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बीस वर्ष बाद भी मूलभूत समस्याएं जस की तस!

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मूलभूल समस्याओं से जूझ रहे रुद्रप्रयाग विधानसभा के सैकड़ों गांव ,इस बार निर्दलीय प्रत्याशी को जीताने का निर्णय
रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग विधानसभा का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशियों ने काफी रोचक बना दिया है। क्षेत्रीय होने का पूरा लाभ प्रत्याशियों द्वारा उठाया जा रहा है। इस बार विधानसभा से जनता का ज्यादा रूझान निर्दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में देखा जा रहा है।दो बार भाजपा और एक बार कांग्रेस प्रत्याशी को जीताने के बाद भी मूलभूत समस्याएं खत्म न होने से जनता का मन निर्दलीय प्रत्याशी की ओर बन रहा है।

रुद्रप्रयाग जिला निर्माण के पूरे बीस वर्ष हो चुके हैं और रुद्रप्रयाग विधानसभा में मूलभूत समस्याएं आज भी जस की तस हैं। पेयजल, शिक्षा, दूर संचार, स्वास्थ्य और सड़क जैसी सुविधाओं के लिए ग्रामीण मोहताज बने हुए हैं। सबसे बड़ी समस्या क्षेत्र में पेयजल की है। दस वर्ष से अधिक का समय हो चुका है और भरदार पेयजल योजना का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है, जबकि जखोली विकासखण्ड के ऐसे सैकड़ों गांव हैं जहां पानी के लिए ग्रामीणों को तीन से चार किमी का पैदल सफर तय करना पड़ता है।

विकासखण्ड के अन्तर्गत गोर्ती गांव के ग्रामीण पेयजल के लिए दो किमी दूर चलकर पैदल आते हैं और पीठ के सहारे पानी ढोते हैं। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी पानी की स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। प्राकृतिक स्त्रोतों पर ग्रामीण जनता निर्भर है। क्षेत्र में स्वास्थ्य के लिहाज से एक अदद स्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं है, जहां मरीज अपना ईलाज करा सकें। कहने के लिए जखोली में स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की गई है, मगर सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। इसके अलावा उच्च शिक्षा के केन्द्र राजकीय महाविद्यालय जखोली में अध्यापकों और विषयों के न होने से छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले सड़को की भी बुरी स्थिति बनी हुई है, जबकि दूर संचार के लिए ग्रामीण पेड़ों और छतों का सहारा लेते हैं। जखोली विकासखण्ड में सौ से अधिक बूथ हैं और माना जाता है कि जिस प्रत्याशी को यहां से सबसे ज्यादा मत पड़ते हैं, वही चुनाव जीत लेता है। तीन बार के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र की जनता ने भाजपा प्रत्याशी मातबर सिंह कंडारी को दो बार विधायक बनाया, लेकिन श्री कंडारी ने रुद्रप्रयाग विधानसभा में अपना घर तक नहीं बनाया। वे कभी किसी गांव में अपना डेरा डाल देते थे तो कभी दूसरे गांव में अपना रैन बसेरा ढूंढ लेते थे। जब जनता का इनसे विश्वास हट गया तो वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ हरक सिंह रावत को कमान सौंपी और श्री रावत ने तो जनता को बीच मंझधार में ही छोड़ दिया।

साढ़े चार साल तक विधानसभा को संभालते-संभालते श्री रावत बागी बन गये और रुद्रप्रयाग जिला विधायकविहीन हो गया। तब से रुद्रप्रयाग विधानसभा की जनता में डॉ रावत के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है और इसी का नतीजा रहा कि वे बागी बनने के बाद एक बार भी अपनी विधानसभा में नहीं आये। जनता को वोट बैंक की राजनीति तक सीमित रखने से रुद्रप्रयाग विधानसभा के लोगों में राष्ट्रीय पार्टियांे के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है। उनका कहना है कि वे इस बार निर्दलीय प्रत्याशी को अपना मत देंगे। गोर्ती गांव की मीरा देवी ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टिंयों को जीताकर सब देख लिया है।

कांग्रेस ने जनता को बहुत बड़ा धोका दिया है। इस बार जिस महिला प्रत्याशी को कांग्रेस ने टिकट दिया है, वह महिलाओं का सम्मान नहीं कर रही है। गोर्ती गांव की महिलाएं दो से तीन किमी का सफर पैदल तय करके पीठ पर पानी ढोती हैं और कांग्रेस महिला प्रत्याशी द्वारा जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उरोली गांव से गोर्ती को आने वाले पानी को रोक दिया। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं में आक्रोश बना है। बरसिर गांव के मदन लाल ने कहा कि पिछले विधायक डॉ हरक सिंह रावत जनता को बेवकूफ बनाकर चले गये। आज गांव को जोड़ने वाली सड़क के बुरे हाल हैं और ग्रामीण जनता को सफर करने में भारी दिक्कतें उठानी पड़ रही है।

ग्रामीण चिरंजीवी सेमवाल, मानवीरेन्द्र बिष्ट, फूलदेई देवी, छात्र प्रतिमा नेगी, अरविंद रावत ने बताया कि पूर्व विधायकों ने क्षेत्र का कोई भी विकास नहीं किया है। बाहरी होने के कारण वे रुद्रप्रयाग विधानसभा की जनता के दुखदर्दों को कभी समझे ही नहीं। उन्होंने कहा कि इस बार क्षेत्रीय व्यक्ति को वोट दिया जायेगा, चाहे वो निर्दलीय प्रत्याशी क्यों न हो। 

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