थाईलैंड में रामायण है महाग्रन्थ और घर घर में हैं भगवान गणेश जी !

उदय दिनमान डेस्कः थाईलैंड में रामायण है महाग्रन्थ और घर घर में हैं भगवान गणेश जी !जी हां यह सत्य है। आप सोच रहे होंगे कि थाईलैंड के लोग तो बौध धर्म को मानते है और वहां रामयण और भगवान गणेश। आपको अजीब लग रहा होगा लेकिन यह सत्य है कि यहां के लोगों का महाग्रंथ रामायण ळै और यहां घर-घर में गणेश जी की पूजा होती है। आप खुद पढिए पूरी कहानी।

उल्लेखनीय है कि थाईलैंड और भारत का संबंध प्राचीन समय से रहा है. वहां मिले मंदिरों के अवशेष इसकी कहानी बयां करते हैं. थाईलैंड में भी रामायण का पाठ होता है, वहां रामायण को रामाकिन नाम से जाना जाता है, जो थाई भाषा में है और उसे महाग्रंथ का दर्जा मिला है. क्या बैंकॉक का पूरा नाम जानते हैं आप? यकीनन नहीं।

बैंकॉक का पूरा नाम है- क्रुंग देवमहानगर अमररत्नकोसिन्द्र महिन्द्रायुध्या महातिलकभव नवरत्नराजधानी पुरीरम्य उत्तमराजनिवेशन महास्थान अमरविमान अवतारस्थित्य शक्रदत्तिय विष्णुकर्मप्रसिद्धि. जी हां, ये नाम संस्कृति और पालि भाषा में है, जो भारत की प्राचीन भाषाएं हैं. इस नाम में ही थाईलैंड के प्राचीन वैभव और भारत से जुड़ाव का स्पष्ट पता चल जाता है.

थाईलैंड का मतलब फ्री लैंड होता है. थाईलैंड को पहले श्याम देश के नाम से जाना जाता था. कहते हैं कि थाईलैंड के लोग कभी किसी के अधीन नहीं रहे, इक्का-दुक्का थोड़े समय को छोड़कर. यहां जो लोग आए, यहीं के होकर रह गए.यूं तो थाईलैंड का हर कोना दर्शनीय है, पर फुकेट के कहने ही क्या. फुकेट में घूमने और मस्ती लायक तमाम जगहे हैं. जहां जाकर जिंदगी के मजे लिए जा सकते हैं. अगर आप फुकेट आए हैं, तो यहां से फी फी द्वीपों की यात्रा करना न भूलें.

यहां से फी फी द्वीप जाने के लिए स्पीड बोट से कुल 9 घंटे का समय लगता है. फी फी द्वीपसमूह में कुल 6 द्वीप आते हैं. जहां के नजारे बेहद शानदार हैं. यहां बीचों की अपनी खासियत है, तो समुद्र किनारों के दृश्य मनोहारी हैं.थाईलैंड में धार्मिक आस्था ज्यादा नजर आती है. वहां पर घरों और दुकानों के सामने छोटे-छोटे मंदिर दिखते हैं. भारत में जैसे घरों में तुलसी-चौरा होते हैं, वैसे ही वहां बुद्ध की प्रतिमा वाले छोटे-छोटे मंदिर होते हैं. वहां की पूजा परंपरा भारतीय परंपरा से मिलती-जुलती है.

भगवान बुद्ध के अनुयायी वाले देश में हिन्दू मंदिर भी काफी हैं. वहीं गणेश जी, शंकर-पार्वती और गरूड़ की प्रतिमाएं घरों और होटलों में दिखती हैं. बैंकाक में एक विशाल मॉल के सामने गणेश जी की प्रतिमा के सामने हिन्दुओं के साथ-साथ बौद्ध भी शीश नवाते दिखे. वहां भगवान की प्रतिमा के सामने दीये की जगह मोमबत्ती जलाने का चलन है.

धर्म के प्रति आस्था के चलते यहां दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार करने की परंपरा है. दुकानों में सामान की खरीदी के बाद दुकानदार ग्राहक को दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करते हैं. थाई में सुबह-सुबह अभिनंदन के लिए महिलाएं सबातीखा और पुरुष सबातीक्राप शब्द का इस्तेमाल करते हैं.थाई लोग बौद्ध धर्म को मानने वाले और आम तौर पर शांत स्वभाव के माने जाते हैं. थाईलैंड की 95 फीसदी आबादी बौद्ध धर्म को मानती है.

थाईलैंड पर प्रकृति का स्नेह खूब बरसा है. यहां मौसम हमेशा अच्‍छा रहता है. पूरी दुनिया में पाए जाने वाले जानवरों की प्रजातियों का दसवां हिस्सा थाईलैंड में पाया जाता है। यहीं सफेद हाथी मिलते हैं, जो दुनिया में कहीं नहीं मिलते.बैंकॉक में खासी गर्मी पड़ती है. ये दुनिया के सबसे गर्म शहरों में से एक है.

यहां अप्रैल माह में होली की तरह का त्योहार सोंगक्रन मनाया जाता है, हालांकि इसमें रंगों की तरह सिर्फ साफ पानी का ही इस्तेमाल होता है.थाई लोग अपने शरीर में माथे को सबसे ज्यादा पवित्र अंग मानते हैं. हृदय से भी अधिक. उनका मानना है कि व्यक्तित्व की असली झलक सिर्फ मस्तिष्क से ही मिलती है.

Sachchida Nand Semwal की फेसबुक वाल से साभार