udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news  उत्तराखण्ड में सडक़ न होने से सैकडों पर्यटक स्थल वीरान !

 उत्तराखण्ड में सडक़ न होने से सैकडों पर्यटक स्थल वीरान !

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

देहरादून। उत्तराखण्ड में पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं और सैकडों पर्यटक स्थल ऐसे हैं जो आज भी सडक़ से न जुड पाने के कारण वीराने में है। सरकार के पर्यटन मंत्री बडे-बडे दावे कर रहे हैं कि जापान, पेरिस की तर्ज पर उत्तराखण्ड का पर्यटन स्थापित किया जायेगा

 

लेकिन सरकार के यह दावे हवाबाजी में ही दिखाई दे रहे हैं क्योंकि कुमांऊ में दो हरीश व भ्राड्सर ऐसे ताल हैं जो बेहद मनमोहक हैं लेकिन आज तक कोई भी सरकार यहां तक सडक़ बनाने के लिए आगे नहीं आई जिसके चलते यह दोनो ताल सरकार की बेरूखी के चलते पर्यटकों के लिए बेगाने बने हुए हैं अगर सरकार 15 किलोमीटर सडक तक बनाने में फिस्ड्डी साबित हो रही है तो वह राज्य में क्या विकास कर रही होगी इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है।

 

उल्लेखनीय है कि सत्रह साल बीत गए सरकारें अपने पर्यटन स्थलों तक सडक़े नही पहुंचा पाए, पर्यटन से उत्तराखंड को रोजी रोटी मिलती है, चारधाम यात्रा न हो तो पूरा गढ़वाल सन्नाटे में आजायेगा, 2013 के बाद दो सालों में हम देख चुके है,भला हो आदि गुरु शंकराचार्य का जोकि चारधाम स्थापित कर गए और यहां पहाड़ो के लिए रोजी रोटी का प्रबंध कर गए,

 

उसके बाद चार मुख्यमंत्री यहां से यूपी में बने कुछ न कर सके उत्तराखंड के आप यशस्वी मुख्यमंत्री है कुछ तो आप करिये, पिछले सत्रह सालो में एक भी पर्यटन केंद्र सरकार नही विकसित कर सकी,यदि इस ओर ध्यान दिया होता तो पहाड़ो से पलायन न होता, सरकार को पता होगा कि राज्य की वोटर लिस्ट कहती है औसतन दो सौ से ज्यादा युवा नौकरी की तलाश में पलायन कर रहे है और सरकार पलायन आयोग बना रही है।

 

सवाल उठता है कि क्या सरकार सत्रह सालो में नैनीताल के ओखलकांडा इलाके में हरीश ताल तक सडक़ पहुंचा पाई है? मुश्किल से पंद्रह किमी की सडक़ बननी थी जो आज तक नही बना सकी। हाल ही में पलायन चिंतक रतन सिंह असवाल ने भ्राड्सर ताल का जिक्र किया सालो से ये ताल ऐसे ही विकास की राह ताक रहा है,

 

यहां सडक़ पहुंच गई होती तो ये हरकीदून इलाका रोजगार का जरिया बन गया होता ,सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के पास सडक़ विभाग है। हिमांचल के पहले मुख्यमंत्री पवार ने सबसे पहले एक ही काम किया था कि हर पर्यटन स्थल को धार्मिक स्थल को ,यहां तक कि हर विधायक के घर को चौड़ी सडक़ से जोड़ दिया,

 

आज हिमाचल तीर्थाटन से पर्यटन से सबसे ज्यादा कारोबार करता हैं, यहां तक कि अब हिमांचल ,सेब उद्यान पर्यटन शुरू कर चुका है,हमारा सेब माल्टा सडक़ो के अभाव में सड़ रहा है।

 

सरकार के मुखिया ने घोषणा की थी कि हर जिले में एक पर्यटन नया विकसित करेंगे क्या हुआ उसका? कहाँ तक पहुंची ये योजना? जरा अपने अफसरों से पूछ भी लीजिए? आल वेदर रोड बनेगी जब बनेगी आप नए झील स्थलों को, नए हिमालय दर्शन स्थलों तक तो अपनी चौड़ी सडक़े तो पहुंचाने का केंद्र जैसा टाइम टारगेट प्लान तैयार तो करवा सकते हैं ये ट्वीटर,फेसबुक,से पर्यटन नही बढऩे वाला, जरूरत सडक़ों की है,

 

ताकि पर्यटक गांवो तक पहुंच सके। पर्यटन मंत्री भले ही समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाकर अपनी ब्रांडिंग कर ले लेकिन हकीकत यह है कि उत्तराखण्ड में पर्यटन हवाबाजी में चल रहा है?

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •