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रात के अंधेरे में मसाला तैयार कर डाली जा रही आरसीसी

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गौरीकंुड में चल रहा करोड़ों की लागत से बाढ़ सुरक्षा का कार्य
सुरक्षा दीवारों में मिट्टी का किया जा रहा जमकर प्रयोग
बरसाती सीजन में उफान पर आती है मंदाकिनी, दीवारों के गिरने का बना है भय
डीएम के आदेश के बाद भी जांच कमेटी ने नहीं की अब तक कोई जांच, स्थानीय जनता में आक्रोश

रुद्रप्रयाग। आपदा से पचास फीसद ध्वस्त गौरीकुंड बाजार को भविष्य में सुरक्षित करने की दृष्टि से बनाई जा रही सुरक्षा दीवार सवालों के घेरे में आ गई है। आलम यह है कि दीवार निर्माण में रेत की जगह मिट्टी का जमकर प्रयोग किया जा रहा है और अभियंता हैं कि आंखे मंूदे हुए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी की ओर से जांच के आदेश दिये जाने के बाद भी जांच कमेटी अभी तक निर्माण कार्य की कोई जांच नहीं कर पाई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि विभागीय अभियंता और जांच कमेटी की मिलीभगत से ठेकेदार को शह दी जा रही है।

दरअसल, केदारनाथ से आई आपदा में सबसे बड़ा नुकसान गौरीकुंड को हुआ। इस जगह मां गौरा का मंदिर है और डोली के केदारनाथ जाते समय एक रात्रि विश्राम यहीं पर किया जाता है। जिसके बाद सुबह स्नान करने के बाद डोली धाम के लिए रवाना होती है। केदारनाथ आपदा में गौरीमाई का मंदिर तो सुरक्षित बच गया, लेकिन गर्म कुंड का अस्तित्व ही मिट गया। आज जहां पर गर्म कुंड का पानी निकल रहा है, वह स्थान भी अपवित्र हो चुका है।

शासन और प्रशासन स्तर से समय से गौरीकुंड की सुध न लिये जाने से आज स्थिति दयनीय बन गई है। इसके साथ ही आपदा से हजारों लोग बेरोजगार हो चुके हैं, जिनके रोजगार के लिए भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाये हुए हैं। आपदा के चार साल बाद प्रशासन ने गौरीकुंड की सुध ली और गौरीकंुड बाजार की सुरक्षा के लिए मंदाकिनी नदी के किनारे तीन सौ मीटर सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य शुरू करवाया, लेकिन ग्यारह करोड़ की लागत से बनने जा रही इस दीवार में ठेकेदार मिट्टी का जमकर प्रयोग कर रहे हैं।

ऐसे में ग्रामीणों को खतरा है कि आगामी बरसाती सीजन में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने के बाद सुरक्षा दीवार ढह जायेगी। ग्रामीणों की माने तो सुरक्षा दीवार में प्रयोग किये जाने वाली सामग्री में जमकर अनियमितता बरती जा रही है, जिससे सुरक्षा दीवार के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े होना लाजिमी हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मंदाकिनी नदी के किनारे खोदकर निकाली गयी मिट्टी से मसाला तैयार किया जा रहा है।

खास बात तो यह कि जेसीबी मशीन द्वारा रात के अंधेरे में इस मसाले को तैयार करके आरसीसी डाली जा रही है। गौर करने वाली बात यह कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बाद जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने निर्माण कार्य की जांच के लिए कमेटी बनाई, जिन्हें निर्माण कार्य की जांच करनी थी। मगर लम्बा समय बीत जाने के बाद भी जांच कमेटी में रखे गये अभियंताओं ने निर्माण कार्य की जांच नहीं की है। ऐसे में ठेकेदार को पूरा फायदा मिल रहा है।

सिंचाई विभाग के अभियंताओं के साथ मिलकर ठेकेदार द्वारा सुरक्षा दीवारों के निर्माण में अधिकतर मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। मानकों के अनुसार कार्य न किये जाने से किये जाने से यह दीवार कभी भी ढह सकती है। ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी एवं पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष मायाराम गोस्वामी ने कहा कि इस बावत कई बार मौखिक रूप से जिलाधिकारी एवं विभागीय अभियंताओं को अवगत कराया चुका है, लेकिन निर्माण कार्य की कोई जांच नहीं की गई है, बल्कि कार्य लगातार जारी है।

कहा कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के कारण उन्होंने ठेकेेदार को भी मानकों के अनुसार कार्य करने की सलाह दी। बरसात में मंदाकिनी नदी के दूसरे छोर पर लैंड स्लाइड हो रहा है। यदि कभी चट्टान खिसककर नदी में आ गई तो एक बार फिर गौरीकुंड पर आपदा का कहर गिर सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा बाजार की ओर जो सुरक्षा दीवार निर्मित की जा रही है, उसमें रेता कम और मिट्टी का जमकर प्रयोग किया जा रहा है।

ग्रामीणों के डर की वजह से रात के अंधेरे में सीमेंट में मिट्टी मिलाकर आरसीसी डाली जा रही है। उन्होने कहा कि कई बार इस बाबत उच्चाधिकारियों से वार्ता की गयी है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। वहीं जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि गौरीकंुड के ग्रामीणों द्वारा सुरक्षा दीवार निर्माण में अनियमितता की शिकायत की गई थी, जिसके बाद जांच कमेटी को निर्माण कार्य की जांच करने के निर्देश दिये गये।

उन्होंने कहा कि यदि जांच कमेटी ने अभी तक जांच नहीं की है तो इसके लिए लिखित स्पष्टीकरण मांगा जायेगा और निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।

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