p.m.-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फैसले से उड़े सियासी नेताओं के होश

प्रधानमंत्री
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े नोट बंद करने के अचानक फैसले से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगे नेताओं के होश फाख्ता हो गए हैं। राज्य विधानसभा के चुनाव चार महीने में होने हैं, और इसकी तैयारी में सम्भावित उम्मीदवारों के साथ ही राजनीतिक दल पूरी ताकत से लगे हैं। ऐसे में पांच सौ और एक हजार के नोट अचानक बंद कर दिए जाने से चुनाव की तैयारी में लगे नेताओं के होश उड़ गए।

पीएम मोदी का फैसला अव्यवहारिक

लखनऊ के लोहिया पार्क में सुबह टहलने वाले एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि प्रधानमंत्री का यह निर्णय अव्यवहारिक है। नोटों के चलन को बंद करने से पहले एक ‘एलार्मÓ देना चाहिए था। नोट बंद करने की तिथि घोषित होने पर लोग अपनी जरुरत का सामान तो खरीद लेते। उनका तर्क था मेरे चुनाव क्षेत्र में कई शादियां हैं, ऐसे में इस निर्णय से शादियों के इन्तजाम प्रभावित हो रहे हैं। सब्जी की व्यवस्था कैसे हो। शादी के लिए अन्य जरुरी सामान कैसे खरीदे जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक दिन बाद दो हजार और उसके कुछ दिन बाद चार हजार रुपए मात्र निकालने से कैसे काम चलेगा। यह निर्णय मोदी के तानाशाह रवैये को ही दर्शाता है।

लखनऊ के लोहिया पार्क में सुबह टहलने वाले एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, ‘प्रधानमंत्री का यह निर्णय अव्यवहारिक है। नोटों के चलन को बन्द करने से पहले एक ‘एलार्मÓ देना चाहिए था। नोट बन्द करने की तिथि घोषित होने पर लोग अपनी जरूरत का सामान तो खरीद लेते।Ó उनका तर्क था, ‘मेरे चुनाव क्षेत्र में कई शादियां हैं, ऐसे में इस निर्णय से शादियों के इन्तजाम प्रभावित हो रहे हैं।

सब्जी की व्यवस्था कैसे हो। शादी के लिए अन्य जरूरी सामान कैसे खरीदे जायेंगे।Ó उन्होंने कहा, ‘एक दिन बाद 2000 और उसके कुछ दिन बाद 4000 रूपये मात्र निकालने से कैसे काम चलेगा। यह निर्णय मोदी के तानाशाह रवैये को ही दर्शाता है। पूरब के एक जिले में चुनाव की तैयारियों में जोर शोर से लगे इन नेताजी ने कहा अचानक लिए गये इस फैसले से जन सामान्य के सामने कठिनाई खड़ी कर दी है। तमाम किसान ऐसे हैं जो गन्ना जैसे कैश क्राप के जरिये लाखों रूपये आर्जित करते हैं और वे ज्यादातर पैसे घर में ही रखते हैं। उनके सामने तो विकट समस्या पैदा हो जायेगी।
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सपा व बसपा असमंजस में

सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी(बसपा) के नेता इस निर्णय पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं, जबकि कांग्रेस फैसले को सही लेकिन इसके तरीके को गलत ठहरा रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मोदी के फैसले को सही ठहरा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 के नोट बन्द कर काले धन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइकÓ की है।

सपा के एक नेता ने स्वीकार किया कि अचानक इन नोटों के चलन बन्द करने से चुनाव लडने में दिक्कत आयेगी। आमतौर पर चुनाव के लिए लोग पैसा रखते हैं। इनमें बड़े लोग ही ज्यादातर होते हैं, लेकिन यह भी सही है कि इसमें ज्यादातर पैसे चन्दे के ही होते हैं। चन्दा देने वाले का कभी कभी नाम पता भी नहीं लिखा होता। ऐसे में अब नये सिरे से चुनाव तैयारियों के लिए चन्दा एकत्र करना होगा।

भाजपा ने करार दिया ऐतिहासिक फैसला

उधर, भाजपा ने मोदी के निर्णय को देश की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि इससे आने वाले दिनों में भारत एक मजबूत आर्थिक ताकत बनकर सामने आयेगा। भाजपा विधानमण्डल दल के नेता सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि काले धन की वजह से गरीबों का जीवन दूभर हो गया था। रोजमर्रा की जरुरतों के सामान की कीमत आकाश छू रही थी। सामान्य आदमी मकान नहीं ले सकता था। घर और जमीन की कीमत दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ रही थी। खन्ना ने कहा कि मोदी के निर्णय से आम आदमी बहुत खुश है। काला धन रखने वाले निराश हैं। केन्द्र की भाजपा की सरकार गरीबों के लिए समर्पित है।

मोदी ने शपथ लेने के तत्काल बाद ही कह दिया था कि उनकी सरकार गरीबों के लिए समर्पित रहेगी। यह निर्णय लेकर मोदी ने साबित कर दिया कि वह और उनकी सरकार वास्तव में गरीबों के लिए समर्पित है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष सत्य देव त्रिपाठी ने कहा कि निर्णय तो सही है, लेकिन हड़बड़ी में लिया गया है। हड़बड़ी में लिये गये निर्णय आमतौर पर सही नहीं होते। त्रिपाठी ने कहा कि 1000 के नोट बन्द कर 2000 के नोट चलन में लाने का क्या औचित्य है। एक हजार के नोट से कालाबाजारी हो सकती है तो दो हजार के नोट से कालाबाजारियों को और मदद मिलेगी।

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