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सतपाल की सफलता की उम्मीद ने मचाई धूम

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युवा लेखक सतपाल ने निकाली अपनी चौथी पुस्तक ,पिता के छोड़ने के बाद भी कभी नहीं मानी हार, मजदूरी और पेटिंग से परिवार को संवारा

रुद्रप्रयाग। कहते हैं अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। मेहनत और कर्म से रास्ते भी स्वयं बनने लगते हैं। ऐसी ही रुद्रप्रयाग जनपद के पिंगलापानी निवासी सतपाल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से न केवल नाम कमाया, बल्कि अपने परिवार का लालन पालन भी कर रहे हैं।

 

युवा लेखक सतपाल लेखनी के साथ ही पेंटिंग का काम भी करते हैं, जिससे वे अपनी पुस्तकों का प्रकाशन करवा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी चौथी पुस्तक ”सफलता की उम्मीद“ निकाली है, जिसे पाठकों द्वारा सराहा जा रहा है। विकासखण्ड अगस्त्यमुनि के पिंगलपानी (कणसिली) निवासी 22 वर्षीय सतपाल के पिता उसकी मां और चार भाई-बहिनों को रोता-बिलखते हुए बारह वर्ष पूर्व छोडकर चले गये, जिसके बाद घर का सबसे बड़ा भाई होने के नाते सतपाल ने अपने परिवार के लालन-पालन के साथ ही अपने भाई-बहिनों को पढ़ाया और लिखाया।

 

बचपन में जब घर की स्थिति ठीक न होने पर सतपाल ने मजदूरी का काम भी किया और एक दिन उसके सपने में सरस्वती मां आई। जिसके बाद उसने लेखनी में ध्यान केन्द्रित किया और धीरे-धीरे सतपाल ने पेंटिंग का काम शुरू कर दिया, जिसके बाद घर का सारा खर्चा उठाने लगे। सतपाल की पेटिंग की क्षेत्र में तारिफ होने लगी और हर कोई अपने कार्य के लिए उसे बुलाने लगे। जब सतपाल 12वीं में पढ़ता था तो अपनी मेहनत के बलबूते सतपाल ने पहली गढ़वाली कविता संग्रह म्येरू प्रयास प्रौत्साहन आपॉ का प्रकाशन किया।

 

इस किताब में लिखी गई सभी कविताएं पाठकों को भाने लगी और सतपाल का नाम होने लगा। सतपाल ने साहित्यिक गतिविधियों में भी खासी रूचि दिखाई। सामुदायिक रेडियो मंदाकिनी की आवाज पर उनकी हिन्दी एवं गढ़वाली कविताएं प्रसारित होने लगी। इसके बाद उन्होंने बीए प्रथम वर्ष में पढ़ाई के दौरान हिन्दी कविता संग्रह उम्मीद की किरण का प्रकाशन किया।

 

यह कविता संग्रह भी पाठकों को भा गई। धीरे-धीरे सतपाल जिले में एक पहचान बन चुका है। हरकोई उसकी लेखनी का कायल होने लगा। युवा लेखक सतपाल ने फिर हिन्दी गद्य-पद्य संग्रह संघर्ष के फूल को प्रकाशित किया। इस किताब के प्रकाशन के बाद लेखक सतपाल सबके दिलों पर राज करने लगे। हाल ही में उन्होंने अपनी चौथी पुस्तक निकाली है, जिसका नाम सफलता की उम्मीद है। यह कविता संग्रह भी लोगों के दिलो दिमाग पर छाने लगी है।

 

उनकी लेखनी से प्रभावित सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मान से भी नवाजा। अभी तक उन्हें कलश ट्रस्ट द्वारा स्वामी सच्चिदानंद स्मृति सम्मान, विश्वनाथ सेवा संगठन, जीवन निर्माण एजुकेशन की ओर से मुकुंद साहित्य सम्मान एवं जिला की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अपनी लेखनी से पाठकों को आकर्षिक करने वाले युवा लेखक सतपाल की जल्द ही मधुर रस हिन्दी कविता संग्रह, उमाल गढ़वाली संग्रह भी पाठकों के बीच प्रस्तुत होगी।

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