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स्टार्टअप का कमाल: मटर पनीर से लेकर उपमा तक पका रहा रोबॉट !

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नई दिल्ली। बेंगलुरु की स्टार्टअप मैकेनिकल शेफ ने ऐसा रोबॉटिक किचन डिजाइन किया है, जो बिना इंसानी दखल के मटर पनीर से लेकर उपमा, सांभर, तूर दाल तडक़ा और बिसी बेले भात तक बना सकता है। यह रोबॉटिक किचन 20 से ज्यादा भारतीय व्यंजन बना सकता है।

इस स्टार्टअप का नेतृत्व माइक्रोसॉफ्ट के एक पूर्व मशीन लर्निंग रिसर्चर और टीम इंडस के चंद्र यान मिशन से जुड़े एक एयरोस्पेस इंजीनियर कर रहे हैं। इस रोबॉटिक किचन को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी से मिले फंड से तैयार किया गया है। यह अभी यूजर ट्रायल फेज से गुजर रहा है और जल्द ही कमर्शल प्रॉडक्ट के तौर पर इसके लॉन्च की उम्मीद की जा रही है। रोबॉटिक किचन का साइज एक बड़े माइक्रोवेव अवन जितना होगा।

मैकेनिकल शेफ के को-फाउंडर, के सुजय कार्लोस ने बताया, हम एक इंसान के दिन के 2 घंटे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे सबसे बड़े कस्टमर्स बैचलर्स या यंग कपल होंगे। इस किचन में सिर्फ एक बार सामान लोड करना होगा। इसके बाद का सारा काम रोबॉट और सॉफ्टवेयर करेंगे। कार्लोस ने कहा, भारतीय फूड पश्चिमी देशों के खान-पान से अलग है। यहां हर खाने में कम से कम तीन व्यंजन- दाल, चावल और सब्जी जरूर शामिल रहते हैं।

मैकेनिकल शेफ के दूसरे को-फाउंडर और एयरोस्पेस इंजिनियर अर्पित शर्मा ने बताया कि खाने के मेन्यू को एक प्रोग्राम बना कर इस रोबॉटिक किचन में फिट कर दिया गया है। इसमें कई फ्लेक्सिबल बॉक्सेज हैं जो खाना बनाते समय उसमें अलग-अलग तरह के पाउडर छिडक़ेंगे। इसमें लोगों को चावल या सब्जी जैसे फूड को खुद ही लोड करना होगा। इसके कई हिस्सों को आसानी से अलग किया जा सकता है, जिससे इसकी सफाई में आसानी होगी। हालांकि रोबॉटिक किचन का यह प्रयोग नया नहीं है।

अमेरिका के बोस्टन शहर में पिछले हफ्ते स्पाइस नाम से एक रेस्त्रां खुला है। इसमें मिलने वाले फूड को 9 फीट लंबे और 14 फीट चौड़े रोबॉटिक किचन की सहायता से बनाया जाता है। इस किचन को एमआईटी के 4 इंजिनियर ने डिजाइन किया है। मॉली रोबॉटिक्स नाम की एक ब्रिटिश कंपनी भी पूरी तरह ऑटोमेटेड कुकिंग रोबॉट को बना चुकी है। भारत में भी बेंगलुरु के रहने वाले दो इंजिनियर्स- राघव गुप्ता और रोहिन मल्होत्रा ने जूलिया नाम से कुकिंग पॉट बनाया था, जो 20 मिनट में भारतीय फूड तैयार कर सकता था।

हालांकि, भारत में रोबॉटिक किचन के इस विचार से सभी प्रभावित नहीं है। बेंगलुरु के प्रसिद्ध दर्शिनी रेस्टोरेंट के संस्थापक आर प्रभाकर ने कहा कि रोबॉटिक किचन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारतीय स्वाद के मुताबिक फूड बनाना है। उन्होंने कहा, भारत में हर 100 किलोमीटर पर खाने का स्वाद बदल जाता है। रोबॉटिक किचन खाने को एक प्रोग्राम की सहायता से बनाएगा। इसका मतलब यह है कि इसके स्वाद में कभी किसी तरह का बदलाव नहीं आएगा। ऐसे में इसके सामने अलग-अलग स्वाद के लोगों के मुताबिक खाना तैयार करने की चुनौती होगी।

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