहा कि शिक्षा के स्तर में उत्तराखंड का प्रतिशत अंाकड़ों के सापेक्ष काफी खराब स्थिति में है। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में विश्व की दूसरे स्तर की सबसे घटिया शिक्षा है।
कहा कि भारत का शिक्षित युवा वर्ग मात्र 40 प्रतिशत ही नौकरी पाने के काबिल है। जबकि एनसीईआरटी की रिपोर्ट के अनुसार शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर पर काफी असंतुलन है। उन्होंने कहा कि कक्षा 5 में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे अपनी मात्र भाषा को भी ठीक तरह से लिख-पढ़ नहीं सकता। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के अनुसार देश के 37 प्रतिशत स्कूलों में बिजली की आपूर्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में शिशु मृत्यु दर में कमी नहीं आ पा रही है।
उन्होंने कहा कि एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप के सर्वे के अनुसार भारत में हिमालयी राज्यों में चिकित्सा सुविधाओं का बेहद अभाव है। जिसके कारण हिमालयी राज्यों के बच्चों में अधिकतर बौनेपन की समस्या पायी जाती है। उन्होंने कुपोषण, भुखमरी आदि के इंडक्स पर रोशनी डालते हुए बताया कि भारत में पांच वर्ष से कम आयु के 38 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। नीति आयोग की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश के 177 कुपोषित जिलों में उत्तराखंड भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के चार जिले सर्वाधिक कुपोषण के शिकार हैं। जिनमें सर्वाधिक कुपोषित बच्चे हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, उत्तरकाशी तथा चमोली जिले शामिल हैं। देश में मध्य प्रदेश के सर्वाधिक 18 प्रतिशत जिले, महाराष्ट्र 13 प्रतिशत, बिहार 12 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश के 7 प्रतिशत जिले कुपोषण की बीमारी की चपेट में हैं। भारत सरकार की नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार अपराध के मामले में दस हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड के बच्चों में अपराध की प्रवृत्ति सर्वाधिक है। इस मौके पर उन्होंने बाल भिक्षा, बाल श्रम, बाल विवाह आदि मुद्दों पर अधिकारियों से अपने विचार साझा किये।
उन्होंने बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा तथा संस्कारों के लिए शिक्षकों तथा अभिभावकों को भी संस्कारवान तथा चरित्रवान शिक्षा देने की अपील की। इस मौके पर जिलाधिकारी सुशील कुमार ने सभी विभागों को एकजुट होकर बच्चों के प्रति कार्य करने को कहा। उन्होंने आयोग की गाइड लाइन के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, आईसीडीएस समेत सभी जिम्मेदार विभागों को बच्चों के प्रति अपनी सकारात्मक कार्यवाही करने को कहा।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य वाचस्पति सेमवाल, सीडीओ रवनीत चीमा, सीएमओ डा. आरएस राणा, एएसपी हरीश वर्मा, कार्यक्रम अधिकारी एसके त्रिपाठी, एआरटीओ द्वारिका प्रसाद, जिला समाज कल्याण अधिकारी रतन सिंह रावल, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक हरेराम यादव, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक केएस रावत समेत  बाल समिति अधिकारों से जुड़ी समितियां के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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