udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news प्लास्टिक व थर्माकोल निर्मित डिस्पोजल प्लेट, गिलास, दौने पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित !

प्लास्टिक व थर्माकोल निर्मित डिस्पोजल प्लेट, गिलास, दौने पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित !

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देहरादून। अपर आयुक्त (प्रशासन) गढवाल मण्डल, पौड़ी हरक सिंह रावत ने जनपद देहरादून शहर में  पलास्टिक/थर्माकोल के डिस्पोजल प्लेट, दोने एवं गिलास आदि पर प्रतिबन्ध करने सम्बन्धी बैठक आहुत की गयी।
अपर आयुक्त गढवाल हरक सिंह रावत ने अवगत कराया है कि बैठक मुख्य उद्देश्य जनपद में आयोजित होने वाले विवाह समारोह, धार्मिक आयोजन एवं अन्य कार्यक्रमों में प्रयोग में लाये जाने वाले प्लास्टिक/थर्माकोल से निर्मित डिस्पोजल प्लेट, गिलास एवं दौने आदि को पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित करने का निर्णय लिया गया है
जिसके लिए जनपद के सभी थोक व्यापारियों, दोना पत्तल स्टोर, वैडिंग प्वांइट संचालकों, होटल मन्दिर समिति तथा गुरूद्वारों के प्रबन्धक/संचालकों के साथ बैठक कर परिचर्चा की गयी।  उन्होने बताया कि बैठक में उपरोक्त उपस्थित प्रबन्धकों/संचालकों, एवं विक्रेताओं द्वारा प्रशासन से सहयोग करने तथा 31 मार्च 2018 तक सभी प्रकार के प्लास्टिक/थर्माकोल के डिस्पोजेबल प्लेट, दोने एवं गिलास को बन्द किये जाने का आश्वासन दिया गया ।
इस पर अपर आयुक्त गढवाल ने सफाई निरीक्षक एवं सुपरवाईजरों को निर्देश दिये कि 31 मार्च 2018 के बाद प्रतिबन्धित प्लास्टिक/थर्माकोल के डिस्पोजल प्लेट, दोने एवं गिलास तथा 40 माइक्रोन से पतला पॉलिथीन आदि का प्रयोग/बिक्री किसी, विक्रेता/ व्यापारियों/थोक व्यापारियों तथा विभिन्न संस्थानों द्वारा किया जाता है तो उक्त सामग्री को तत्काल जब्त करने की कार्यवाही की जाये। उन्होने समस्त सुपरपाईजरों सफाई निरीक्षकों  को निर्देश दिये कि जगह-2 एवं खाली प्लाटों में कूड़ा फैंकने वाले के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए अर्थदण्ड वसूला जाये।
उन्होने आस-पास के खाली प्लाटों में कूड़ा डालने वालों की पहचान सुनिश्चित की जाये तथा जिनके द्वारा कूड़ा गाड़ी में नही डाला जाता तथा गाड़ी में कूड़ा डालने के एवज में नगर निगम को यूजर चार्ज नही दिया जाता है उनके विरूद्ध 10 गुना अर्थदण्ड वसूल करने के निर्देश दिये तथा अर्थ दण्ड न देने पर भू-राजस्व के बकाये की भांति वसूली प्रमाण पत्र जिला कलैक्टर का  प्रेषित करने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि शहर में कई स्थानों पर डेरी संचालकों द्वारा गोबर नालियों में बहाया जा रहा है। उन्होने निर्देश दिये कि ऐसे डेरी संचालकों के विरूद्ध चालान की कार्यवाही करने के निर्देश दिये। आदेशों के अहवेलना करने वाले डेरी संचालकों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिये।
उन्होने मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिये कि कूड़ा वाहनों को तीन भागों में बांटे, पहले भाग में प्लास्टिक/पॉलिथीन तथा सूखा कूड़ा, दूसरे भाग में मिश्रित कूड़ा तथा अंतिम भाग में जैविक कूड़ा रखें, जिससे कम्पोस्टिंग किया जाये। उन्होने निर्देश दिये कि सभी पर्यावरण मित्रों का कार्य बीटवार विभक्त करते हुए उसकी प्रति आयुक्त कैम्प कार्यालय में भी प्रस्तुत की जाये जिससे सम्बन्धित कर्मी के कार्यों का पर्यवेक्षण भी हो सके।
उन्होने कहा कि यूजर चार्ज इस प्रकार प्रस्तावित किये जाये, जो व्यक्ति कूड़ा वाहनों तक जैविक-अजैविक कूड़ा पृथक-पृथक करके देते हैं उनसे यूजर चार्जेज प्रस्तावित न करें, यदि यूजर चार्ज लिया जाता है तो बहुत कम प्रस्तावित किये जाये। जो व्यक्ति मिश्रत कूड़ा देता है उससे वर्तमान दर से यूजर चार्जेज प्रस्तावित किये जायें तथा जो व्यक्ति कूड़ा वाहनों में कूड़ा नही देते और स्वयं घर से कूड़ा उठाने की बात करते हैं तथा जैविक-अजैविक कूड़ा पृथक-पृथक देते हैं तो उनसे वर्तमान दर से यूजर चार्जेज प्रस्तावित किया जाय। जो व्यक्ति स्वंय घर से मिश्रित/मिक्स कूड़ा देते हैं उनसे यूजर चार्जेज की दुगुनी राशि प्रस्तावित की जाये।
उन्होने मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिये कि कूड़ा वाहनों की तैनाती इस प्रकार की जाये कि नियमित रूप से कूड़ा उठान हो। जिसके लिए कम से कम 5 वाहनों एवं 5 वाहन चालकों को स्टैण्ड ब्वाय में आरक्षित रखें, जिससे वाहन खराब होने या किसी वाहन चालक की तबियत खराब होने पर आरक्षित रखे वाहन एवं वाहन चालक से कार्य लिया जा सके। यह सुनिश्चित कर लिया जाये कि प्रत्येक दशा में कूड़ा उठान हो।
उन्होने समस्त सफाई निरीक्षकों एवं सुपरवाईजरों को निर्देशित किया कि वे सभी विवाह स्थल/होटल/मन्दिर समिति तथा गुरूद्वारे के प्रबन्धक/संचालकों एवं होल सेलरों से निर्धारित  प्रमाण पत्र भरवा लिया जाये कि यदि प्रतिबन्धित प्लास्टिक/थर्माकोल के डस्पोजेबल प्लेट एवं गिलास प्रयोग नही किया जायेगा। तथा प्रमाण पत्र की प्रति मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी को उपलब्ध करा दी जाये। यदि कोई संस्थान प्रमाण पत्र देने के बाद भी प्रतिबन्धित सामग्री का प्रयोग करता हुए पकड़ा जाता है 5000 हजार रू0 अर्थदण्ड प्रतिदिन के हिसाब से (दिन की गणना 8 फरवरी 2018) वसूला जाये।
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