प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में उत्तराखंड का वर्चस्व!

…तो यह कहना गलता नहीं होगा कि उत्तराखंडियों में है चाणक्य जैसा दिमाग और बाजीराव जैसा हौंसला

उदय दिनमान डेस्क: हिमालय आदि काल से रहस्यमय रहा है जैसे-जैसे रहस्य की परतें हटती गई, वैसे-वैसे रहस्य और गहराता गया। सदियों से यह प्राणी मात्र को अपनी ओर आकर्षित करता आया है चाहे इसका कारण वहां पाई जाने वाली दिव्य वानस्पतिक संपदाएं हो या हजारों सालों से तपस्यारत साधुाअें की तपस्या स्थली या फिर देवताओं का मनोरम स्थल। गंगा और सिंधु जैसी पवित्र नदियों का उद्गम स्थल भी तो हिमालय ही है। कहते हैं वहां बडे-बडे आश्रम हैं जहां पर आज भी सैकडों साधक अपनी साधना में लगे हुए हैं। साधक साधना करते-करते यहां चाणक्य जैसा दिमाग और बाजीराव जैसा हौंसला। खुद में पैदा कर लेता है। यह स्वाभाविक है।इसमें भी खासकर उत्तराखंड की पहाडियों में जन्म लेने वाला किसी तपस्वी से कम नहीं होता। क्योंकि यहां की विपरित परिस्थतियां और यहां का जीवन किसी तपस्या से कम नहीं है।

 

”हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थान प्रचक्षते॥”  

वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड के हिमालय में तपस्या की और यहां के लोगों को करीब से जाना। प्रधानमंत्री ने यहां तपस्या ज्ञानार्जन के दौरान यहां के लोगों के अंदर की क्षमता को भी करीब से देखा। शायद यही कारण है कि आज वे अपनी टीम और देश के विकास के लिए यहां के लोगों को अपने साथ लेने में थोडा भी नहीं हिचकिचाते है।यहीं कारण है कि प्रधानमंत्री की टीम में आज उत्तराखंड मूल के लोगों की लंबी फौज ळै। जो देश को लगातार विकास के पथ पर ले जाने का कार्य कर रहे है।यह कहना गलत नहीं होगा कि अब भारत को पुन सोने की चिडिया बनाने और विश्व गुरू के खिताब देने से कोई नहीं रोक सकता। वस थोडा समय जरूर लगेगा। वर्तमान में प्रधानमत्री की टीम में उत्तराखंड की कौन-कौन सी हस्तियां है पर एक नजर।

 

योगी आदित्यनाथ, यूपी सीएम
योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह नेगी है. अजय सिंह नेगी का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में हुआ था. उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी किया. वो गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े सबसे सूबे की जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ के कंधों पर ही दी है.

 

 अजित डोवाल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी उत्तराखंड से ही आते हैं. डोवाल का जन्म 1945 में पौड़ी गढ़वाल के एक गांव में हुआ था. उनके पिता भी आर्मी में थे. अजित डोवाल रिटायर्ड IPS हैं और IB के डायरेक्टर भी रह चुके है. डोवाल पीएम मोदी के काफी करीबी हैं और उन पर काफी भरोसा करते हैं. इसलिए देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी डोवाल के हाथों में ही है, डोवाल को भारत का जेम्स बॉन्ड भी कहा जाता है.

 

 त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के काफी करीबी माने जाते हैं. यही वजह रही कि उत्तराखंड में मिले इतने बड़े बहुमत के बाद उन्होंने सूबे की कमान उनके हाथ में सौंपी. इससे पहले वह झारखंड के प्रभारी और लोकसभा चुनावों के दौरान यूपी के सह प्रभारी थे.

जनरल बिपिन रावत, आर्मी चीफ
भारतीय सेना के 27वें आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत देश के सबसे अहम पद पर मौजूद हैं. बिपिन रावत उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से आते हैं, और उनका बैकग्राउंड भी आर्मी का ही है. 2016 में जनरल दलबीर सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद पीएम मोदी ने रावत पर भरोसा रखते हुए उन्हें देश की सेना की कमान सौंपी.

 

 अनिल कुमार धस्माना, रॉ डायरेक्टर
रॉ स्पेशल डॉयरेक्टर अनिल धस्माना 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, रॉ में कई अहम भूमिका निभा चुके धस्माना कैबिनेट सचिवालय में विशेष सचिव के पद पर तैनात थे. वह उत्तराखंड के पौड़ी से आते हैं. धस्माना बलूचिस्तान मुद्दे के एक्सपर्ट माने जाते हैं, यही कारण रहा कि पीएम मोदी ने उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी दी. उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मामलों का भी खासा अनुभव रहा है, वे लंदन और फ्रैंकफर्ट के अलावा सार्क व यूरोपीय डेस्क पर काम कर चुके हैं.

 

 अनिल कुमार भट्ट, डीजीएमओ
डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) अनिल कुमार भट्ट भी उत्तराखंड के खतवाड़ ही आते हैं. पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम देने में अहम भूमिका निभाने वाले के बाद ही लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को पीएम मोदी ने डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) जैसे अहम पद पर नियुक्त किया था.

 

 राजेंद्र सिंह, डीजी कोस्ट गॉर्ड
कोस्ट गॉर्ड के पहले बैच से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र सिंह भारतीय कोस्ट गॉर्ड के डॉयरेक्टर जनरल पद पर तैनात हैं. मुंबई में हुए 26/11 हमले के दौरान राजेंद्र सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने फरवरी, 2017 में डॉयरेक्टर जनरल का पदभार संभाला था. वह इस पद को संभालने वाले पहले नॉन-नेवी अफसर थे.

 

 भास्कर खुल्बे, PMO
सीनियर आईएएस अफसर भास्कर खुल्बे पीएमओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेकेट्री हैं. उन्हें हाल ही में एडिशनल सेकेट्री पद से सेकेट्री बनाया गया था. बंगाल कैडर के भास्कर, पीएमओ में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अफसर है. उनकी तन्खवाह करीब 2 लाख रुपये माह है.

 

सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग

उत्तराखण्ड  उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था।

 

भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल

पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं।देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है।

 

चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान

राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है।

संकलन व प्रस्तुति

संतोष बेंजवाल