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उत्तराखंड: भूकंप के झटकों से थर्रायी देवभूमि, उत्तरकाशी था केंद्र !

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देहरादून: उत्तराखंड: भूकंप के झटकों से थर्रायी देवभूमि, उत्तरकाशी था केंद्र ! अति संवेदनशील उत्तराखंड में भूकंप ने लोगों को डरा दिया। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में  भूकंप के झटके महसूस किए गए.उत्तरकाशी जिले की गंगा और यमुनाघाटी में भूकंप के झटके महसूस होने से लोग दहशत में आ गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.0 मापी गई. इसका केंद्र उत्तरकाशी जिले में 10 किलोमीटर की गहराई पर था. फिलहाल इससे जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.

 

आपको बता दें कि इससे पहले 12 फरवरी को भी उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.2 मापी गई थी. वहीं, उत्तराखंड में 14 और 15 जून को भारी बारिश के आसार हैं. मौसम विभाग ने इसके मद्देनजर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. खास तौर से देहरादून, पौड़ी, नैनीताल और उधम सिंह नगर में भारी बारिश की चेतावनी है. इस दौरान 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के चलने की भी चेतावनी जारी की है. ऐसे में शासन और प्रशासन भी अलर्ट हो गया है.

 

उत्तराखंड भूकंप के दृष्टि से जोन आठ में है। यहां पहले भी बड़े भूकंप आ चुके हैं। उत्तरकाशी के लोग वर्ष 1991 में आए विनाशकारी भूकंप को अभी भूले नहीं हैं। उस दौरान करीब सात सौ लोगों की मौत हो गई थी। यहां हाल ही में छह जून को भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि उस दिन केंद्र टिहरी जनपद था, इसकी तीव्रता ज्यादा नहीं थी।

 

उत्तराखंड में भारी बारिश के चेतावनी दी गई है। 14 और 15 जून को भारी बारिश की आशंका हैं। मौसम विभाग ने इसके मद्देनजर अलर्ट जारी किया है। खास तौर पर देहरादून, पौड़ी, नैनीताल और उधम सिंह नगर में भारी बारिश की चेतावनी है। बता दें, इससे पहले 1 जून को उत्तराखंड में उत्तरकाशी, टिहरी समेत चार जगहों पर बादल फटा था।मौसम विभाग के मुताबिक, 14-15 जून को उत्‍तराखंड में भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के चलने की भी चेतावनी जारी की है। स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) की टीम को भी अलग-अलग जगह पर पहले से तैनात किया गया है।

 

बता दें कि जितना ज्यादा रेक्टर स्केल पर भूकंप आता है, उतना ही अधिक कंपन होता है. जैसे 7.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर जहां इमारतें गिर जाती हैं वहीं 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है.किसी भूकंप के समय भूमि के कंपन के अधिकतम आयाम और किसी आर्बिट्रेरी छोटे आयाम के अनुपात के साधारण गणित को ‘रिक्टर पैमाना’ कहते हैं. ‘रिक्तर पैमाने’ का पूरा नाम रिक्टर परिमाण परीक्षण पैमाना (रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल) है और लघु रूप में इसे स्थानिक परिमाण (लोकल मैग्नीट्यूड) है.

 

धरती की ऊपरी सतह सात टेक्टोनिक प्लेटों से मिल कर बनी है. जहां भी ये प्लेटें एक दूसरे से टकराती हैं वहां भूकंप का खतरा पैदा हो जाता है. भूकंप तब आता है जब इन प्लेट्स एक दूसरे के क्षेत्र में घुसने की कोशिश करती हैं, प्लेट्स एक दूसरे सेरगड़ खाती हैं, उससे अपार ऊर्जा निकलती है, और उस घर्षण या फ्रिक्शन से ऊपर कीधरती डोलने लगती है, कई बार धरती फट तक जाती है, कई बार हफ्तों तो कई बार कई महीनों तक ये ऊर्जा रह-रहकर बाहर निकलती है और भूकंप आते रहते हैं, इन्हें आफ्टरशॉक कहते हैं.

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