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सरकार ने 2005 में किया था मिताली से वादा अभी तक है पूरा होने का इंतजार

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हैदराबाद । महिला वर्ल्ड कप 2017 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम स्वदेश लौट चुकी है। इस टूर्नमेंट की उपविजेता बनने के बाद टीम को देश भर से सम्मान और बधाइयां मिल रही हैं। लेकिन टीम इंडिया की कैप्टन मिताली राज को उनके गृह राज्य तेलंगाना से अभी तक न तो कोई प्रशंसा मिली है और न ही उनके प्रदर्शन के बाद किसी तरह के इनाम की घोषणा की गई है।

 

इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि आंध्र प्रदेश सरकार ने मिताली को 500 यार्ड्स जमीन देने का वादा 2005 में किया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका है।34 वर्षीय मिताल राज ने 16 साल की उम्र में इंटरनैशनल क्रिकेट में पदार्पण किया था। मिताली को महिला क्रिकेट का ‘सचिन तेंडुलकर’ कहा जाता है। इसके बावजूद इस दिग्गज खिलाड़ी के लिए उसके होम स्टेट ने अभी तक किसी प्रकार के इनाम की घोषणा नहीं की है।

 

क्रिकेट प्रेमियों और मिताली के प्रशंसकों के लिए और भी दुखद यह है कि राज्य ने अन्य खेलों से जुड़ी खिलाडिय़ों जैसे सानिया मिर्जा और पीवी सिंधु सरीखी खिलाडिय़ों के लिए काफी कुछ किया है। लेकिन लंबे समय से नई-नई ऊंचाइयों को छू रहीं मिताली राज की साफतौर पर अनदेखी की गई है।टीम इंडिया ने मिताली की कप्तानी में इस वर्ल्ड कप में फाइनल तक का सफर तय किया। इस टूर्नमेंट के फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया इंग्लैंड के हाथों 9 रन से हार गई। मिताली राज को 11 साल पहले यहां आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी ने 500 यार्ड्स का प्लॉट देने का ऐलान किया था।

 

मिताली राज को यह प्लॉट आज तक हासिल नहीं हो पाया है। मिताली और उनके परिवार ने इसे पाने के लिए कई बार प्रयास किए।टीम इंडिया और मिताली के शानदार प्रदर्शन के बाद अन्य राज्यों की सरकारों ने अपने खिलाडिय़ों के शानदार प्रदर्शन के बाद उनके लिए कई आकर्षक ऐलान किए हैं। पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर और सुषमा वर्मा को डीएसपी की पोस्ट देने का प्रस्ताव दिया है। मध्य प्रदेश सरकार ने भी टीम इंडिया की खिलाडिय़ों को 50 लाख रुपये देने का ऐलान किया है।

 

वहीं तेलंगाना सरकार ने अभी तक न तो टीम इंडिया के लिए और न ही अपनी खिलाड़ी मिताली राज के लिए किसी तरह के इनाम की घोषणा की है। टीम इंडिया के फाइनल में पहुंचने पर राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने टीम को बधाई जरूर दी थी, लेकिन इसके बाद से उन्होंने टीम इंडिया या अपनी राज्य की खिलाड़ी के लिए कोई भी घोषणा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है। बता दें कि मिताली राज महिला वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं।

 

हाल ही में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।2005 में जब टीम इंडिया पहली बार महिला वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची थी, तो तब वह ऑस्ट्रेलिया के हाथों यह खिताबी मुकाबला हार गई थीं। इस दौरान उन्हें 5 लाख रुपये का इनाम दिया गया और 500 यार्ड्स जमीन आवंटित करने की घोषणा की गई थी। इस मसले पर उनका परिवार कुछ भी नहीं बोलने का तैयार नहीं है।

 

परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस सिलसिले में सरकार ने कुथबुल्लापुर में जमीन की पहचान कर ली थी, लेकिन दुर्भाग्य से इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ पाई।इस सिलसिले में उनके पिता और मां (दोराई राज और लीला राज) प्रशासन से कई बार मिले, लेकिन इसके बावजूद कोई हल नहीं निकल सका। मिताली और उनकी मां ने मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी से भी मुलाकात की थी, लेकिन बाद में एक हादसे में उनकी मृत्यु हो गई।

 

इसके बाद मिताली के परिवार को किरण कुमार रेड्डी से भी उम्मीदें थीं, जो खुद एक क्रिकेटर रह चुके हैं। लेकिन कई बार प्रयास करने के बावजूद इसका कोई हल नहीं निकल सका। इस संबंध में मिताली राज ने भी मुख्यमंत्री से बात की थी, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बताया जाता है कि इसके बाद मिताली राज इस मसले को लेकर बेहद नाराज थीं और उन्होंने अब अपने परिवार को इस सिलसिले में किसी भी अधिकारी या राजनेता से मिलने को मना कर दिया था।

 

मिताली के परिवार से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘एक खिलाड़ी बार-बार इसके चक्कर नहीं लगा सकता है कि राज्य सरकार ने उससे क्या वादा किया है। क्या यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, कि उसके राज्य में रहने वाली किसी खिलाड़ी की क्या उपलब्धियां हैं और उन्हें सम्मान दिया जाए या नहीं।’

 

राज्य की वर्तमान सरकार ने सानिया मिर्जा (2 करोड़) और पीवी सिंधु (5 करोड़ और 1000 यार्ड्स जमीन) को दी और बाकी खिलाडिय़ों के पहले से पेंडिंग मामलों को निपटाया, लेकिन मिताली के मुद्दे पर कुछ नहीं किया।

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