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रुपये को बचाने के लिए करंसी मार्केट में कूदा आरबीआई

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मुंबई । डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही कमजोरी को रोकने के लिए सोमवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के करंसी मार्केट में उतरने की रिपोर्ट है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 15 महीनों में पहली बार 67 को पार कर गया। ट्रेड गैप के बढऩे और क्रूड ऑइल की महंगी कीमतों से इम्पोर्ट बिल में वृद्धि रुपये में गिरावट के बड़े कारण हैं।

 

कुछ सरकारी बैंकों को आक्रामक तरीके से डॉलर की खरीदारी करते देखा गया। मार्केट डीलर्स ने कहा है कि यह डॉलर के बदले रुपये में कमजोरी को रोकने की आरबीआई की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। पिछले तीन महीनों में एक दर्जन एशियाई देशों की करंसी के बीच रुपये ने सबसे खराब प्रदर्शन किया है। यह इस अवधि में डॉलर के मुकाबले 4 पर्सेंट से अधिक कमजोर हुआ है।

 

डीलर्स ने बताया कि आरबीआई ने सोमवार को स्पॉट मार्केट के साथ ही फ्यूचर्स मार्केट में भी लगभग 80 करोड़ डॉलर की खरीदारी की। इस बारे में आरबीआई को भेजी गई ईमेल का जवाब नहीं मिला। कोटक सिक्यॉरिटीज के करंसी एनालिस्ट, अनिंद्य बनर्जी ने बताया, करंसी मार्केट ने आरबीआई की ओर से इस तरह का बड़ा कदम लंबे समय बाद देखा है।

 

ऐसा न होने पर रुपया और टूट सकता था क्योंकि इसे कमजोर करने वाले कारणों में कमी नहीं आई है। सोमवार को मुंबई में ट्रेडिंग के दौरान रुपया एक समय आधा पर्सेंट तक गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 67.18 पर चला गया था। बाद में आरबीआई के हस्तक्षेप के बाद इसमें नुकसान को कुछ कम करने में मदद मिली और यह 0.40 पर्सेंट गिरकर 67.14 पर बंद हुआ।

 

डीबीएस बैंक इंडिया के हेड (ट्रेडिंग), आशीष वैद्य ने कहा, रुपये में कमजोरी डॉलर में बड़े उतार-चढ़ाव का एक हिस्सा है। हम अन्य उभऱते हुए देशों की करंसी में भी इसी तरह की गिरावट देख रहे हैं। क्रूड के महंगे प्राइसेज से चिंता बढ़ रही है। ऑइल इम्पोर्ट पर अधिक निर्भर करने वाले देशों को और नुकसान होगा।

 

भारत जैसे क्रूड का अधिक इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिसंबर में समाप्त हुए क्वॉर्टर में देश का करंट एकाउंट डेफिसिट 13.5 अरब डॉलर के साथ जीडीपी के 2 पर्सेंट पर था। इससे पिछले क्वॉर्टर में यह जीडीपी के 1.1 पर्सेंट पर रहा था। करेंट अकाउंट डेफिसिट गुड्स और सर्विसेज के एक्सपोर्ट से इम्पोर्ट का अधिक होना है।

 

क्रूड महंगा होने और विदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स का इम्पोर्ट बढऩे से इसमें वृद्धि हुई है। सोमवार को सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को डॉलर की खरीदारी करते देखा गया। कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां भी अपने डॉलर रिजर्व को बढ़ा रही हैं क्योंकि उन्हें रुपये में और गिरावट आने की आशंका है।

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