... ...
... ...

परंपराः बाबा केदार ने किया हिमालय के लिए कूच

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्रीष्मकाल के छः माह केदारधाम में रहेंगे भोलेनाथ ,10 जैकलाई की बैंड धुनों ने मोहा श्रद्धालुओं का मन

रुद्रप्रयाग। पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अपने ग्रीष्मकालीन पड़ाव केदारनाथ के लिए रवाना हुई। ऊखीमठ में मंत्रोच्चारण, 10 जैकलाई रेजीमेंट एवं स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव मुर्तियां गर्भ गृह से बाहर लाई गयी, जहां आचार्यो, पुजारियों, वेदपाठियों एवं हक-हकूकधारियों ने मंत्रोच्चारण के साथ मूर्तियों की विशेष पूजा-अर्चना कर डोली में विराजमान किया।

 

डोली को फूल-मालाओं से सुसज्जित किया गया। डोली के अपने ग्राीष्मकालीन पड़ाव जाते समय भावुक क्षण भी देखने को मिले, जबकि कई श्रद्धालु बाबा केदार की भक्ति में लीन होकर आर्मी की बैण्ड धुनों पर थिरकने लगे और महिला श्रद्धालु बाबा केदार के भजनों में मद-मस्त रही।
बृहस्पतिवार की सुबह ठीक साढ़े नौ बजे भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोलीे केदारपुरी के लिए रवाना हुई।

 

जैसे ही बाबा की डोली को उठाया गया, वैसे ही भोलेनाथ के जयकारों और कीर्तन-भजनों से मन्दिर परिसर गुंजायमान हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सम्पूर्ण देव लोक इसी भू-भाग पर उतर आया है। भगवान केदार बाबा के साक्षात दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ ंका हुजूम उमड पड़ा। बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली जैबरी, विद्यापीठ, गुप्तकाशी, नाला, नारायकोटी, कोरखी, मैखण्डा सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओ को आशीष देते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए फाटा पहुँची।

 

कई श्रद्धालुओं द्वारा भक्तों को मिष्ठान वितरण किया गया। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली के अपने शीतकालीन गद्दी स्थल आंेकारेश्वर मंदिर से रवाना होने से पूर्व रॉवल भीमाशंकर लिंग ने केदारनाथ के प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग को पगड़ी एवं टोपी पहनाकर छः माह केदारनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना का संकल्प दिया। रॉवल द्वारा प्रधान पुजारी को दिये गये संकल्प के अनुसार केदारनाथ के प्रधान पुजारी को छः माह केदारपुरी में ही प्रवास करेंगे।

 

साथ ही प्रधान पुजारी को नदी, नालों एवं पर्वतों की सीमा पार करना भी वंचित माना जाता है। इससे पूर्व बुधवार को देर सांय केदारपुरी के क्षेत्र रक्षक भैरवनाथ की पूजा अर्चना विधि-विधान से की गई। इस मौके पर केदारनाथ विधायक मनोज रावत, क्षेत्र पंचायत प्रमुख शन्तलाल शाह, जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी, नगर पंचायत अध्यक्ष रीता पुष्पवान, बद्री केदार मन्दिर समिति सदस्य श्रीनिवास पोस्ती, शिव सिह रावत, प्रदीप बगवाडी़, कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, गिरीश देवली, प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, वचन सिंह रावत, लेखाकार आरसी तिवारी, हरीश गौड़, देवानन्द गैरोला, आचार्य हर्ष जमलोकी, विश्वमोहन जमलोकी, बलवन्त सिंह रावत, रणजीत रावत, रेखा रावत, यशोधर मैठाणी, नवीन मैठाणी, राजशेखर लिंग, बागेंश लिंग, सरस्वती धिरवाण, प्रमोद नेगी, राजकुमार तिवाडी, कर्मवीर बर्त्वाल, लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, अरूणा नौटियाल, विजया नेगी सहित देश विदेश के श्रद्धालु मौजूद थे।

 

आर्मी की बैंड धुनों में जमकर नाचे
बाबा केदार की डोली को केदारनाथ रवाना करने के लिये भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। तेज धूप के बावजूद भी श्रद्धालु दूर-दराज से बाबा केदार के दर्शनों के लिये पहुंचे। बाबा केदार की डोली की अगुवाई कर रही 10 जैकलाई आर्मी की बैंड मधुर धुनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएं बाबा की भक्ति में चूर नजर आये।

 

बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली के केदारनाथ रवाना होते ही केदारनाथ यात्रा का विधिवत आगाज हो गया है। बाबा की डोली के साथ हजारों तीर्थ यात्री पैदल यात्रा कर रहे हैं, जबकि केदारघाटी में देश-विदेश के हजारों तीर्थ यात्री पहुंच चुके हैं। अब सबकी एक ही इच्छा है कि इस बार अधिक से अधिक तीर्थ यात्री केदारनाथ आयें, जिससे केदारनाथ यात्रा अपने पुराने रिकार्ड तोड़ सके।

 

पुरानी यादों को भुला चुके हैं श्रद्धालु
वक्त के साथ-साथ सब कुछ बदल जाता है। कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि केदारघाटी में इतनी बड़ी त्रासदी आने के बाद भी यहां की जनता अपने पैरों पर दोबारा खड़ी होगी, लेकिन आज केदारघाटी की तस्वीर बदल गई है। आपदा के बाद पांच वर्षों के अंतराल में लोगों ने आपदा की कड़वी यादों को पीछे छोड़ दिया है।

 

पिछले वर्ष से बाबा केदार की डोली के केदार धाम की रवानगी के दौरान जिस प्रकार का उत्साह तीर्थ यात्रियों के साथ ही स्थानीय श्रद्धालुओं में देखने को मिल रहा है, उससे यही लगता है कि अब केदारघाटी के लोगों ने आपदा की यादों को पीछे छोड़ दिया है। एक बार फिर से उत्सव यात्रा में पहले जैसी रौनक देखने को मिल रही है।

 

कहावत है कि दिन गुजर जाते हैं और यादें शेष रह जाती हैं। 16-17 जून 2013 को केदारनाथ त्रासदी का मंजर आज भी आपदा पीडि़तों के जेहन में कहीं न कहीं बसा होगा, लेकिन जिस प्रकार केदारघाटी की जनता ने भगवान केदारनाथ को विदा किया, उससे यही लग रहा है कि आपदा पीडि़त जनता आपदा की कड़वी यादों को पीछे छोड़कर फिर से नये सिरे से अपना जीवन जीना चाहती है।

 

केदारघाटी की जनता की बाबा केदार से यही पुकार है कि आपदा का वो खौफनाक मंजर दोबारा देखने को न मिले और यहां के लोगों का रोजगार फिर से पटरी पर लौट आये। बृहस्पतिवार को जब बाबा केदार की डोली धाम के लिये प्रस्थान कर रही थी तो कई महिलाओं की आंखे नम हो गई। हो भी क्यों न। अगर किसी ने सबसे अधिक दुख सहा है तो वह केदारघाटी की ही महिलाएं हैं।

 

वर्ष 2012 में ऊखीमठ और वर्ष 2013 में केदारनाथ जैसी भयावह आपदा झेलने वाली केदारघाटी की महिलाओं ने बाबा केदार की डोली को हंसी-खुशी केदारनाथ के लिये रवाना की। स्थानीय महिलाएं जहां मांगल गीत गा रही थी, वहीं कई महिलाएं ऐसी भी थी जो आर्मी की बैंड धुनों पर नृत्य कर रही थी। इन सब नजारों को देखकर यही लग रहा था कि केदारघाटी के लोगों में आपदा से पहला जैसा उत्साह एवं उमंग लौट आया है। स्थानीय व्यवसायियों के चेहरों पर भी मुस्कान देखने को मिली। होटल-लॉज व्यवसायियों के पास पहले ही एडवांस बुकिंग आ चुकी हैं।

 

बाबा के दर्शनों के लिये उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
भगवान भोलेनाथ ग्रीष्मकाल के छह माह अब केदारधाम में व्यतीत करेंगे। केदारनाथ रवाना होने पर शीतकालीन गददीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में देश-विदेश के साथ ही स्थानीय श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा। यात्रा को लेकर तीर्थ यात्रियों के साथ ही स्थानीय जनता में भारी उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी थी कि मंदिर परिसर में पैर रखने की जगह नहीं थी। इसके साथ ही मंदिर परिसर के पैदल रास्ते एवं अन्य क्षेत्रों में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शनों के लिये खड़े थे।

 

रॉवल ने दिया पूजा का संकल्प
रॉवल भीमा शंकर लिंग ने केदारनाथ के प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग को पगड़ी व टोपी पहनाकर छः माह केदारनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना का संकल्प दिया। रावल द्वारा प्रधान पुजारी को दिये गये संकल्प के अनुसार केदारनाथ के प्रधान पुजारी को छः माह केदारपुरी में ही प्रवास करना होगा। छह माह तक प्रधान पुजारी को नदी, नालों व पर्वतों की सीमा को पार करना भी वंचित माना गया है।

Loading...