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 पौष पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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हरिद्वार। पौष पूर्णिमा पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर कडक़ड़ाती ठंड के बीच स्नान कर पुण्य अर्जित किया। इसके साथ ही दान आदि कर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की।

हिंदू पंचांग के पौष माह में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म और भारतीय जनजीवन में पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। पूर्णिमा की तिथि चंद्रमा को प्रिय होती है और इस दिन चंद्रमा अपने पूर्ण आकार में होता है। हिन्दू धर्म ग्रन्थों में पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अघ्र्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है।

ऐसा कहा जाता है कि पौष मास के समय में किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड की पूर्णता पूर्णिमा पर स्नान करने से सार्थक होती है। पौष पूर्णिमा के दिन काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। इसी महत्व को अर्जित करने के लिए हरकी पैड़ी के हदयस्थली ब्रह्मकुंड सहित तमाम गंगा घाटों पर श्राद्धलुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।

घने कोहरे व हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड के बीच गंगा में गोते लगाते श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बन रही थी। हर हर गंगे के जयघोष के साथ श्राद्धलुओं ने गंगा स्नान किया। इसके साथ ही पंडे-पुरोहितों को दान देकर घर परिवार में सुख समृद्धि की कामना की।

ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शास्त्री के अनुसार वैदिक ज्योतिष और हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अघ्र्य देने की परंपरा है।

चूंकि पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। अत: सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है।

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