प्रकृति की मारः तपने लगे पहाड़, छूटने लगे लोगों के पसीने !

उदय दिनमान डेस्क ।  प्रकृति की मारः तपने लगे पहाड़, छूटने लगे लोगों के पसीने ! बारिश और बर्फवारी के बाद ऐसा तो होना ही था। क्योंकि इस साल बारिश उस हिसाब से नहीं हुई जिस हिसाब से होना चाहिए था। यही कारण है कि आने वाले समय में पानी की समस्या से पहाड़वासियों को दो चार होना पडे़गा।

आपको बता दें कि इस साल बारिश की मात्रा कम रही और ग्लोवल वार्मिंग के कारण इस साल भी गर्मी ीाारी होने की संभवना है। उत्तराखंड और हिमांचल के पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी के बाद भी मार्च महिने में भी लोग गर्मी से बेहाल है और आने वाले दिनों में इसका असर ज्यादा होने के संकेत प्रकृति दे रही है।

आपको बता दें कि बारिश और बर्फबारी का दौर खत्म होने के बाद अब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ तपने लगे हैं. आलम यह कि अब शिमला समेत कई पहाड़ी इलाकों में लोगों के पसीने छुटने लगे हैं.

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने एक अप्रैल तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया है. उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पारा और चढ़ेगा.इससे आम लोगों के साथ पशुओं के लिए भी आने वाले दिन भारी पड़ने वाले हैं।

ऊना रहा सबसे गर्म
सोमवार को पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहा. पूरे प्रदेश में धूप खिलने से अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की बढ़ोतरी हुई. प्रदेश में सोमवार को ऊना में सबसे अधिक गर्म रहा. यहां अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री रहा.

 

इसके अलावा सुंदरनगर में 30.5, भुंतर में 31.0, धर्मशाला 25.6, नाहन 28.2, सोलन 26.2, कांगड़ा 30.5, बिलासपुर 31.9, हमीरपुर 31.6, चंबा 28.2, डलहौजी 18.8 और कल्पा में तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया.

हिमाचल में साठ फीसदी कम बारिश
प्रदेश के मौसम में इस सीजन में काफी बदलाव आया है. अब तक हिमाचल में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत बारिश कम हुई है. जहां विंटर सीजन में करीब 82.8 मिमी बारिश हानी चाहिए थी.

वहीं अब तक करीब 32.8 मिमी बारिश ही हुई है, यानी के सामान्य से 60 प्रतिशत कम. वहीं, मार्च में 77.5 मिमी बारिश सामान्य तौर पर होनी चाहिए थी, वहीं अब तक केवल 19.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है.

प्रदेश में बढ़ेगा जल संकट
आने वाले समय में इस स्थिति में प्रदेश में गर्मियों में जल संकट गहरा सकता है। 2007, 2009, 2011 और 2016 में जनवरी के महीने में इसी तरह की स्थिति पैदा हो गई थी.

इस कारण जल संकट गहरा गया था. ऐसे में सर्दियों के बढऩे की संभावनाएं पैदा हो जाती हैं. 2018 में पश्चिमी विक्षोभ ज्यादा मजबूत नहीं रहा है. इसका खामियाजा प्रदेश के किसान बागवान और व्यवसायी झेल रहे हैं.

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