सऊदी अरब और यूएई में फंसे हैं पंजाब के 27 लोग

चंडीगढ़ । इराक के मोसुल में मारे गए 27 भारतीयों के शवों को स्वदेश वापस लाने के बाद 27 ऐसे और लोगों के बारे में पता लगा है जो सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में फंसे हुए हैं। इन लोगों के साथ दूसरे राज्यों के भी चार लोग हैं जो ट्रैवेल एजेंट्स के बहकावे में आकर विदेश में फंस गए हैं।

गढ़शंकर से आम आदमी पार्टी विधायक जय किशन सिंह और आप के मुख्य प्रवक्ता हरजोत सिंह बैंस ने इन लोगों की जानकारी विदेश मंत्रालय को मंगलवार को देकर मदद मांगी है। उन्होंने बताया है कि ज्यादातर लोग अनाधिकृत ट्रैवेल एजेंट्स की बातों में आकर अरब देश चले गए। वहां उनके पासपोर्ट ले लिए गए और वे केंद्र के दखल के बिना वापस नहीं लौट सकते।

फर्जी एजेंट्स के जाल में फंस रहे लोग
उन्होंने बताया कि 300 से भी अधिक पंजाबी दुनियाभर के देशों में फंसे हैं। पार्टी नेताओं से मिले आंकड़ों को देखना होगा लेकिन उससे पहले देखान होगा कि किसी विदेश में तुरंत मदद की जरूरत है। लोगों के विदेशों में फंसने की सबसे बड़ा कारण फर्जी एजेंट हैं।

आने नहीं देते मालिक
जिन लोगों के परिजन बाहर फंसे हुए हैं वे उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया है कि कोई भी उनकी शिकायतों को सुन नहीं रहा है। चहल खुर्द गांव में साइकल रिपेयर की दुकान चलाने वाले जोगिंदर सिंह के दोनों बेटे यूएई में फंसे हैं। उन्होंने बताया कि उनके ऊपर कर्ज था जिसे चुकाने के दबाव में बेटे पैसे कमाने विदेश चले गए।

उन्होंने कहा, उनको नौकरी देने वाले व्यक्ति ने उनके नाम पर कर्ज लिया और अब वह किसी अन्य अपराध में जेल में है। मेरे बेटों के दस्तावेज उसके पास हैं और वह दे नहीं रहा है। कई दिन से मेरे बेटे बिना कुछ खाए-पिए सडक़ों पर घूम रहे हैं। वह एक अस्थाई शेल्टर में पंजाब के पांच अन्य लोगों के साथ रह रहे हैं। उन्हें तुरंत मदद चाहिए।

पहले से चली आ रहीं ऐसी घटनाएं
इससे पहले भी पंजाबियों को उनके मालिकों द्वारा बंधक बनाकर रखने की रिपोर्ट्स आती रही हैं। साल 2014 में लगभग 250 पंजाबियों को इराक के नजफ में एक कंपनी के बेसमेंट में बंधक बनाकर रखा गया था। उनके पास टिकट खरीदने के भी पैसे नहीं थे। केंद्र सरकार ने उन्हें किसी तरह बचाया था।

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