udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news राजनीतिः अनिल चमक गए, बाकी सितारों की चमक पड़ी फीकी !

राजनीतिः अनिल चमक गए, बाकी सितारों की चमक पड़ी फीकी !

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देहरादूनः मुख्यमंत्री छोड़ दे, तो बहुत सारे बीजेपी के बड़े लीडर ठीक से सो पाएंगे, इसमें शंका होती है। जिस उम्र में राजीव गांधी , प्रधानमंत्री बने थे, उस उम्र में अनिल बलूनी, उत्तराखंड से सांसद बन रहे हैं। राजीव की जगह कई वरिष्ठ नेता थे प्रणब,मूपनार इत्यादि, वैसा ही ठीक यहाँ थे विजय बहुगुणा,अजय भट्ट आदि..।लेकिन अनिल चमक गए हैं। कई चमकते राज्य के सितारों को पीछे छोड़ गए। इसमें त्रिवेंद्र की भूमिका अहम मानी जा रही है।


त्रिवेंद्र और हाईकमान के पास रिपोर्ट थी, उनके उत्तराधिकारी के लिए कुछ लोग मैं- मैं बोल रहे हैं। एक उनको हैसियत में रखना था। और दूसरा पियोर बीजेपी का अंश , इस दौर में डालना था। जहाँ सरकार में कांग्रेस से आया है। कांग्रेस से आया है, गूंजना विद्यमान है। वहां जहां आम बीजेपी कार्यकर्ता जिसे 19 में जुटना है के लिए यह साफ संदेश है।राज्य में अहिसथिरता फैलाने वालों पर चोट है यह चयन।

बलूनी दिल्ही में पत्रकार थे, फिर गवर्नर गुजरात श्री सुंदर सिंह भंडारी के ओएसडी बने। फिर कोटद्वार उप चुनाव में आये , हारे, फिर खंडूरी के टाइम प्रदेश प्रवक्ता बने , निशंक के टाइम वन्य जीव के उपाध्यक्ष। 14 में सत्ता में आने पर वे नेशनल चैनल में हर रोज दिखाई दिये। बनारस के मोदी के चुनाव में वे मीडिया संभाल रहे थे। वर्तमान में वे मीडिया हेड हैं बीजेपी देश के। वही तय करते हैं कि किस प्रवक्ता को किस चैंनल में बैठना है।सबसे बड़ी बात वे अहमदाबाद, सूरत का दिल जीत गए।

खंडूरी की जगह भगत सिंह मुख्यमंत्री नहीं बने थे तब बदले में उन्हें राज्य सभा भेजा गया था। 2002 में एनडी तिवारी की जगह हरीश नही ले पाए थे। बदले में सांसद बनाये गए थे। सोचिए उत्तराखंड की कितनी महत्वपूर्ण कुर्सी पर बलूनी जा रहे हैं।

बलूनी के साथ, 15 साल से संपर्क में तेजस्वी बीजेपी नेता श्री नलिन भट्ट मानते हैं बीजेपी में युवा दौर आ गया है।बलूनी भविषय की आधारशिला हैं।बताया जाता है बलूनी और त्रिवेंद्र एक ही कुँए के निकलने वाले पानी पीने वाले आदमी हैं। बलूनी दिल्ही जो बहुत बड़ा सुनती है राजनीति का समुद्र है में एक पोजटिव डेरेकशन देने वाले नेता साबित हुए हैं।

अनिल बलूनी ने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता की हैसियत से एक दिन मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनोती दी थी।तब वह बात उनकी बचकानी लगी थी।लेकिन चुनोती में किसी न किसी का पीछे से मजबूत हाथ रहा होगा, तभी तो ललकारते थे। राष्ट्रपति शासन के दौरान वे दिल्ही से लेकर दून तक सक्रिय रहे थे।

उत्तराखंड की छवि बाहरियों को राज्यसभा में ढ़ोने के चलते खराब हुई है। राज बब्बर इसके उद्धदारण हैं। वैसे तो किसी भी राज्य सभा सदस्य ने विकास का चमत्कार नहीं किया, 18 सालों में कोई ठोस कार्य देखने में नहीं आया। एक राज्य सभा सांसद द्वारा दून के बड़े पूंजीपतियो को 25, 30 ,लाख की निधि जरुर बांटी गईं।

कुछ उनके स्कूल में लगी, कुछ फार्म हाउस की दीवारों में। किंतु ये रहता था ये अपना है भीतरी है। यहां के भूगोल के बारे में बलूनी जानते हैं। बलूनी पर यह सूत्र भी फिट बैठता है। यह भी तार्कित लगता है वे दोनों मंडलो से वास्ता रखते हैं।

 

वरिशष्ठ पत्रकार शिशुपाल गुसांई की वाल से साभार

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