सियाचिन बॉर्डर के पास चीन ने बनाई शक्सगम घाटी में 36 किमी लंबी सडक़

बीजिंग । चीन भारतीय सीमा के नजदीक सडक़ों के निर्माण से बाज नहीं आ रहा है. भारत कई बार अपना विरोध दर्ज करा चुका है. पिछले साल डोकलाम विवाद का अभी पूरी तरह कोई हल नहीं निकला है. ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, चीन ने शक्सगम घाटी से सियाचिन के पास 36 किलोमीटर लंबी सडक़ का निर्माण कर लिया है. इस सडक़ पर दो पोस्ट भी बनाई गई हैं. एक पोस्ट पाक अधिकृत कश्मीर के शक्सगम घाटी में और दूसरी इससे 20 किलोमीटर दूर बनाई है.

शक्सगम घाटी में 36 किमी सडक़
रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सडक़ से चीन भारतीय सीमा में सीधी एंट्री मारने की फिराक में है. हालांकि भारत ने इस ताजा निर्माण पर चीनी सरकार को अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है. डोकलाम विवाद के बाद भारत ने कड़ा विरोध जताया तो ऐसा लग रहा था कि चीन शांत हो गया है. लेकिन बाहर से शांत दिखाई देने वाले ड्रेगन ने दूसरे रास्ते से चोरी छिपे एक बड़ी सडक़ ही तैयार कर ली. और इस सडक़ के बारे में कानोंकान किसी को खबर तक नहीं लगने दी. सैटलाइट से हासिल तस्वीरों से हरकत में आए रक्षा अधिकारियों में हडक़ंप मचा हुआ है.

अप्रैल में रक्षा मंत्री करेंगी चीन का दौरा
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह अगले महीने चीन की यात्रा पर जाएंगी. डोकलाम गतिरोध के बाद दोनों देशों बीच संबंधों में आए तनाव के मद्देनजर यह एक अहम यात्रा होगी. रक्षा मंत्री ने अपनी चीन यात्रा पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘हां, यात्रा संभवत: अप्रैल के आखिर में कभी होगी.’

जून में पीएम मोदी जाएंगे चीन
खासबात यह है कि जून में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन जाएंगे. 9-10 जून को चीन के किंगदाओ शहर में एससीओ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात होगी. इस मुलाकात से पहले भारत और चीन के अधिकारी कई दौर की बैठकें करेंगे. चर्चा है कि पीएम मोदी चीन में सडक़ निर्माण के मुद्दों को उठा सकते हैं.

डोकलाम में बनाई सडक़
चीन ने विवादित स्थल को छोड़ दूसरे रास्ते से दक्षिण डोकलाम तक पहुंचने के लिए सडक़ बना ली है. ये सडक़ भारतीय चौकियों से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर है, जो भारतीय सुरक्षा के लिए खतरा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन के ऐसा करने के पीछे की एक खास वजह थी. डोकलाम तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ चुकी थी और सर्दियों में उसने वहां सडक़ का निर्माण कार्य भी कर दिया. जो अब सैटेलाइट इमेज के जरिए साफ दिखाई दे रही हैं. चीन की ये नई सडक़ भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है.

बनाई चौकियां, तैनात किए सैनिक
बता दें कि डोकलाम इलाके में चीन की ओर से लगातार निर्माण कार्य किया जा रहा है. चीन इस इलाके में तेजी से नई चौकियों, हेलीपैड आदि का निर्माण कर रहा है. जानकारों की मानें तो उत्तर डोकलाम पर चीन का एक तरह से कब्जा हो गया है. यहां उसने चौकियों स्थापित करने के साथ ही अपने सैनिकों को भी तैनात कर दिया है.

पाकिस्तान ने चीन को गिफ्ट में दी शक्सगम घाटी
ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट यानी शक्सगम घाटी कश्मीर के उत्तरी काराकोरम पर्वतों में शक्सगाम नदी के दोनों ओर फैली हुई है. यह भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा हुआ करता थी जिसे 1948 में पाकिस्तान ने अपने नियंत्रण में ले लिया. 1963 में एक सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने इस क्षेत्र (5180 वर्ग किमी.) को चीन को भेंट कर दिया. पाकिस्तान की दलील थी कि इस से पाकिस्तान और चीन के बीच में मित्रता बन जाएगी.

भारतीय राजदूत ने दिए थे संकेत
शनिवार को चीन में भारतीय राजदूत ने आगाह किया था कि भारत-चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश से डोकलाम जैसा एक और संकट उत्पन्न हो सकता है. लेकिन उनका कहना है कि डोकलाम गतिरोध क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं आया है. हालांकि, पीएलए संवेदनशील इलाके से काफी दूरी पर अपने सैनिकों का जमावड़ा कर सकता है. उन्होंने संकट के लिए चीन को दोष देते हुए कहा कि उसने यथास्थिति बदलने की कोशिश की जिससे यह गतिरोध उत्पन्न हुआ.

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