सोशल मीडिया: आमजन के हथियार *फेसबुक* पर राजनीतिक कुदृष्टि !

संतोष *सप्ताशु*

उदय दिनमान डेस्कः सोशल मीडिया: आमजन के हथियार *फेसबुक* पर राजनीतिक कुदृष्टि ! 21 सदी में अगर फेसबुक बंद हो गया तो यह आमजन की सबसे बड़ी हार होगी। क्योंकि फेसबुक ने आमजन को एक ऐसा सोशल हथियार दिया था जिसके सामने राजा से लेकर रंक तक सभी थर-थर कापते थे। क्योंकि यह आमजन की पहुंच में था। आज राजनैतिक कुदृष्टि फेसबुक पर पड़ गयी है और फेसबुक राजनीतिक कुदृष्टि का शिकार होने वाला है। ऐसा विशलेषकों का मानना है।यह कहे कि  फेसबुक पर संकट के बादल छा गए है तो इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

 

इंटरनेट की दुनिया में अगस्त 2005 में एक नयी क्रांति का उदय हुआ वह थी 21 सदी के लोगों के लिए नयी क्रांति के रूप में फेसबुक; इसके माध्यम से आप अपने मित्रोंए परिवार के लोगों और अन्य परिचितों से जुड़ें फ़ोटो और वीडियो साझा  संदेश और अपडेट पाने के साथ अपनी बात बिना डरे हुए रखने में पहला प्रयास था और देखते ही देखते फेसबुक ने पूरी दुनिया में एक ऐसा अपनो से अपनों का मिलाने का जाल फैलाया कि दुनिया इसकी दीवानी हो गयी और इसे आमजन ने अपना हथियार बना लिया। इस हथियार से राजा से लेकर रंक तक सभी चौकन्ने हो गए। यह कहे कि पजातंत्र का चौथा स्तंभ आम जन के हाथ का हथियार बन गया तो इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। लेकिन यह अब राजनीतिक कुचक्र में फस गया है। अर्थात फेसबुक खतरे में है।

 

5 करोड़ उपयोक्ताओं का जानकारी का दुरुपयोग,  ब्रिटेन और अमेरिका में शुरू हुई जांच !

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की संसद के बाद अब अमेरिका में भी उसके खिलाफ इस संबंध में जांच शुरू हो गई है। अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार अमेरिका में उपभोक्ता एवं प्रतिस्पर्धा नियामक संघीय व्यापार आयोग ने इस जांच की शुरुआत की है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 2016 का चुनाव अभियान देख रही ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने फेसबुक के 5 करोड़ उपयोक्ताओं से जुड़ी जानकारियों का दुरुपयोग किया था। इस मामले के सामने आने के बाद फेसुबक को वैश्विक स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

 

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की संसद ने इसे लेकर फेसुबक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को पेश होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। इसके बाद अब अमेरिका में भी सांसदों ने जुकरबर्ग को कांग्रेस के सामने पेश होने को कहा है।अमेरिकी अखबार दी न्यूयॉर्क टाइम्स तथा ब्रिटिश अखबार ऑब्जर्वर की संयुक्त जांच के अनुसार, कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक के 5 करोड़ उपयोक्ताओं की जानकारियों के आधार पर लोगों की मानसिकता का प्रोफाइल तैयार किया था।

 

कंपनी ने इसके लिए व्यक्तित्व संबंधी आकलन बताने वाले एक एप का इस्तेमाल किया था जिसे 2.70 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। कंपनी ने डाउनलोड करने वाले लोगों तथा उनकी मित्रसूची के लोगों की जानकारियों का इस्तेमाल किया था। उसका लक्ष्य अमेरिकी मतदाताओं के व्यवहार का अनुमान लगाना था।आज के दौर में जिस प्रकार से फेसबुक ने अपनी अलग पहचान बनायी और आमजन तक पहुच बनायी वह आने वाले दिनों में खतरे का संकेत दे रही है। कई लोगों का मानना है कि फेसबुक पर राजनीतिक कुदृष्टि पड़ गयी है इसलिए इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

 

एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा

फेसबुक (अंग्रेज़ी:Facebook) इंटरनेट पर स्थित एक निःशुल्क सामाजिक नेटवर्किंग सेवा है, जिसके माध्यम से इसके सदस्य अपने मित्रों, परिवार और परिचितों के साथ संपर्क रख सकते हैं। यह फेसबुक इंकॉ. नामक निजी कंपनी द्वारा संचालित है। इसके प्रयोक्ता नगर, विद्यालय, कार्यस्थल या क्षेत्र के अनुसार गठित किये हुए नेटवर्कों में शामिल हो सकते हैं और आपस में विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इसका आरंभ 2004 में हार्वर्ड के एक छात्र मार्क ज़ुकेरबर्ग ने की थी। तब इसका नाम द फेसबुक था। कॉलेज नेटवर्किग जालस्थल के रूप में आरंभ के बाद शीघ्र ही यह कॉलेज परिसर में लोकप्रिय होती चली गई। कुछ ही महीनों में यह नेटवर्क पूरे यूरोप में पहचाना जाने लगा।

 

अगस्त 2005 में इसका नाम फेसबुक कर दिया गया। फेसबुक में अन्य भाषाओं के साथ हिन्दी में भी काम करने की सुविधा है।फेसबुक ने भारत सहित 40 देशों के मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से समझौता किया है। इस करार के तहत फेसबुक की एक नई साइट का उपयोग मोबाइल पर निःशुल्क किया जा सकेगा। यह जालस्थल फेसबुक का पाठ्य संस्करण है। भारत में रिलायंस कम्युनिकेशंस और वीडियोकॉन मोबाइल पर यह सेवा प्रदान करेंगे। इसके बाद शीघ्र ही टाटा डोकोमो पर भी यह सेवा शुरू हो जाएगी। इसमें फोटो व वीडियो के अलावा फेसबुक की अन्य सभी संदेश सेवाएं मिलेंगी।

 

मित्रों और परिचितों की एक अंतहीन श्रृंखला

फेसबुक का उपयोग करने वाले अपना एक प्रोफाइल पृष्ठ तैयार कर उस पर अपने बारे में जानकारी देते हैं। इसमें उनका नाम, छायाचित्र, जन्मतिथि और कार्यस्थल, विद्यालय और कॉलेज आदि का ब्यौरा दिया होता है। इस पृष्ठ के माध्यम से लोग अपने मित्रों और परिचितों का नाम, ईमेल आदि डालकर उन्हें ढूंढ़ सकते हैं। इसके साथ ही वे अपने मित्रों और परिचितों की एक अंतहीन श्रृंखला से भी जुड़ सकते हैं। फेसबुक के उपयोक्ता सदस्य यहां पर अपना समूह भी बना सकते हैं। यह समूह उनके विद्यालय, कॉलेज या उनकी रुचि, शहर, किसी आदत और जाति का भी हो सकता है। समूह कुछ लोगों का भी हो सकता है और इसमें और लोगों को शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया जा सकता है। इसके माध्यम से किसी कार्यक्रम, संगोष्ठी या अन्य किसी अवसर के लिए सभी जानने वालों को एक साथ आमंत्रित भी किया जा सकता है।

 

फेसबुक ने 2008 में अपना आवरण रूप बदला

इस जालस्थल पर अपनी रुचि, राजनीतिक और धार्मिक अभिरुचि व्यक्त कर समान विचारों वाले सदस्यों को मित्र भी बना सकते हैं। इसके अलावा भी कई तरह के संपर्क आदि जोड़ सकते हैं। साइट के विकासकर्त्ता भी ऐसे कई कार्यक्रम तैयार करते रहते हैं, जिनके माध्यम से उपयोक्ता अपनी रुचियों को परिष्कृत कर सकें। फेसबुक में अपने या अपनी रुचि के चित्र फोटो लोड कर उन्हें एक दूसरे के साथ बांट भी कर सकते हैं। ये चित्र मात्र उन्हीं लोगों को दिखेंगे, जिन्हें उपयोक्ता दिखाना चाहते हैं। इसके लिये चित्रों को देखनेका अनुमति स्तर निश्चित करना होता है। चित्रों का संग्रह सुरक्षित रखने के लिए इसमें पर्याप्त जगह होती है। फेसबुक के माध्यम से समाचार, वीडियो और दूसरी संचिकाएं भी बांट सकते हैं। फेसबुक ने 2008 में अपना आवरण रूप बदला था।

 

फेसबुक अब ट्रू ब्लड, अमेरिकन आइडल और टॉप गियर के अभियानों में शामिल

अप्रैल 2011 में, फेसबुक ने फेसबुक पर ब्रांड प्रोन्नति के विकास में मदद करने के लिए विपणक और रचनात्मक एजेंसियों के लिए एक नया पोर्टल लॉन्च किया। फरवरी 2010 में “प्रभावकारी शिखर सम्मेलन” में फेसबुक के शीर्ष अधिकारियों से मिलने के लिए ब्रिटिश विज्ञापन नेताओं के एक समूह का चयन करके आमंत्रित किया गया।फेसबुक अब ट्रू ब्लड, अमेरिकन आइडल और टॉप गियर के अभियानों में शामिल है।सामाजिक नेटवर्किंग सेवा  सामाजिक प्रभाव, इंटरनेट का सामाजिक प्रभाव  सामाजिक नेटवर्किंग और मनोरंजन, और सामाजिक राजधानी।

 

परिवार के सदस्यों और दोस्तों को फिर से मिलाता

फेसबुक ने विभिन्न तरीकों से लोगों के सामाजिक जीवन और गतिविधि को प्रभावित किया है।फेसबुक, कंप्यूटर, या मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले लोगों को मित्रों, रिश्तेदारों और अन्य परिचितों के संपर्क में लगातार बने जब तक कि इंटरनेट तक पहुंच हो।यह खो दिया परिवार के सदस्यों और दोस्तों को फिर से मिलाता है।यह उपयोगकर्ताओं को विचारों को व्यापार करने की अनुमति देता है, स्थानीय या वैश्विक विकास के साथ सूचित रखता है। फेसबुक से सामाजिक प्रभाव इतना बदल गया है कि लोग कैसे संवाद करते हैं।ई-मेल के जरिए दूसरों को उत्तर देने की बजाय फेसबुक उपयोगकर्ताओं को दूसरों को सामग्री प्रसारित या साझा करने की अनुमति देता है, और इस प्रकार दूसरों को संलग्न करने या दूसरों के पदों के साथ जुड़ा हुआ है।

 

इस आलेख के लिए विभिन्न स्रोतो से जानकारी एकत्र कर इसे संपादित किया गया है

 

 

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