राज्य आंदोलनकारियों ने जुलूस निकाल किया सचिवालय कूच, पुलिस ने रोका

देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मंच ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश सरकार को जगाने के लिए जुलूस निकालकर सचिवालय कूच किया। सचिवालय से पहले पुलिस ने उन्हें बैरीकेडिंग लगाकर रोक दिया। रोके जाने पर उन्होंने वहीं पर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलनकारियों के हितों के प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रही है जिस लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

यहां मंच से जुडे हुए आंदोलनकारी कचहरी स्थित शहीद स्थल में इकटठा हुए और वहां पर उन्होंने अपनी सात सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय कूच किया। जैसे ही आंदोलनकारी सुभाष रोड के पास पहंुचे तो पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और पुलिस द्वारा रोके जाने पर सभी आंदोलनकारी वहीं पर धरने पर बैठ गये।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि समूचे उत्तराखंड को आरक्षित किया जाये और मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहे के दोषियों को फांसी दिये जाने की मांग की गई है लेकिन अभी तक इस ओर किसी भी प्रकार की कोई नीति तैयार नहीं की गई है। उनका कहना है कि आज आंदोलन को काफी दिन हो गये, लेकिन किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा आंदोलनकारियों को शीघ्र ही प्रदान किया जाना चाहिए और

सेनानियों के आश्रितों को रोजगार में समायोजित किये जाने तथा समीवर्ती जिलों से पलायन पर पूर्ण रूप से रोक लगाये जाने और आंदोलनकारियों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को शीघ्र ही प्रदान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लगातार आंदोलनकारियों के हितों के लिए संघर्ष किया जा रहा है लेकिन प्रदेश सरकार इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही है।

लगातार आंदोलनकारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है और उनके हितों के लिए किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिससे आंदोलनकारियों में रोष बना हुआ है। शीघ्र ही आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जायेगा

उन्होंने उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी। अभी तक शासन प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की कोई सुध नहीं ली गई है। सिटी मजिस्ट्रेट के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। जुलूस में अध्यक्ष नंदा बल्लभ पांडेय, विनोद असवाल, प्रेम सिंह नेगी, विश्म्बरी रावत, पुष्पा रावत, हिमानंद बहुखंडी, सुनील जुयाल, सत्येन्द्र नौगांई, वीर सिंह, एम एस रावत, जानकी भंडारी, संध्या रावत, रेखा पंवार, विमला रावत, जगदम्बा नैथानी, विमला पंवार, नीमा हरबोला, कााति विरेन्द्र कुकशाल, पुष्पा राणा, सुधा रावत सहित अनेक आंदोलन कारी मौजूद थे।

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