udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news उत्तराखंड के देवी देवताओं ! आप जानो! सियासत का चेहरा और चरित्र !

उत्तराखंड के देवी देवताओं ! आप जानो! सियासत का चेहरा और चरित्र !

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” कहीं ” शीतकालीन सत्र ” में भी ” उम्मीदों पर बर्फ न गिर जाय !

उदय दिनमान डेस्कः उत्तराखंड विधान सभा का शीतकालीन विधान सभा सत्र शुरू होगा । ” भब्य तैयारियां पूरी हो चुकीं है । ” बारात ” की सेवा , आदर , सम्मान में कोई कमी न रह जाय इसके लिए ” सारे इंतजाम ” मुक्कमल कर दिये गये हैं । ” शीतकाल मे ” विधान सभा सत्र हो रहा है इसलिए ” माननीयों ” को ठंड न लगे इसके लिए पूरी ब्यवस्था है । विधायक निवास , मंत्री निवास में ” ब्लोअर ” लगाये गये हैं ताकि ” ठंठ लगने पर तापें।

अफसरों के लिए भी पूरे इंतजाम हैं। विधान सभा सत्र की खबर के नाम पर ” सिर्फ खबरों की ” पोर्टिंग हो ” ” रिपोर्टिंग न हो ” इसके लिए भी देहरादून से खबरों के ढुलानियों की ब्यवस्था की गयी है । शानदार होटल में उनके रहने की भी ब्यवस्था है । पहाड़ में रहकर पहाड़ जैसी पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को b p l श्रेणी में ही रखा जाय अर्थात ” सबि धाणि देरादूण ” की शैली में सरकार की नजर में ” काबिल ल्यख्वारों ” और झिलमिल पर्दे पर ” खबर ” दिखाने वालों की सेवा में चूक न रह जाय इसके लिए ” शीतकालीन सत्र ” की माफिक रिपोर्टिंग के लिए ” शीशी और रात्रि की दवाई ” की ब्यवस्था न की गयी हो , ऐसा हो नहीं सकता ।

” खैर अब बात असल मुद्दे की । क्या इस शीतकालीन सत्र में ” गैरसैण भरारीसैण स्थाई राजधानी के मसले पर कुछ होगा भी या नहीं ! सवाल कौंधतता भी है और कुलबुलाने भी लगा भी लगा है । हर तरफ सवाल ही नहीं उम्मीद भी हाथ उठा कर कह रही है ” राजधानी के मसले पर क्या होगा ! सियासत के उस्तादो !सवाल इस तरफवालों से भी और उस तरफ वालों से भी । पर जाने मन अभी से शसकिंत क्यों हो रहा है कि ” शीतकालीन सत्र ” में भी ” अन्य विषयों पर शोर सराबे , आरोप प्रत्यारोप की गर्माहट तो होगी । पर इस शीतकालीन सत्र में भी गैरसैण राजधानी के मसले पर बडी चालकी से बर्फ डाल दी जायेगी ।

सियासत दां ,(पक्ष विपक्ष . ) का डी एन ए कैसे राजधानी के मसले पर एक जैसा है । विधान सभा सत्र का परिणाम बता देगा । औपचारिकता के लिए सवाल इधर से भी दागे जायेंगे और बडी मुस्कुराहट से क्या उत्तर इधर से मिलेगा ये सभी जानते हैं।( भले ही दिखाने को ये भी कम गुस्सा नही दिखायेंगे ) । प्रश्नों की तीर इनके तरकश में भी हैं और प्रत्योत्तर मे छोडे जाने वाले जबाब के तीर इनके तरकश में भी हैं।

* 7 दिसंबर से 13 दिसम्बर तक चलने वाला इस सत्र असल अर्थों में चलेगा कितने दिन !? कितने घंटे देखने वाली बात होगी । विधान सभा सत्र के लिए आये माननीयों के सवाल तो आ गये हैं इन पर क्या उत्तर आते हैं यह तो विधान सभा के अंदर माननीय तत्सम्बधी मंत्री और सरकार ही बतायेगी । पर ” वो सवाल जो पिछले 17 सालों से जनता पूछ रही है कि ” उत्तराखंड का क्या होगा ? राजधानी का क्या होगा ? ये सवाल क्या ओंधे मुंह गिरेगा ? क्या इस सवाल का ” गला दबा कर इस शीतकालीन सत्र में बर्फ की ठंड में मार दिया जायेगा ?

गैरसैण में चौथे विधान सभा सत्र का साक्षी बनने के लिए जाऊंगा । अभी तक तो यही देखा कि ” कभी धूल उड़ा कर आये और धूल झोंककर ” सियासत देहरादून वापस लौटी । कभी ” अस्वस्थामा हतो हतो … की शैली में पूरा सच्च न बोलती सियासत देखी ।इस कभी न खत्म होने वाले ” नाटक चालू आहे ” को ही देखा है । ” चैतू . मंगसीरु . फजीतू , कमला . बिरमा ( आम उत्तराखंडी जन मानस नाम प्रतीक * ) को टपटप आंसू बहाते ही देखता हूं ।

इस बार क्या होगा ? काश मेरे भोगे हुये अनुभव और सत्य से साक्षात्कार न हो और ” वो सच्च ” हो जाय जो सब की आंखों में तैर रहा है ।* पर क्या होगा ” मेरे मन की आशंका भी बखूबी जानती है । इस शीतकालीन सत्र में भी उम्मीद और सपने बर्फ के नीचे दबकर मर न जांय।
“? खुदा खैर करे। उत्तराखंड के देवी देवताओं ! आप जानो । सियासत का चेहरा क्या चरित्र तो देख ही चुके हैं।

क्रांति भटृट वरिष्ठ पत्रकार की वाल से साभार

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