संडे हो या मंडे रोज खाओ अंड़े और फिर देखो…!

अण्डों के बारे में तरह तरह की अटकलियां रहती हैं। लेकिन एक रिसर्च के मुताबिक हाल ही में अपने नये शोध में पाया है कि 30 साल पहले जिस तरह के अण्डे मुर्गियों देती थीं, उसके मुकाबले आज के अंडों में हानि पहुंचाने वाले कारकों में कमी आई है। अब मार्केट में मिलने वाले अण्डे ना सिर्फ पौष्टिक है बल्कि मोटापे को कम करता है साथ ही साथ हृदय रोग को भी कम करता है।

अण्डों को तलने या उबालने से एंटीऑक्सीडेंट्स का स्तर आधा हो जाता है। जो लोग दिन में एक या दो अण्डे खाते हैं, उससे उनके सेरम लेवल में कोई अन्तर नहीं होता है। सेरम कोलेस्ट्रॉल में एचडीएल अच्छे कोलेस्ट्रॉल व एलडीएल खराब कोलेस्ट्रॉल होते हैं। एचडीएल की तुलना में एलडीएल हृदय रोगों का निर्धारण करता है। सेचूरेटेड और हाइड्रोजनीकृत वसा के सेवन से मोटापा होता है।

इसका कारण एलडीएल का बढना है और यही हृदय रोगों को बढाता है। अण्डे में 14 विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं और यह प्रोटीन और लेक्टिथिन का प्रमुख स्त्रोत हे। इसमें विटामिन ए, डी, ई, बी1, बी2, बी12 के अलावा कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नेसियम, आयरन और जिंक पाया जाता है।

अण्डों में काफी मात्रा में कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है, इस कारण डॉक्टर अधिक अण्डे खाने से मना करते थे जबकि अण्डा खाने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर किसी भी तरह का क्लीनिकल प्रभाव नहीं पडता।

अगर नींद नहीं आती हैं तो अण्डे के सेवन से यह शिकायत दूर हो जाती है।जो लोग हर हफ्ते कम से कम एक अण्डा खाते हैं, उनमें कैरोटिड प्लेक अधिक पायाजाता है। यह रक्त वाहिकाओं में पाया जाता है और हृदय को रोगों से बचाता है।

अण्डों को तलने या उबालने से एंटीऑक्सीडेंट्स का स्तर आधा हो जाता है। जो लोग दिन में एक या दो अण्डे खाते हैं, उससे उनके सेरम लेवल में कोई अन्तर नहीं होता है। सेरम कोलेस्ट्रॉल में एचडीएल अच्छे कोलेस्ट्रॉल व एलडीएल खराब कोलेस्ट्रॉल होते हैं। एचडीएल की तुलना में एलडीएल हृदय रोगों का निर्धारण करता है।

सेचूरेटेड और हाइड्रोजनीकृत वसा के सेवन से मोटापा होता है। इसका कारण एलडीएल का बढना है और यही हृदय रोगों को बढाता है।बहुत कम खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला विटामिन डी भी अण्डे में पाया जाता है। यह हड्डियों को मजबूत करता है और शरीर में ताकत आती है।

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