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न्यू इंडिया: देश की नसों में दौड़ती घृणा,हिंसा,उन्माद की नयी डोज !

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इंद्रेश मैखुरी

नारा तो न्यू इंडिया बनाने का गया उछाला गया था.लेकिन जो इंडिया नजर आ रहा है,उसमें न्यू तो कुछ नहीं दिख रहा.अलबत्ता घृणा,हिंसा,उन्माद की नयी डोज जरुर इस इंडिया की नसों में दौड़ती दिखाई रही है.हर दिन हिंसा,हत्या,बलात्कार जैसी घटनाओं के खबरें इंडिया के न्यू बनने की पुष्टि तो नहीं करती हैं.

पिछले दिनों भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद,सपत्नीक पुरी गए तो जगन्नाथ मंदिर के पंडों के हाथों अपमानित होना पड़ा.जाति और उसकी श्रेष्ठता के मिथ्याबोध में ‘न्यू’ तो सिर्फ यही है कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी तक इसकी चपेट में आ गए.

भीड़ द्वारा घेर कर मारे जाने की घटनाएँ, तो आये-दिन की बात हो गयी है.भीड़ घेर कर हत्या ही नहीं कर रही है,वह ऐसे वहशियाना कृत्यों की विडियो भी बना रही है.उत्तर प्रदेश में तो भीड़ द्वारा घेर कर पीटा गया व्यक्ति पानी मांगता रहा और मर गया. भीड़ जब मारे गये व्यक्ति को घसीट कर ले जा रही थी तो पुलिस भीड़ के आगे-आगे चल रही थी.

सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस कृत्य के लिए आधिकारिक तौर पर माफ़ी मांगी.महिलायें,लड़कियां तो इस तथाकथित न्यू इंडिया में लगता है कि सर्वाधिक असुरक्षित हैं.बीते हफ्ते में ही लखनऊ में संस्कृति राय नाम की युवती की हत्या कर दी गयी.इस घटना की आंच अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में आठ साल बच्ची के साथ दुष्कर्म की खबर सामने आ गयी.

ये खबर लगभग,उसी समय सामने आई,जिस वक्त यह रिपोर्ट आई कि भारत महिलाओं के लिए सर्वाधिक असुरक्षित देश है.एक छोटी आठ साल की बच्ची को देख कर यौन लिप्सा जागृत हो रही है,यह कैसे यौन कुंठितों का समाज है या बन रहा है ?

जो भी ऐसे जघन्य काण्ड में लिप्त है,उसे सजा होनी चाहिए.किसी भी स्वस्थ मस्तिष्क की यही प्रतिक्रिया होगी.उसके लिए धर्म देखने का कोई अर्थ नहीं होगा.अपराधी का धर्म-इस्लाम है तो मंदसौर में हिन्दू और मुसलमान दोनों अपराधी के खिलाफ सड़कों पर हैं.

मुस्लिम समाज ने ऐलान कर दिया है कि अपराधी को कब्रिस्तान में जगह भी नसीब नहीं होगी.लेकिन इस देश में एक बीमार मानस बन रहा है,जो कि हर घटना को धार्मिक उन्माद फैलाने के मौके के तौर पर देखता है.इसलिए जो कठुआ में बलात्कार के आरोपियों के समर्थन में तिरंगा लेकर मार्च करने को भी जायज ठहरा रहे थे,वही मंदसौर के मामले में भी ग़मगीन नहीं है.

एक आठ साल की बच्ची के साथ वहशियाना हरकत पर अफ़सोस से ज्यादा लगता है कि उनमें इस बात का उत्साह है कि अपराधी,उस धर्म का है,जिसके खिलाफ उन्माद फ़ैलाने पर ही उनका सारा राजनीतिक वजूद टिका हुआ है.उन्हें अफ़सोस होता तो वो ग़मगीन होते.

लेकिन वे तो घृणा फैलाने में इस कदर मशगूल हैं कि पवन शर्मा सोशल मीडिया में रजिया बानो बन कर घृणा फैलाने का कारोबार चला रहा है.दिमागों में भरी गंदगी,घृणा और उन्माद के भाव ने लोगों को कहाँ पहुंचा दिया है कि आठ साल की बच्ची के साथ हुआ दुष्कर्म भी उन्हें विचलित नहीं करता बल्कि उन्हें यह अपने घृणा के एजेंडे को आगे बढाने का एक और अवसर मालूम पड़ता है !

जाति-धर्म के नकली श्रेष्ठता बोध से युक्त,यौन कुंठाओं से लबरेज,हिंसा, घृणा और उन्माद से कूट-कूट कर भरे लोगों के साथ न्यू इंडिया का जुमला तो उछाला जा सकता है पर न्यू इंडिया नहीं बनाया जा सकता.ऐसे में न्यू इंडिया तो क्या,जो बना-बनाया इंडिया और उसका सामाजिक ताना-बाना है,वो भी धराशायी हो जाएगा.निर्दोष पुरुषों और महिलाओं को उन्मादियों,हत्यारे,बलात्कारियों से बचाइए तभी इंडिया भी बचेगा और न्यू भी बन सकेगा.

 

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