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पयर्टक स्थलों में बर्फबारी न होने से पर्यटक निराश !

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बारिश के लिये भगवान जाख मंदिर के दर पर पहुंचे 11 गांवों के ग्रामीण !

बर्फबारी न होने से नहीं पहुंच रहे पर्यटक ,पर्यटन व्यवसासियों की चरमराई आर्थिकी, दिसम्बर के बाद नहीं हुई है बर्फबारी

रुद्रप्रयाग। पयर्टक स्थलों में बर्फबारी न होने से यहां पहुंच रहे पर्यटक निराश लौट रहे हैं। इसके साथ ही पर्यटक स्थलों पर व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को भी भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले के पर्यटक स्थलों में 12 दिसम्बर से अभी तक बर्फबारी नहीं हुई है।
बर्फबारी के बिना जिले के पर्यटक स्थल पर्यटकों के अभाव में सुनसान पड़े हुये हैं। चोपता, दुगलविटटा, तुंगनाथ, देवरियाताल आदि पर्यटकों स्थलों में इन दिनों पर्यटकों की भरमार रहती थी, लेकिन बर्फबारी न होने से यह पर्यटक स्थल इन दिनों वीरान पड़े हुये हैं। जो पर्यटक यहां पहुंच भी रहे हैं, उन्हें बर्फ का दीदार नहीं हो पा रहा है। बर्फबारी का लुत्फ लेने के लिये पर्यटक चोपता के साथ ही साढ़े तीन किमी की चढ़ाई पार करके तुंगनाथ धाम पहुंच रहे हैं, लेकिन तुंगनाथ में भी पर्यटकों को बर्फ नहीं मिल रही है। जिस कारण पर्यटकों को यहां से निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
12-13 दिसम्बर को ही चोपता, दुगलविटटा, देवरियाताल, चिरबिटिया आदि पर्यटक स्थलों में बर्फबारी हुई थी। हालांकि यह बर्फबारी काफी समय तक टिकी रही। जिस कारण 31 दिसम्बर और एक जनवरी को भारी संख्या में पर्यटक चोपता, दुगपलविटटा, तुंगनाथ और देवरियाताल पहुंचे थे, लेकिन धीरे-धीरे बर्फ पिघलती गई। जिस कारण पर्यटकों की संख्या में भी भारी कमी आ गई है। अब नाम मात्र के पर्यटक ही यहां पहुंच रहे हैं। जो पहुंच भी रहे हैं, उन्हें बर्फ कही भी नहीं मिल रही है।
पर्यटक स्थलों में बर्फबारी न होने के कारण यहां व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को इस बार काफी आर्थिक संकट का नुकसान करना पड़ा है। स्थिति यह है कि पर्यटकों के अभाव में व्यापारियों ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट दिया है। दिल्ली से आये पर्यटक उमेश अग्रवाल ने बताया कि वह बर्फ की खोजबीन में साढ़े तीन किमी की चढ़ाई चढ़ कर तुंगनाथ धाम भी गये, लेकिन वहां भी कही बर्फ नहीं दिखाई दी। किसी स्थान पर पुरानी बर्फ है भी तो वह कठोर हो चुकी है।
बर्फ न मिलने के कारण यहां से निराश होकर लौटना पड़ रहा है। व्यवसायी आनंद सिंह का कहना है कि बर्फबारी न होने से व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। बर्फबारी के अभाव में पर्यटक यहां पहुंच ही नहीं रहे हैं। जो पर्यटक पहुंच भी रहे हैं, वह यहां नहीं रूक रहे हैं। ऐसे में आर्थिक संकट गहरा गया है।
 इस बार मौसम के समयानुकूल बरसात न होने से क्षेत्र सूखाग्रस्त हो गया है। साथ ही बर्फबारी न होने से जल का संकट भी उभरने लगा हैं। लोग अपने-अपने माध्यम से बरसात के लिये मंदिरों में जाकर विभिन्न प्रकार के पूजा पाठ तथा अन्य विकल्पों के जरिये बरसात की मांग कर रहे हैं।  इधर, केदारघाटी के ग्रामीणों ने बरसात के देवता भगवान जाख में ढोल दमाउं की थाप पर परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना कर बरसात की प्रार्थना की। 11 गांव के भक्तों ने जाख मंदिर में जाकर यक्ष की पूजा अर्चना और हवन में तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का आह्वान करके वर्षा की मनौती मंागी।
किवदंती के अनुसार भगवान गुप्तकाशी के निकट देवशाल के अन्तर्गत जाख मंदिर में स्थित भगवान शिव के यक्ष रूप में पूजा अर्चना की जाती है। इसी स्थान पर पांडवों ने अल्पकाल विश्राम किया था। साथ ही युद्धिष्ठिर ने भगवान यक्ष को उनके सवालों का जबाव देकर प्रसन्न कर दिया था, जिस कारण मृत्यु को प्राप्त चारों भाईयों को भगवान यक्ष ने पुर्नजीवन दे दिया था। बताया जाता है कि जाख देवता के अग्निकुंड मंे नर पश्वा को अग्नि के स्थान पर जल दिखाई देता है।
इसलिये जब क्षेत्र में सूखा पड़ जाता है तो भगवान जाख की पूजा अर्चना करने के बाद क्षेत्र में बरसात आ जाती है। ग्यारह गांव रामलीला कमेठी के अध्यक्ष मदन सिंह ने बताया कि रामलीला मंडली से जुड़े सभी 11 गांव के ग्रामीणों ने जाख मंदिर में जाकर अभिषेक किया। साथ ही षोडसोपचार पूजा अर्चना करके वर्षा की प्रार्थना भी की। उन्होंने बताया कि जाख के नर पश्वा ने कुछ दिन बाद बरसात होने का आशीर्वाद दिया है।
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