udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news दिखावा : अमीरों के लिए स्टेटस सिंबल बने पर्सनल बॉडीगार्ड !

दिखावा : अमीरों के लिए स्टेटस सिंबल बने पर्सनल बॉडीगार्ड !

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नई दिल्ली। स्टेटस से समझौता नहीं करने वाले इंडियंस को कुछ मेड इन इंडिया एसेसरी खूब पसंद आती हैं। ये मॉल, सिनेमा हॉल, पार्टी, क्लब, वेडिंग, हॉलिडे पर हर जगह नजर आती हैं। खास एसेसरी के लिए आपको अधिक कीमत भी चुकानी पड़ती है। इसे जो चाहे कह लें, बॉडीगार्ड या बाउंसर या पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स, दिखावा करने वालों या जरूरतमंदों की एसेसरी लिस्ट में ये सबसे ऊपर हैं।

 

इंडिया में इन दिनों निजी सुरक्षा लोगों के लिए समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली बात हो गई है। राजनेता और ऑफिशियल वीआईपी अपनी एक्स, वाई, जेड क्लास सिक्योरिटी के लिए कुछ भी करने को तैयार होते हैं। ऐसे में पब्लिक भी किसी वजह से पर्सनल सिक्योरिटी चाहे तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है? भले ही पर्सनल सिक्योरिटी में खाकी वाले या सफारी सूट वाले ना हों।

 

इनसे रुतबा तो बढ़ता ही है। सेंट्रल दिल्ली के खान मार्केट को ही ले लें। अगर आपके लिए आपकी गाड़ी का दरवाजा या स्टोर का गेट कोई भारी-भरकम शख्स नहीं खोलता तो वहां के दुकानदार आपको भाव क्यों देंगे? लग्जरी मॉल्स में भी ऐसा होता है। वहां आपने जो सामान खरीदा है, उसे ढोने वाला साथ हो तो स्टेटस बढ़ता है।

 

पर्सनल बाउंसर होने से दिल्ली के बाहरी इलाकों में बने फार्म हाउस की पार्टीज, वेडिंग्स में आपका रुतबा बढ़ जाता है, जब ये वहां अप्वाइंट बाउंसर्स के बीच आपको तहजीब से अंदर ले जाते हैं। ये पीएसओ मॉल, एटीएम और रेजिडेंशियल कॉलोनी में औसत कद काठी के दुबले पतले, ऊटपटांग यूनिफॉर्म में अनट्रेंड सिक्योरिटी पर्सन जैसे नहीं होते।

 

ब्रांडेड बाउंसर्स और बॉडीगार्ड मुहैया कराने वाली लीडिंग कंपनियों के मुताबिक उनके यहां सभी ट्रेंड और एक्स कमांडो या दूसरे स्पेशल फोर्सेज के लोग होते हैं। कुछ लोगों के पास ऑल इंडिया गन लाइसेंस भी होता है।कंपनियां जिम में तराशे बदन वाले बाउंसर्स को हायर करती हैं, जिन्होंने सलमान खान और विराट कोहली जैसे सेलेब्स के साथ काम किया होता है।

 

सेलेब्रिटीज के साथ उनकी करीबी से उनका आकर्षण बढ़ता है और यह उनकी हाई फाइव फिगर सैलरी को सही ठहराता है। एक सिक्योरिटी कंपनी के ओनर ने बताया, हमारे बाउंसर और बॉडीगार्ड न सिर्फ पर्सनल सिक्योरिटी मुहैया कराते हैं बल्कि मेल और फीमेल दोनों ही अपने क्लाइंट के बैग भी कैरी करते हैं। ये लोग तीन साल से ज्यादा समय से काम कर रहे मौजूदा एंप्लॉयी की सिफारिशों पर ही रखे जाते हैं। उनका कहना है कि भरोसा बेशकीमती होता है।

 

कुछ क्लाइंट्स को दिखावे से ज्यादा किसी और चीज के लिए उनकी जरूरत होती है। वैसे इंडिया में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति से कौन वाकिफ नहीं है। कुछ लोग दूसरी वजहों से भी इनकी सर्विस लेते हैं। चाहे जो भी बाउंसर बिजनेस दिन दूनी रात चौगनी तरक्की कर रहा है।

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •