udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news टॉप 50 एनपीए अकाउंट्स में बैंकों को लगेगी 2.4 लाख करोड़ की चपत!

टॉप 50 एनपीए अकाउंट्स में बैंकों को लगेगी 2.4 लाख करोड़ की चपत!

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

मुंबई। बैंकों को भारी-भरकम बैड लोन का मसला हल करने में काफी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह बात रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कही है। क्रिसिल की ऐनालिसिस में दिखाया गया है कि इनसॉल्वेंसी से जुड़ी प्रक्रिया के कारण हो सकता है कि बड़े कर्ज से दबी टॉप 50 कंपनियां अपने लोन न चुका पाएं और इन पर बकाया रकम का 60 पर्सेंट तक हिस्सा बैंकों को गंवाना पड़ सकता है। यह रकम लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये हो रही है।

 

इन स्ट्रेस्ड कंपनियों के कुल फंसे हुए लोन का एक चौथाई हिस्सा कंस्ट्रक्शन सेक्टर के नाम दर्ज है। ऐसा सबसे ज्यादा 30 पर्सेंट फंसा हुआ लोन मेटल सेक्टर की कंपनियों के नाम दर्ज है। वहीं पावर सेक्टर के खाते में ऐसा 15 पर्सेंट लोन है। बाकी हिस्सा दूसरी कंपनियों पर बकाया है।क्रिसिल रेटिंग्स के चीफ ऐनालिटिकल ऑफिसर पवन अग्रवाल ने कहा, हमने बैंकों को हो सकने वाले नुकसान का आकलन करने के लिए इकनॉमिक वैल्यू अप्रोच अपनाया। इसमें मार्केट वैल्यू मल्टिपल्स और कैश फ्लो के अनुमान के कॉम्बिनेशन का उपयोग किया गया।

 

हालांकि बैंकों को कितनी चपत लगेगी, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि लेंडर्स की अपेक्षा क्या है, सब्सिडियरीज का वैल्यूएशन कितना किया जाता है और कमोडिटी से जुड़े सेक्टरों के लिए प्राइस आउटलुक क्या है।किसी बैड लोन अकाउंट के रिजॉलूशन की प्रक्रिया में बैंकों को जो रकम नहीं मिलेगी यानी जो हेयरकट होगा, उसे क्रिसिल ने चार कैटिगरीज में बांटा है। ऐसा वर्गीकरण कंपनियों की हालत के आधार पर किया गया है। मार्जिनल, मॉडरेट, एग्रेसिव और डीप नाम से चार श्रेणियां बनाई गई हैं।

 

ऐनालिसिस में दिखाया गया है कि 60 पर्सेंट अकाउंट एग्रीगेट हेयरकट लेवल के तहत हैं। इसका अर्थ यह है कि ऐसे एकाउंट्स से लेंडर्स का परमानेंट लोन लॉस कुल बकाया रकम का आधा या तीन चौथाई तक हो सकता है।क्रिसिल ने एक नोट में कहा, इन एसेट्स पर अनुमानित नुकसान की मात्रा यह बता रही है कि मौजूदा कारोबारी माहौल में उन्हें कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उसने कहा, इनमें से कई एसेट्स अब कारोबारी लिहाज से अव्यावहारिक हो जाएंगी,

 

लिहाजा हो सकता है कि इधर-उधर से हल्के-फुल्के ढंग की रिस्ट्रक्चरिंग पर्याप्त नहीं होगी। बकाया कर्ज के जिन मामलों में बैंकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है, उनमें से ज्यादातर ऐसी कंपनियों से जुड़े हैं, जिनका बिजनेस चलाने लायक नहीं रह गया है। ऐसे में बकाया रकम वसूली के लिए उनकी संपत्ति को बेचना जरूरी हो गया है।

 

क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर रमेश करुणाकरण ने कहा, इनमें से कुछ एसेट्स दमदार क्रेडिट प्रोफाइल वाली कंपनियों के लिए विलय एवं अधिग्रहण के मौके मुहैया करा रही हैं। बैंकों ने इन लोन पर प्रोविजनिंग की ही है, लेकिन क्रिसिल की ऐनालिसिस संकेत दे रही है कि अभी करीब 20 पर्सेंट और प्रोविजनिंग की जरूरत पड़ सकती है।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •