udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news सूदूरवर्ती हिमालयी गांव घेस से निकला प्रदेश के विकास का नया मॉडल!

सूदूरवर्ती हिमालयी गांव घेस से निकला प्रदेश के विकास का नया मॉडल!

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उदय दिनमान डेस्कः सूदूरवर्ती हिमालयी गांव घेस से निकला प्रदेश के विकास का नया मॉडल! जी हां इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी अगर प्रदेश में घेस के काश्तकारों से लोग अगर सीखे और जैसा वह कर रहे हैं वैसा करें तो प्रदेश के खासकर पहाडी जनपदों से युवाओं का पलायन ही नहीं करना पडेगा। सरकार के सहारे बैठने से अच्छा है कि सभी घेस के ग्रामीणों से जीवन को जीने का तरीका और अपनी आर्थिकी बढाने का सभी तरीका सीखे तो प्रदेश के लिए और हम सभी के लिए यह संजीवनी का काम करेगा।

 

उत्तराखंड राज्य के चमोली जनपद में स्थित घेस बधाण क्षेत्र में मैं तब गया था जब में एक दैनिक अखबार के लिए वर्ष 2000 में रिपोटिंग करता था। उस समय यहां पहुंचना पहाड के समान था अर्थत संसाधनों की कमी के बावजूद वहां पहुंचा और वह गांव क्षेत्र आज दिन तक मुझा याद है।

 

भाई अजून की फेवबुक वाल पर इसके बारे में पढ तो इसे हूबहू प्रस्तुत करने का मन किया। क्योंकि इस क्षेत्र के लोग उस दौर में भी सक्षम थे और आज जो मिशाल गांव वालों ने स्वरोजगार के लिए पहल की वह काबिले तारीफ के साथ प्रदेश में बढते पलायन को रोकने के साथ युवाओं के लिए एक सीख और प्रदेश के विकास के लिए सकारात्मक है। यहां भाई अर्जून का वह लेख कुछ अंशों का काटकर हूबहू दिया जा रहा है।

मूल आखेल यहां से पढे-

प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ने जनपद चमोली के विकासखंड देवाल के सीमांत गांव घेस घाटी के हिमनी का भ्रमण कर घाटी की मेहनतकश जनता को उनके प्रयास के लिए उत्साहवर्धन किया। अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर मुख्यमंत्री जी इस सीमांत गांव में करीब सवा 2 घंटे किसानों के बीच गुजारे। और उन्होंने गांव के लोगों के प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना की। अवसर था घेस घाटी के गांव में घेस, हिमनी व बलाण मैं नकदी फसलों के एक सफल मॉडल को देखने का।

इस घाटी के मेहनतकश लोगों ने पिछले 2 वर्षों में इस क्षेत्र से मटर की खेती का एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जिससे किसानों की आय बहुत तेजी से बढ़ रही है। किसानों की आय बढ़ेगी सीमांत क्षेत्रों में पलायन की विकराल होती जा रही समस्या से निपटने में आसानी होगी। नकदी फसलों के रूप में विकास का यह मॉडल  मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में ही 2015 में प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ था तब मुख्यमंत्री जी ने सरकार में नहीं होने के बावजूद इस क्षेत्र में गहरी दिलचस्पी दिखाई थी।

 

उन्होंने बनारस के सुरेश भाई पप्पू जी को मुझ से मिलवाया और कहा कि अर्जुन भाई यह सुरेश भाई बहुत काम के आदमी हैं और इनको अपने क्षेत्र में ले जाइए और देखिए कुछ कर सको तो लोगों का भला होगा। उसके बाद सुरेश भाई को लेकर मैं चला घेस। कई दौरे हुए, मटर की फसल को टेस्ट किया गया और टेस्ट में वह बीज पूरी तरह सफल पाया गया। उसके बाद बारी थी उसे जमीन पर उतारने की।

लोगों से कई राउंड की मीटिंग की उन्हें समझाया कि आप यह नई फसल लगा कर देखिए इसमें आपको बहुत फायदा होगा लोग विश्वास करने को तैयार नहीं थे लेकिन बहुत समझाने बुझाने के बाद लोगों ने कुछ परंपरागत फसलों को ड्रॉप करके पहली बार 2016 में मटर की फसल बोई। पहले साल अपेक्षाकृत ठीक रिजल्ट निकला और घेस व हिमनी के लोगों ने करीब 7 से 8 लाख रूपए की मटर पैदा की।

 

बस यही यही इसका टर्निंग पॉइंट था। किसानों ने स्वयं अपने खेतों का आकलन करके फसलों के लाभ का मूल्यांकन भी शुरू कर दिया। उन्होंने पाया कि जितना लाभ मटर की फसल में मिल रहा है अन्य किसी भी फसल में नहीं था ऐसे में उन्होंने अगले वर्ष यानी कि इस वर्ष और बड़े पैमाने पर मटर की खेती करने का निर्णय लिया।

 

इस महा अभियान में घेस निवासी पुष्कर सिंह और मेहरवान सिंह ने बहुत सहयोग किया। नतीजा यह हुआ कि इस वर्ष घाटी के तीन गांवों घेस, हिमनी व बलाण के लोगों ने बड़े पैमाने पर मटर की नकदी फसल लगायी। लोगों की मेहनत का ही परिणाम था कि  मुख्यमंत्री हिमनी पहुंचे।

मुख्यमंत्री जी ने यहां कई घोषणाएं की।
१- घाटी के सभी गांवों के लाेगों को अभी लांच हुए बिजली का १२ हजार रुपये का किट मुफ्त में मिलेगा तथा ग्रिड से बिजली देने के लिए भी कार्यवाही होगी।
२- घेस वन विश्राम गृह का उच्चीकरण होगा। इससे पर्यटकों को सुविधा होगी।
३- घेस में फसलों के भंडारण की व्यवस्था होगी।
४- घेस में कृषि यंत्र बैंक खुलेगा।
५- राइका घेस में शिक्षकों की कमी पूरी होगी।
६- बैलून आधारित पहला मोबाइल टावर हिमनी में लगेगा।
६- बलाण गांव में मेडिकल की टीम भेजकर दांत गिरने की समस्या की पड़ताल होगी।

साभार-Arjun Bisht Ghes Wale जी की फेसबुक वाल से साभार व आंशिक संसोधित

 

Loading...

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •